बत्तख पालन से सालाना 50 लाख की कमाई, बिहार के आर्यन ने बताया अंडे और मांस में क्या है ज्यादा फायदेमंद

पश्चिमी चंपारण के युवा बत्तख पालक आर्यन ने अपने कारोबार को 50 लाख सालाना टर्नओवर तक पहुँचाया है। उनका कहना है कि मांस के बजाय अंडों का उत्पादन करना कहीं अधिक मुनाफे का सौदा है।

बत्तख पालन में सफलता का गणित

बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के रहने वाले 24 वर्षीय आर्यन ने बत्तख पालन के जरिए कमाई की एक नई मिसाल पेश की है। आर्यन ने महज 7 लाख रुपये की शुरुआती निवेश के साथ इस व्यवसाय की नींव रखी थी, जो आज बढ़कर 50 लाख रुपये सालाना की आमदनी तक पहुँच चुका है। आर्यन का स्पष्ट मानना है कि इस क्षेत्र में जोखिम न के बराबर है और अगर सही दिशा में कदम उठाए जाएं, तो निवेश की तुलना में दोगुना मुनाफा कमाना बेहद आसान है।

मांस या अंडा, किसमें है असली मुनाफा?

आर्यन ने नए उद्यमियों को सलाह दी है कि वे बत्तख पालन में मांस बेचने के बजाय अंडों के व्यवसाय पर अधिक ध्यान केंद्रित करें। उनके अनुभव के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति इस काम में 10 लाख रुपये लगाता है, तो वह एक साल से भी कम समय के भीतर आसानी से 20 लाख रुपये तक की कमाई कर सकता है। बाजार की मांग और अंडों की निरंतर उपलब्धता के कारण यह विकल्प अधिक टिकाऊ और लाभदायक साबित होता है।

कारोबार की शुरुआत और प्रक्रिया

मझौलिया प्रखंड के निवासी आर्यन ने अपने इस सफर की शुरुआत पिछले साल नवंबर महीने में की थी। उन्होंने लगभग डेढ़ एकड़ के तालाब को इस व्यवसाय का केंद्र बनाया, जहाँ उन्होंने 4 हजार नर और मादा बत्तखों के साथ काम शुरू किया। आर्यन के अनुसार, पालन शुरू करने के चार महीने बाद ही मादा बत्तखों ने अंडे देना शुरू कर दिया था। इन अंडों से चूजे निकलने की प्रक्रिया भी काफी तेज है और मात्र 28 दिनों के भीतर ही चूजे बाहर आ जाते हैं। उनकी यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही जानकारी और तकनीक के साथ पशुपालन क्षेत्र में भी मोटी कमाई की जा सकती है।

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