हत्या के दोषी की सजा घटाने पर सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को लगाई फटकार, पूछा- उम्रकैद क्यों न वापस हो?

छत्तीसगढ़ में एक हत्या के मामले में दोषी की सजा उम्रकैद से घटाकर 10 साल करने पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले की कड़ी आलोचना की है।

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश पर उठाए सवाल

छत्तीसगढ़ में एक महिला की हत्या के मामले में आरोपी को दी गई सजा को कम करने का फैसला हाईकोर्ट के लिए मुसीबत बन गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दखल देते हुए हाईकोर्ट के निर्णय पर गहरी नाराजगी जाहिर की है। अदालत ने स्पष्ट रूप से टिप्पणी की कि हाईकोर्ट का यह फैसला न्यायिक मापदंडों के अनुरूप नहीं है। मामले की गंभीरता को देखते हुए शीर्ष अदालत ने पूछा है कि आखिर किस आधार पर हत्या जैसे संगीन अपराध में आरोपी की सजा को उम्रकैद से घटाकर 10 साल किया गया।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की टिप्पणी

इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की खंडपीठ कर रही थी। पीठ ने मामले का विश्लेषण करते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने घटना के दौरान दी गई चोटों की गंभीरता, इस्तेमाल किए गए हथियारों की प्रकृति और वारदात की परिस्थितियों का उचित मूल्यांकन नहीं किया है। अदालत ने यहां तक कह दिया कि हाईकोर्ट के न्यायाधीश भारतीय दंड संहिता यानी IPC की धारा 304 के दोनों भागों के बीच के तकनीकी अंतर को समझने में स्पष्ट नहीं थे।

नोटिस जारी कर मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने अब राज्य सरकार और आरोपी चिंतामणि उर्फ चिंटू पटेल को आधिकारिक नोटिस जारी कर दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने पूछा है कि क्यों न हाईकोर्ट के फैसले को पूरी तरह रद्द कर दिया जाए और निचली अदालत द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा को फिर से बहाल किया जाए। शीर्ष अदालत ने इस आदेश के माध्यम से यह संदेश दिया है कि जघन्य अपराधों में सजा कम करने के लिए अपनाए जाने वाले तर्कों में पूर्ण स्पष्टता और कानूनी बारीकियों का ध्यान रखा जाना अनिवार्य है। अब देखना यह होगा कि इस नोटिस के जवाब में संबंधित पक्ष और सरकार क्या दलीलें पेश करते हैं।

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