महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख
महाराष्ट्र में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर चिंताजनक स्थितियों और मिलावटखोरी के बढ़ते मामलों के बीच राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने बेहद सख्ती बरती है। विभाग द्वारा 30 सितंबर तक के आंकड़ों के आधार पर जारी की गई विस्तृत रिपोर्ट यह बताती है कि राज्य में प्रतिबंधित खाद्य सामग्री की बिक्री और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वालों के विरुद्ध बड़े पैमाने पर छापेमारी की गई है। इस पूरी कार्रवाई के अंतर्गत कुल 78.49 करोड़ रुपये की मूल्यवान खाद्य सामग्री जब्त की गई है, जो जनता के स्वास्थ्य के प्रति विभाग की गंभीरता को दर्शाती है।
प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों के खिलाफ सघन अभियान
विभाग ने प्रतिबंधित वस्तुओं के कारोबार को पूरी तरह से नष्ट करने के लिए राज्य के विभिन्न हिस्सों में कुल 1,472 स्थानों पर सर्च और सीजर ऑपरेशन चलाए। इन ऑपरेशनों का मुख्य विवरण इस प्रकार है:
- लगभग 27.85 करोड़ रुपये मूल्य के प्रतिबंधित खाद्य पदार्थ जब्त किए गए।
- कानूनी कार्रवाई करते हुए 1,175 एफआईआर दर्ज की गईं।
- अब तक कुल 1,529 लोगों की गिरफ्तारी के आंकड़े सामने आए हैं, जिनकी पुष्टि प्रेस नोट के माध्यम से की जानी शेष है।
- कुल 96 गंभीर मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
- कार्रवाई के दौरान 837 प्रतिष्ठानों को पूरी तरह से सील कर दिया गया।
- अवैध गतिविधियों में शामिल 205 वाहनों को भी जब्त किया गया, जिनकी अनुमानित कीमत 13.61 करोड़ रुपये है।
दूध और डेयरी उत्पादों की शुद्धता की जांच
दूध और उससे बने उत्पादों में मिलावट एक गंभीर समस्या है, जिसे देखते हुए विभाग ने 3,109 प्रतिष्ठानों का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान 4,228 नमूने एकत्र किए गए। जांच के परिणाम काफी चिंताजनक रहे, जिनमें 261 नमूने घटिया गुणवत्ता के और 89 नमूने असुरक्षित पाए गए। तत्काल कार्रवाई करते हुए 2,03,862 लीटर दूध मौके पर ही नष्ट कर दिया गया, जिसकी कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। इसके अतिरिक्त 7.99 करोड़ रुपये मूल्य के अन्य डेयरी उत्पाद जब्त किए गए और 19 एफआईआर दर्ज कर 65 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
दूध शीतकरण केंद्रों का ऑडिट
डेयरी के अलावा, दूध शीतकरण केंद्रों पर भी विशेष नजर रखी गई। यहां 1,078 नमूनों की जांच की गई, जिसमें 39 नमूने घटिया, 18 असुरक्षित और 4 मिसब्रांडेड पाए गए। इस क्षेत्र में कुल 5,885 क्विंटल सामग्री जब्त की गई, जिसका मूल्य लगभग 5.47 करोड़ रुपये है। साथ ही नियमों के उल्लंघन पर 26 लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं।
होटल और रेस्टोरेंट पर कड़ी नजर
खाद्य सुरक्षा के दायरे में होटल, रेस्टोरेंट और खाने-पीने के अन्य प्रतिष्ठान भी शामिल हैं। कुल 5,355 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करने के बाद 3,340 को सुधार नोटिस जारी किए गए। सितंबर में हुए गणेशोत्सव के दौरान भी एक विशेष अभियान चलाया गया था, जिसमें 4,351 प्रतिष्ठानों की जांच हुई और 2,237 को नोटिस मिले। गणेशोत्सव के दौरान ही 486 लाइसेंस निलंबित और 15 लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई की गई। साथ ही, 705 स्थानों पर बिना लाइसेंस के कारोबार संचालित होते पाए गए, जिन पर नियमानुसार कार्रवाई की गई।
जागरूकता और समग्र निरीक्षण
खाद्य सुरक्षा केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि विभाग स्कूलों में संतुलित आहार के प्रति भी जागरूकता फैला रहा है। अब तक 62,000 से अधिक स्कूलों को प्रशिक्षित किया गया है, जिसमें 70,000 से ज्यादा शिक्षकों को जोड़ा गया है। विभाग का लक्ष्य राज्य के सभी 36 जिलों में फैले 19,713 निरीक्षणों के जरिए खाद्य सुरक्षा का जाल मजबूत करना है। अब तक 892 प्रतिष्ठानों का निलंबन, 1,538 को कारोबार बंद करने के नोटिस और 8,799 को सुधार नोटिस जारी किए गए हैं। साथ ही 3,235 मामलों में कंपाउंडिंग कर 3.35 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया है।
महत्वपूर्ण नीतिगत आदेशों का कार्यान्वयन
खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महाराष्ट्र के एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंडे के मार्गदर्शन में अब तक 13 मुख्य आदेश जारी किए गए हैं, जो जून 2026 से अक्टूबर 2026 तक की अवधि में लागू किए गए हैं:
- 12 जून: मोक्का से संबंधित आदेश।
- 23 जून: होटल और रेस्टोरेंट उद्योग के मानक।
- 3 जुलाई: दूध और दुग्ध उत्पाद नीति।
- 13 जुलाई: गुटखा बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध।
- 28 जुलाई: स्कूली पोषण और संतुलित आहार निर्देश।
- 30 जुलाई: एनालॉग पनीर और गैर-डेयरी पनीर पर प्रतिबंध।
- 7 अगस्त: असुरक्षित खाद्य पदार्थों पर सख्त परिपत्र।
- 13 अगस्त: फूड पॉइजनिंग के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP)।
- 20 अगस्त: खाद्य तेल की शुद्धता के आदेश।
- 3 सितंबर: त्योहारों के दौरान विशेष सुरक्षा निर्देश।
- 11 सितंबर: जिला स्तरीय सलाहकार समितियों का गठन।
- 29 सितंबर: शिशु आहार के नियमों में सुधार।
- 15 अक्टूबर: मसालों और कंडिमेंट्स के लिए अनुपालन आदेश।
इन सभी प्रयासों के अतिरिक्त, विभाग ने पूर्व में दवाओं के खिलाफ भी बड़ी कार्रवाई की थी, जिसमें 4,256 निरीक्षणों के बाद 19.11 करोड़ रुपये का स्टॉक जब्त किया गया था। खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह प्रशासनिक कवायद निरंतर जारी रहेगी ताकि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ कोई समझौता न हो।
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