सुप्रीम कोर्ट की दो टूक: न्यायपालिका को डराना मुमकिन नहीं, दिल्ली प्रदर्शन मामले में हुई अहम सुनवाई

दिल्ली में हुए हालिया विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि कोई भी न्यायपालिका पर दबाव नहीं बना सकता और सभी की बातों को गंभीरता से सुना जाएगा।

न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख

दिल्ली में आयोजित हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद उपजे विवादों और कानूनी याचिकाओं पर आज सर्वोच्च न्यायालय ने बेहद सख्त तेवर अपनाए। सुनवाई के दौरान जब सुप्रीम कोर्ट परिसर में राजनीतिक जुलूस निकालने और न्यायपालिका पर दबाव बनाने का मुद्दा उठा, तो मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका को कोई भी डरा या धमका नहीं सकता। वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने कोर्ट परिसर में प्रदर्शनों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे न्याय की प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश बताया, जिसका संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने अपनी स्थिति साफ कर दी।

चुनाव आयोग और संबंधित पक्षों को नोटिस

अदालत ने भारतीय निर्वाचन आयोग के कामकाज और अन्य प्रशासनिक निर्णयों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर संज्ञान लेते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सहित चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार से भी जवाब तलब किया गया है। कोर्ट ने राहुल गांधी, अखिलेश यादव, दिग्विजय सिंह और असदुद्दीन ओवैसी जैसे प्रमुख नेताओं की याचिकाओं पर भी नोटिस जारी कर उन्हें अपना पक्ष रखने को कहा है।

पत्रकारों पर हमले और जांच समिति

विरोध प्रदर्शनों के दौरान महिला पत्रकारों के साथ पुलिस की कथित बदसलूकी और हिंसा का मुद्दा भी कोर्ट में जोर-शोर से उठा। इस पर चिंता व्यक्त करते हुए अदालत ने संकेत दिए हैं कि आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जा सकता है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश ने वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह को निर्देश दिया कि वे इससे संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज दो सीलबंद लिफाफों में अदालत के समक्ष पेश करें। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस दौरान तकनीकी चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि आज के दौर में रील बनाने वाले और स्वतंत्र पत्रकारों के बीच फर्क करना मुश्किल हो गया है, जिसके जवाब में अदालत ने स्पष्ट किया कि पत्रकारिता की आड़ में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

पुलिस को निर्देश और सीसीटीवी सुरक्षा

अदालत ने दिल्ली पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि विरोध प्रदर्शन से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखा जाए। जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने के मामले में कोर्ट ने सरकार से पूछा कि क्या यह निर्णय केवल अदालती टिप्पणियों के चलते लिया गया या इसके पीछे कोई ठोस रिपोर्ट थी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को जानकारी दी कि इसके लिए पहले ही एक विशेष समिति का गठन किया गया था जिसने विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है। साथ ही, कोर्ट ने आदेश दिया कि संबंधित महिला पत्रकार को तब तक गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, जब तक वह जांच प्रक्रिया में पूरा सहयोग दे रही है।

सभी पक्षों की सुनवाई और आगामी प्रक्रिया

सर्वोच्च न्यायालय ने दोहराया कि उनके लिए हर नागरिक की आवाज कीमती है और हर पक्ष की दलील को पूरी गंभीरता से सुना जाएगा। अदालत ने गृह मंत्रालय, दिल्ली मेट्रो और दिल्ली पुलिस द्वारा प्रस्तुत हलफनामों का संज्ञान लिया है। फिलहाल सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने के साथ सुनवाई का पहला चरण पूरा हो गया है।

सुनवाई के 10 प्रमुख बिंदु

  • मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
  • विरोध प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार की जांच के लिए समिति बनाने का संकेत दिया गया है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की याचिकाओं पर उन्हें नोटिस जारी किए हैं।
  • कोर्ट ने 12 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों के दौरान राहुल गांधी के आचरण पर स्पष्टीकरण की मांग की है।
  • सॉलिसिटर जनरल ने डिजिटल युग में पत्रकारिता की परिभाषा और चुनौतियों पर सरकार का पक्ष रखा है।
  • दिल्ली पुलिस को विरोध प्रदर्शन के दौरान की सीसीटीवी फुटेज को पूरी तरह सुरक्षित रखने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
  • अदालत ने स्पष्ट किया कि महिला पत्रकारों को जांच में शामिल होने की स्थिति में गिरफ्तारी से राहत दी गई है।
  • गृह मंत्रालय, दिल्ली मेट्रो और दिल्ली पुलिस के हलफनामों पर कोर्ट अगली सुनवाई में विचार करेगा।
  • एसआईआर (SIR) से जुड़ी याचिकाओं और विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध संबंधी याचिकाओं को अलग-अलग सुना जाएगा।
  • सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि न्यायपालिका के स्वतंत्र कामकाज में हस्तक्षेप की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

फिलहाल अदालत ने अगली तारीख के बारे में कोई घोषणा नहीं की है, लेकिन संभावना है कि सभी मामलों पर विस्तृत लिखित आदेश जल्द ही जारी किए जाएंगे।

https://www.indiatv.in/india/national/supreme-court-hearing-in-delhi-protest-sir-cec-gyanesh-kumar-sc-issued-notices-in-10-points-2026-10-15-1249008