भारतीय सशस्त्र बलों में लॉजिस्टिक्स का महा-एकीकरण
भारतीय रक्षा व्यवस्था में एक युगांतरकारी बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। अब तक थलसेना, नौसेना और वायुसेना अपने-अपने राशन, कलपुर्जों, ईंधन और सैन्य साजो-सामान का हिसाब अलग-अलग तंत्र पर रखते आए हैं। इस पुरानी व्यवस्था को समाप्त कर अब तीनों सेनाओं के लिए एक साझा और एकीकृत लॉजिस्टिक्स ढांचा तैयार किया जा रहा है। रक्षा मंत्रालय का डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स इस पूरी परियोजना को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य युद्ध या आपातकाल की स्थिति में तीनों सेनाओं को एक ही डिजिटल स्क्रीन पर आवश्यक सामग्री की जानकारी उपलब्ध कराना है।
यह नया बदलाव अमेरिकी डिफेंस लॉजिस्टिक्स एजेंसी (DLA) के मॉडल से प्रेरित है। इसके तहत अब तीनों सेनाओं की आपूर्ति और इन्वेंट्री का प्रबंधन ट्राई-सर्विसेज लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट एप्लिकेशन के माध्यम से किया जाएगा। इससे थिएटर कमांड्स को सीमावर्ती इलाकों में रियल-टाइम के आधार पर ईंधन, राशन, गोला-बारूद और कलपुर्जों की निर्बाध सप्लाई मिल सकेगी।
पुराने ढर्रे से मुक्ति: अलग-अलग डिपो की प्रणाली होगी खत्म
अब तक भारत में सेनाओं के रसद और रखरखाव का ढांचा पूरी तरह से अलग-अलग बंटा हुआ था। थलसेना की ओर से आर्मी सर्विस कोर, आर्मी ऑर्डिनेंस कोर तथा ईएमई अपनी जरूरतें संभालते थे, वहीं नौसेना की लॉजिस्टिक्स शाखाएं और वायुसेना के मेंटेनेंस डिपो स्वतंत्र रूप से काम करते थे। इस विकेंद्रीकृत व्यवस्था की वजह से कई चुनौतियां सामने आती थीं:
- समय की बर्बादी: किसी एक सेना को दूसरे बल के पास मौजूद सामान की जानकारी जुटाने में काफी समय लगता था।
- सरकारी खजाने पर बोझ: एक ही शहर या स्टेशन पर दो अलग-अलग सेनाओं के डिपो मौजूद होने से अनावश्यक रखरखाव खर्च बढ़ता था।
- आपात स्थिति में तालमेल की कमी: युद्ध या संकट के समय अलग-अलग लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के कारण तुरंत रसद पहुंचाना जटिल हो जाता था।
इस पुराने ढर्रे को पूरी तरह खत्म करने के लिए देश भर में संयुक्त लॉजिस्टिक्स नोड्स स्थापित किए जा रहे हैं। पिछले वर्ष कोलकाता में आयोजित कमांडर्स सम्मेलन के दौरान तीन संयुक्त मिलिट्री स्टेशनों की औपचारिक घोषणा की गई थी। इसके अतिरिक्त देश भर में साझा गोला-बारूद डिपो और एयर स्टोर्स सप्लाई पार्क का निर्माण किया जा रहा है ताकि संसाधनों की बर्बादी रोकी जा सके।
अमेरिकी डिफेंस लॉजिस्टिक्स एजेंसी की तर्ज पर नया मॉडल
भारतीय सेना के इस एकीकरण में अमेरिका की रक्षा आपूर्ति प्रणाली का बड़ा योगदान है। राज्यसभा सांसद डॉ. अजीत माधवराव गोपछडे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विस्तृत पत्र भेजा था, जिसमें उन्होंने अमेरिका की डिफेंस लॉजिस्टिक्स एजेंसी जैसा एक एकीकृत ढांचा तैयार करने का सुझाव दिया था। अमेरिका में यह संस्था पूरी सेना के लिए आवश्यक सामान की खरीद, भंडारण, ईंधन आपूर्ति और कलपुर्जों का वितरण एक ही छत के नीचे संभालती है।
सांसद के इस सुझाव पर डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स के संयुक्त सचिव रियर एडमिरल कुणाल सिंह राजकुमार ने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना भी इसी दिशा में बहुत तेजी से कदम बढ़ा रही है। भारत सरकार के लिए तीनों सेनाओं का लॉजिस्टिक्स एकीकरण एक अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक प्राथमिकता बन चुका है। इस नए मॉडल को सुचारू रूप से चलाने के लिए दशकों पुराने वित्तीय नियमों और खरीद प्रक्रियाओं में भी व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं।
डिजिटल एकीकरण: ट्राई-सर्विसेज ऐप और नेशनल कोडिफिकेशन
तीनों सेनाओं के बीच तकनीकी और प्रशासनिक एकीकरण लाने के लिए कई डिजिटल पहल शुरू की गई हैं। नया ट्राई-सर्विसेज लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट एप्लिकेशन तीनों सेनाओं में इस्तेमाल होने वाले अलग-अलग ईआरपी (ERP) सिस्टम को एक साझा इंटरफेस पर लाएगा। इसके साथ ही निम्नलिखित प्रमुख सुधार लागू किए जा रहे हैं:
- नेशनल डिफेंस कोडिफिकेशन सिस्टम: नाटो के स्टॉक नंबर सिस्टम की तरह एक समान कोडिफिकेशन लागू किया जा रहा है, ताकि हर पुर्जे और सामान की पहचान एक ही नंबर से हो सके।
- पीएम गति शक्ति डिफेंस पोर्टल: यह पोर्टल नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी और यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म के साथ सीधा जोड़ा जाएगा।
- संयुक्त कार्य समितियां: प्रक्रियाओं में एकरूपता लाने के लिए जॉइंट ऑपरेशंस लॉजिस्टिक्स कमेटी और इंटर-सर्विसेज मेंटेनेंस वर्किंग ग्रुप जैसी संस्थाएं काम कर रही हैं।
दुर्गम सीमाओं और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में AI का प्रयोग
सशस्त्र बल अब रसद प्रबंधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग का दायरा बड़े पैमाने पर बढ़ा रहे हैं। सेना ने सीमित स्तर पर प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस एनालिटिक्स का उपयोग पहले ही शुरू कर दिया है। इस आधुनिक तकनीक से यह पहले ही पता चल जाता है कि किस टैंक, तोप या लड़ाकू विमान का कौन सा पुर्जा कब खराब होने वाला है।
लद्दाख और पूर्वोत्तर जैसे बेहद कठिन भौगोलिक वातावरण वाले इलाकों में AI की भूमिका निर्णायक साबित होगी। इससे दुर्गम सीमाओं पर सैन्य काफिलों की आवाजाही को बेहतर तरीके से प्लान किया जा सकेगा। हथियारों और सैन्य गाड़ियों के बंद रहने की अवधि में भारी कमी आएगी, जिससे शून्य से नीचे तापमान में तैनात जवानों को हमेशा युद्ध के लिए तैयार रखा जा सकेगा।
सुरक्षित मिलिट्री फ्यूल कार्ड और लीकेज पर लगाम
सैन्य रसद व्यवस्था का एक अत्यंत संवेदनशील पहलू ईंधन प्रबंधन है। नए ढांचे के अंतर्गत आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के लिए तेल की खरीद, भंडारण और परिवहन को पूरी तरह एक किया जा रहा है। इसके लिए देश की प्रमुख तेल कंपनियों आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल के साथ मिलकर एक सुरक्षित मिलिट्री फ्यूल कार्ड बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।
यह फ्यूल कार्ड प्रणाली आरएफआईडी (RFID), जीपीएस (GPS) और डिजिटल ऑडिट से जुड़ी होगी। इससे ईंधन की चोरी, लीकेज और बर्बादी पर पूरी तरह लगाम लगेगी। साथ ही अत्यधिक ठंड और अत्यधिक गर्मी में सैन्य वाहनों के इंजनों को सुरक्षित रखने के लिए एक इंटीग्रेटेड पेट्रोलियम क्वालिटी एश्योरेंस नेटवर्क का गठन किया जा रहा है, जिससे कठिन से कठिन मौसम में भी ईंधन की गुणवत्ता प्रभावित न हो।
भविष्य के थिएटर कमांड्स के लिए गेम-चेंजर साबित होगा नया ढांचा
भारत आने वाले समय में थल, नभ और जल सेना को मिलाकर एकीकृत थिएटर कमांड्स के गठन की दिशा में बढ़ रहा है। किसी भी आधुनिक युद्ध रणनीति में जीत इस बात पर निर्भर करती है कि अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैनिकों तक कितनी तेजी से रसद और गोला-बारूद पहुंचता है। यदि युद्ध के दौरान तीनों सेनाएं अपनी-अपनी सप्लाई लाइन पर निर्भर रहेंगी तो सैन्य अभियान में देरी हो सकती है।
नया साझा लॉजिस्टिक्स सिस्टम हर सैन्य कमांडर को एक ही डिजिटल स्क्रीन पर पूरे देश के डिपो की स्थिति स्पष्ट दिखाएगा। इससे संकट के समय किसी भी नजदीकी बेस से बिना किसी प्रशासनिक देरी के तुरंत सामान और हथियार डायवर्ट किए जा सकेंगे, जो भारतीय सीमाओं की सुरक्षा को कई गुना मजबूत बनाएगा।
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