कुमाऊं पर बीजेपी की विशेष नजर
उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी का ध्यान अब पूरी तरह से कुमाऊं मंडल पर केंद्रित हो गया है। पार्टी के शीर्ष नेताओं का लगातार इस क्षेत्र का दौरा करना इस बात का संकेत है कि चुनावी रणनीति में कुमाऊं को कितनी अहमियत दी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी की यह सक्रियता सीधे तौर पर पिछले चुनावों के नतीजों से जुड़ी है।
क्यों जरूरी है कुमाऊं का किला जीतना?
साल 2022 के चुनावी आंकड़ों पर गौर करें तो बीजेपी के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण रही है। साल 2017 में कुमाऊं की कुल 29 सीटों में से बीजेपी ने 23 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की थी, लेकिन 2022 में यह आंकड़ा घटकर मात्र 18 सीटों पर सिमट गया। दूसरी ओर कांग्रेस के लिए यह दौर काफी फायदेमंद साबित हुआ और उनकी सीटें 5 से बढ़कर 11 तक पहुंच गईं।
संगठनात्मक सक्रियता और कार्यशालाएं
अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए बीजेपी ने कमर कस ली है। हाल ही में हल्द्वानी में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के लिए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का दौरा और काशीपुर में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला इसी रणनीति का हिस्सा है। पार्टी का मुख्य उद्देश्य आगामी चुनाव से पहले संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूती प्रदान करना और कार्यकर्ताओं में नया जोश भरना है ताकि 2027 में पुरानी बढ़त को दोबारा हासिल किया जा सके।
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