भारत में शुरू हो सकती है इलेक्ट्रिक कारों की मैन्युफैक्चरिंग
जर्मनी की मशहूर लग्जरी वाहन निर्माता कंपनी ऑडी अब भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के स्थानीय उत्पादन को लेकर गंभीरता से विचार कर रही है। कंपनी ने आने वाले 3 से 5 वर्षों के भीतर भारतीय लग्जरी कार बाजार में अपनी मौजूदा हिस्सेदारी को दोगुना करने का बड़ा लक्ष्य रखा है। इस विस्तार के साथ ही कंपनी का लक्ष्य अपनी मार्केट शेयर को 15 से 16 प्रतिशत तक पहुंचाने का है। ऑडी इंडिया के ब्रांड डायरेक्टर बलबीर सिंह ढिल्लों के अनुसार, कंपनी की आगामी व्यावसायिक रणनीति तीन मुख्य बिंदुओं पर टिकी है। इनमें ग्राहकों की विशिष्ट जरूरतों को समझना, पोर्टफोलियो में नए उत्पादों को शामिल करना और अपने डीलरशिप नेटवर्क का तेजी से विस्तार करना प्रमुखता से शामिल है।
वर्तमान बाजार स्थिति और भविष्य की रणनीति
मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, भारतीय लग्जरी कार बाजार में ऑडी की हिस्सेदारी लगभग 8 प्रतिशत है। कंपनी अपनी इस स्थिति को मजबूत करने के लिए प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते यानी FTA का लाभ उठाने की तैयारी में है। इस समझौते के माध्यम से ऑडी भारतीय बाजार में अपने कई अंतरराष्ट्रीय मॉडलों को पेश करना चाहती है। स्थानीय उत्पादन का अंतिम निर्णय लेने से पहले कंपनी इन मॉडलों की मांग और बिक्री की संभावनाओं का गहराई से विश्लेषण करेगी ताकि भारतीय ग्राहकों की प्राथमिकताओं को सही ढंग से समझा जा सके।
इलेक्ट्रिक वाहन खंड में स्थानीय उत्पादन की तैयारी
बलबीर सिंह ढिल्लों ने इस विषय पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि हम भारत में ही निर्मित बैटरी इलेक्ट्रिक कारों को बाजार में उतारने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दिशा में ठोस निर्णय आगामी कुछ महीनों के भीतर लिया जा सकता है। ढिल्लों ने दोहराया कि ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण और नए उत्पादों के साथ-साथ नेटवर्क में बढ़ोतरी ही उन्हें अगले 3 से 5 वर्षों के भीतर बाजार में अपनी पैठ दोगुनी करने में मदद करेगी।
प्रमुख मॉडलों का स्थानीय निर्माण रहेगा जारी
ऑडी की योजना के अनुसार, कंपनी अपने महत्वपूर्ण मॉडलों का भारत में स्थानीय विनिर्माण जारी रखेगी। साथ ही, प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ FTA के कारण आयात शुल्क में संभावित कमी से कंपनी को नए मॉडलों को बेहतर कीमत पर लाने का अवसर मिलेगा। इससे भारतीय ग्राहकों को अधिक विकल्प मिलेंगे। ढिल्लों ने यह भी कहा कि इस समझौते से न केवल ऑडी को बल्कि पूरे भारतीय ऑटोमोबाइल क्षेत्र को निर्यात के नए और बड़े अवसर प्राप्त होने की पूरी संभावना है। दोनों पक्षों द्वारा अपने बाजारों का 95 प्रतिशत हिस्सा खोलने की स्थिति में भारतीय ऑटो उद्योग वैश्विक मंच पर अपनी निर्यात क्षमता को और बेहतर ढंग से प्रदर्शित कर सकेगा।
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