अनिल सोले और भारतीय जनता पार्टी के बीच बनी सहमति
नागपुर की स्नातक विधान परिषद सीट पर भारतीय जनता पार्टी के लिए चल रहा संकट टल गया है। पार्टी से बगावत करके अपना नामांकन दाखिल करने वाले अनिल सोले को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने समझा-बुझाकर मना लिया है। इस सुलह के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि अनिल सोले अब भारतीय जनता पार्टी के लिए ही काम करेंगे और पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार को जीत दिलाने में अपनी पूरी भूमिका निभाएंगे। मुख्यमंत्री ने इस बात की पुष्टि की है कि उनकी सभी आपत्तियों का समाधान कर लिया गया है।
क्या थी नाराजगी की असली वजह
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि अनिल सोले का गुस्सा सीधे तौर पर पार्टी या विचारधारा के प्रति नहीं था, बल्कि उनका असंतोष संगठन की कार्यप्रणाली को लेकर था। अनिल सोले का स्पष्ट मानना था कि पार्टी चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो जाए, उसके पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्हें उचित सम्मान और जिम्मेदारी मिलनी चाहिए। फडणवीस ने स्वीकार किया कि अनिल सोले जैसे वरिष्ठ कार्यकर्ता, जिन्होंने वर्षों तक संगठन को सींचा है, वे कभी भी पार्टी को नुकसान पहुंचाने का विचार नहीं कर सकते थे।
संगठन में बदलाव का आश्वासन
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि अनिल सोले के साथ हुई बैठक में पार्टी के काम करने के तरीके को सुधारने की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की गई। नेतृत्व ने उनकी बातों को गंभीरता से लिया और कार्यपद्धति में आवश्यक बदलाव करने का भरोसा दिलाया है। इस चर्चा के बाद अनिल सोले ने अपनी नाराजगी वापस ले ली है। उन्होंने संकल्प लिया है कि वे भारतीय जनता पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार को भारी मतों से विजयी बनाने के लिए पूरी मेहनत से जुटेंगे। मुख्यमंत्री के इस हस्तक्षेप के बाद अब नागपुर की इस सीट पर पार्टी की स्थिति काफी मजबूत मानी जा रही है।
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