साइबर सुरक्षा के लिए नई पहल
देश में जिस तरह से एक क्लिक के जरिए लोगों के बैंक खाते खाली किए जा रहे हैं, उससे साइबर सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई है। इस समस्या से निपटने और डिजिटल अपराधों की जांच को पुख्ता करने के लिए पटना में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (CNLU) ने सी-डैक, पटना के साथ मिलकर एक विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम की रूपरेखा तैयार की है।
क्या है यह एडवांस्ड सर्टिफिकेट प्रोग्राम
यह पहल साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल फोरेंसिक्स के क्षेत्र में विशेषज्ञता बढ़ाने के लिए शुरू की गई है। इस कार्यक्रम की कुल अवधि 60 घंटे तय की गई है। इस पूरी ट्रेनिंग के दौरान प्रतिभागियों को डिजिटल साक्ष्यों को तलाशने, उनकी बारीकी से जांच करने और अपराध से जुड़े तकनीकी पहलुओं को समझने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कब और किसके सहयोग से होगा आयोजन
इस सर्टिफिकेट प्रोग्राम का आयोजन 21 नवंबर से 20 दिसंबर 2026 तक किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में बिहार पुलिस की साइबर क्राइम एंड सिक्योरिटी यूनिट भी सक्रिय रूप से सहयोग प्रदान करेगी। इस साझेदारी का प्राथमिक उद्देश्य राज्य और देश के जांच तंत्र को अधिक सक्षम और आधुनिक बनाना है ताकि साइबर अपराधियों को समय रहते पकड़ा जा सके।
भविष्य के लिए तैयारी
आने वाले समय में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड के मामलों को देखते हुए इस तरह की ट्रेनिंग काफी अहम मानी जा रही है। इसका मुख्य लक्ष्य पुलिस और जांच एजेंसियों में साइबर फोरेंसिक की समझ विकसित करना है, ताकि डिजिटल सबूतों की मदद से केस को तेजी से सुलझाया जा सके। यह कोर्स कानूनी और तकनीकी दोनों ही दृष्टिकोण से जांच अधिकारियों के कौशल को निखारने का काम करेगा।
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