वैश्विक अस्थिरता और नए संकटों का दौर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान में दुनिया जिस तरह से सत्ता और प्रभाव की दौड़ में शामिल है, भारत का दृष्टिकोण उससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इक्कीसवीं सदी का यह दशक वैश्विक स्तर पर अभूतपूर्व चुनौतियों से भरा हुआ है। प्रधानमंत्री ने महामारी के प्रकोप से लेकर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में छिड़े युद्धों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक संकट से बाहर निकलने का प्रयास पूरा भी नहीं हो पाता कि दूसरा नया संकट सामने आ जाता है।
पीएम मोदी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि व्यापार, क्रिटिकल मिनरल्स और ऊर्जा आपूर्ति जैसे क्षेत्रों में लगातार अड़चनें पैदा की जा रही हैं। जिन माध्यमों ने कभी दुनिया को एक-दूसरे से जोड़ने का काम किया था, आज वही चीजें हथियार की तरह इस्तेमाल की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सप्लाई चेन हो, एनर्जी हो, मिनरल्स हो, भुगतान प्रणाली हो या फिर तकनीक, ये सब आज वैश्विक दबाव और दबदबे का माध्यम बनते जा रहे हैं। पिछले कई दशकों में वैश्वीकरण के जरिए जो रास्ते तैयार हुए थे, वे अब कहां जाकर चोक पॉइंट्स में बदल गए हैं, यह पूरी दुनिया देख रही है।
भरोसे का संकट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा दौर में दुनिया के सामने सबसे बड़ा सवाल ट्रस्ट यानी भरोसे का है। यह भरोसा कि जरूरत के समय आपूर्ति जारी रहेगी, और यह यकीन कि जो वादा किया गया है, उसे निभाया जाएगा। यह विश्वास भी जरूरी है कि एक पार्टनर देश दूसरे देश के साथ मुश्किल समय में खड़ा रहेगा। इसी सोच के साथ भारत दुनिया के सामने एक अलग मिजाज लेकर खड़ा है। इस बीच, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह तकनीक हर क्षेत्र में काम करने के तौर-तरीकों को तेजी से बदल रही है। कई देशों में एजिंग यानी बढ़ती उम्र की आबादी के कारण भी चुनौतियां देखी जा रही हैं।
भारत का डिजिटल इकोसिस्टम और समावेशी विकास
विदेशी मेहमानों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने उन्हें भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आजमाने का निमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि भारत में एक छोटे स्ट्रीट वेंडर से लेकर बड़े कार शोरूम तक, दोनों का स्केल भले ही अलग हो, लेकिन दोनों डिजिटल पेमेंट के एक ही प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। यही इन्क्लूसिव टेक्नोलॉजी यानी समावेशी तकनीक की असली ताकत है।
स्टार्टअप्स के आंकड़ों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि साल 2014 से पहले देश में केवल कुछ सौ स्टार्टअप ही हुआ करते थे, लेकिन अब इनकी संख्या 2.5 लाख से अधिक हो गई है। इनमें से करीब आधे स्टार्टअप छोटे शहरों और कस्बों से निकलकर आए हैं। इसके अलावा, 45% स्टार्टअप्स में एक महिला डायरेक्टर या पार्टनर का होना इस बात का प्रमाण है कि इनोवेशन के अवसर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच रहे हैं और नई प्रतिभाएं सामने आ रही हैं।
लोकतंत्र की जननी और अभिव्यक्ति की आजादी
भारत को लोकतंत्र की जननी बताते हुए मोदी ने कहा कि यहां 100 से अधिक भाषाएं बोली जाती हैं। देश में करीब 80,000 रजिस्टर्ड अखबार और प्रकाशन मौजूद हैं। साथ ही, 1,000 से अधिक सैटेलाइट टीवी चैनल्स काम कर रहे हैं। सोशल मीडिया के प्रभाव पर उन्होंने कहा कि भारत में 500 मिलियन से ज्यादा यूट्यूब यूजर्स और 500 मिलियन से ज्यादा इंस्टाग्राम यूजर्स हैं। यहां हर मुद्दे पर जनता खुलकर चर्चा करती है और बहस होती है, जिसमें डिजिटल पावर ने एक बड़ी भूमिका निभाई है।
पावर टू एम्पावर की अवधारणा
पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि 'पावर टू एम्पावर' (सशक्त बनाने की शक्ति) का मानवीय भाव केवल उपदेश देने के लिए नहीं है, बल्कि यह हजारों वर्षों की भारतीय परंपरा है। इसे सरकार की गवर्नेंस और कार्य संस्कृति में लागू करके दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम की थीम उभरती नई पावर्स पर केंद्रित है। हर युग में सत्ता के स्रोत बदलते रहे हैं, लेकिन 21वीं सदी में अब डेटा, नॉलेज और इनोवेशन ही असली शक्ति बन गए हैं।
अंत में उन्होंने सवाल किया कि असली मुद्दा यह नहीं है कि पावर किसके पास है, बल्कि यह है कि उसका उपयोग किस दिशा में हो रहा है। उन्होंने पूछा, क्या तकनीक केवल कुछ लोगों को आगे बढ़ाएगी या करोड़ों लोगों के लिए अवसर पैदा करेगी? क्या ज्ञान केवल कुछ लोगों की ताकत बना रहेगा या सबकी क्षमता बढ़ाएगा? इसी विचार से 'पावर टू एम्पावर' का नया मंत्र जन्म लेता है। पीएम मोदी ने आयोजन को भारत में लाने के लिए मिस्टर ब्लूमबर्ग और उनकी पूरी टीम को बधाई दी।
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