राजस्थान सीमा पर बड़ी साजिश नाकाम
भारत और पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में सुरक्षाबलों ने एक बड़ी नापाक साजिश को नाकाम कर दिया है। जिले के रावला इलाके में ड्रोन के माध्यम से हथियार और विस्फोटक सामग्री गिराए जाने का मामला प्रकाश में आया है। इस संयुक्त कार्रवाई को एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF), सीमा सुरक्षा बल (BSF), राजस्थान पुलिस, सीआईडी और एटीएस ने मिलकर अंजाम दिया। सुरक्षा एजेंसियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके से दो युवकों को हिरासत में लिया है। इस घटना ने सुरक्षा तंत्र के सामने नए सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके चलते एजेंसियां अब सीमा पार से सक्रिय इस संदिग्ध नेटवर्क की गहरी जांच-पड़ताल कर रही हैं।
दो संदिग्ध काबू में, एक महीने से जारी थी नजर
ANTF के आईजी विकास कुमार ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियां पिछले करीब एक महीने से एक संदिग्ध नेटवर्क की गतिविधियों पर पैनी नजर बनाए हुए थीं। इसी दौरान रावला क्षेत्र में खानुवाली पोस्ट के नजदीक ड्रोन से हथियार गिराने की घटना सामने आई। बीएसएफ के सतर्क जवानों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दो युवकों को धर दबोचा। पकड़े गए युवकों की पहचान लखविंदर सिंह (19), जो फिरोजपुर का निवासी है और सुखविंदर सिंह (19), जो जालंधर का रहने वाला है, के रूप में हुई है। शुरुआती जांच में पता चला है कि ये दोनों पिछले कुछ दिनों से इस सीमावर्ती इलाके में संदिग्ध रूप से सक्रिय थे।
हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद
सुरक्षाबलों की तलाशी के दौरान मौके से तीन पैकेट बरामद किए गए हैं। इन पैकेटों की जांच में दो जिगाना पिस्टल, चार मैगजीन और करीब 650 कारतूस मिले हैं। बरामद पिस्टलों पर 'मेड इन तुर्की' लिखा हुआ है। तीसरे पैकेट में संदिग्ध विस्फोटक सामग्री पाई गई है, जिसके बारे में आशंका जताई जा रही है कि इसमें आरडीएक्स हो सकता है। फिलहाल आधिकारिक पुष्टि के लिए फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। गौरतलब है कि इससे पहले भी जम्मू पुलिस ने पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए भेजे जा रहे नशीले पदार्थों और हथियारों के एक बड़े मॉड्यूल का पर्दाफाश किया था।
बम निरोधक दस्ते की जांच
रावला क्षेत्र में संदिग्ध पैकेट मिलने के तुरंत बाद बीकानेर से बम निरोधक दस्ते को मौके पर बुलाया गया। फिलहाल जांच एजेंसियां बरामद सामग्री की बारीकी से जांच कर रही हैं। इसके साथ ही इस बात का भी पता लगाया जा रहा है कि रिमोट उपकरणों की इसमें क्या भूमिका रही और इन हथियारों का इस्तेमाल किस साजिश के तहत किया जाना था। सुरक्षाबलों की प्राथमिकता इस नेटवर्क से जुड़े अन्य मददगारों की पहचान करना है ताकि भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके।
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