पाकिस्तान में बढ़ा राजनीतिक तनाव, खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन लागू होने के बाद हिंसक झड़पें

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में केंद्र सरकार द्वारा गवर्नर शासन लागू किए जाने के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई है, जहाँ इमरान खान की पार्टी के समर्थकों और पुलिस के बीच तीखी झड़पें देखी गई हैं।

पाकिस्तान में बढ़ता सियासी और सुरक्षा संकट

पाकिस्तान में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी पीटीआई के बीच का संघर्ष अब चरम पर पहुंच गया है। सरकार ने रविवार को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में गवर्नर शासन लागू करने का बड़ा फैसला लिया, जिसके बाद राज्य का पूरा प्रशासनिक नियंत्रण सीधे केंद्र के हाथ में आ गया है। सरकार ने इस कदम के पीछे राज्य में बढ़ती आतंकी घटनाओं और गिरती सुरक्षा व्यवस्था का हवाला दिया है। हालांकि, पीटीआई ने इस निर्णय को एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश और लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला करार दिया है।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों में टकराव

गवर्नर शासन के विरोध में पीटीआई समर्थकों ने मंगलवार को सड़कों पर उतरकर अपना गुस्सा जाहिर किया। पेशावर से लगभग 15 किलोमीटर दूर बारा क्षेत्र में स्थिति सबसे अधिक हिंसक हो गई, जहाँ पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कड़ी झड़पें हुईं। पीटीआई समर्थकों ने आरोप लगाया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे निहत्थे लोगों पर पुलिस ने बर्बरता की है। पार्टी कार्यकर्ताओं के अनुसार, पुलिस ने न केवल लाठीचार्ज किया, बल्कि आंसू गैस के गोले छोड़े और प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोलियां भी चलाईं। इस पूरी घटना में कम से कम 5 लोग घायल हुए हैं।

आरोपों और दावों का दौर

हिंसा को लेकर दोनों पक्षों के दावे बिल्कुल विपरीत हैं। राज्य प्रशासन का कार्य देख रहीं समर हारून बिलौर ने गोलीबारी के सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका दावा है कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही जानकारी पूरी तरह गलत है और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ इस्तेमाल किए जा रहे वीडियो कृत्रिम मेधा यानी AI तकनीक से तैयार किए गए हैं। पुलिस ने जानकारी दी है कि इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कुल 50 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इन सभी पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और आतंकवाद से संबंधित धाराओं के तहत मामले दर्ज किए जाएंगे। पुलिस ने दावा किया है कि प्रदर्शनकारियों ने बारा में स्थित NADRA केंद्र में आगजनी की है। वहीं, पीटीआई के सूचना सचिव इकराम खताना ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि आग अज्ञात लोगों ने लगाई थी और पार्टी कार्यकर्ताओं को फंसाया जा रहा है।

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का रुख

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपनी सरकार के इस कठोर कदम का बचाव किया है। उन्होंने सत्तारूढ़ गठबंधन के सहयोगियों के साथ हुई बैठक में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार किसी भी हाल में गवर्नर शासन लागू नहीं करना चाहती थी, लेकिन बातचीत के सभी रास्ते बंद होने के बाद यह एक मजबूरी बन गई थी। शरीफ ने पीटीआई पर राज्य में आतंकवाद के विरुद्ध प्रभावी कदम न उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नेशनल फाइनेंस कमीशन के तहत खैबर पख्तूनख्वा को 800 अरब पाकिस्तानी रुपये से अधिक की राशि जारी की गई थी, फिर भी राज्य में काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट को सक्षम नहीं बनाया गया और न ही सेफ सिटी प्रोजेक्ट जैसे सुरक्षा उपाय लागू किए गए। शरीफ के अनुसार, 3 अक्टूबर को सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत टूट गई थी और पीटीआई ने समझौते के बजाय सड़कों पर उतरकर विरोध को हवा देना चुना।

पूर्व मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी की गिरफ्तारी पर विवाद

इस बीच, खैबर पख्तूनख्वा के पूर्व मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी की हिरासत ने मामले को और उलझा दिया है। उनके भाई मुहम्मद आमिर ने पेशावर हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें आरोप लगाया गया कि नकाबपोश हथियारबंद लोगों ने अफरीदी को अगवा कर लिया है। पीटीआई का कहना है कि तीन दिन बीत जाने के बाद भी उन्हें अदालत में पेश नहीं किया गया है, जो कि कानून का सीधा उल्लंघन है। परिवार ने उनकी सुरक्षा और तत्काल रिहाई की मांग करते हुए अदालत से इस मामले की स्वतंत्र जांच करने की गुहार लगाई है। इस मामले में अभी तक अदालत का कोई अंतिम फैसला नहीं आया है, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है।

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