बाजार से नकदी सोखने की तैयारी
भारतीय रिजर्व बैंक ने एक बड़ा कदम उठाते हुए बाजार से 25 हजार करोड़ रुपये वापस लेने की घोषणा की है। यह फैसला मौद्रिक नीति समिति की बैठक के महज दो दिन बाद सामने आया है, जिसमें कर्ज को महंगा कर दिया गया था। रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा के नेतृत्व में हुई बैठक के बाद से ही वित्तीय बाजार में हलचल तेज हो गई है। अब निवेशक और आम लोग यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि केंद्रीय बैंक बैंकिंग प्रणाली से पैसे क्यों निकाल रहा है और इस कदम के पीछे की क्या रणनीति है।
क्यों उठाया गया यह कदम
आरबीआई ने 9 अक्टूबर को आधिकारिक रूप से जानकारी दी कि वह ओपन मार्केट ऑपरेशंस यानी OMO बिक्री के जरिए बाजार से इतनी बड़ी रकम की नकदी वापस लेने वाला है। केंद्रीय बैंक का मुख्य उद्देश्य बैंकिंग सिस्टम में मौजूद सरप्लस नकदी को नियंत्रित करना है ताकि बैंकों पर किसी प्रकार का अनुचित दबाव न बने। जानकारों का मानना है कि सरकारी प्रतिभूतियों के माध्यम से की जा रही इस निकासी प्रक्रिया का असर सीधे तौर पर बॉन्ड बाजार पर पड़ेगा। आने वाले सोमवार को जब प्राइमरी बाजार खुलेगा, तो बॉन्ड की कीमतों पर दबाव देखने को मिल सकता है और यील्ड में बढ़ोतरी होने की प्रबल संभावना है।
बॉन्ड यील्ड और ब्याज दर का गणित
प्राइमरी बाजार के डीलरों का अनुमान है कि आरबीआई की इस घोषणा के बाद बॉन्ड यील्ड में 4 से 5 आधार अंक की वृद्धि दर्ज की जा सकती है। रिजर्व बैंक इस नीलामी प्रक्रिया की शुरुआत 13 अक्टूबर को करेगा। इस दौरान आरबीआई अलग-अलग परिपक्वता अवधि वाली सरकारी प्रतिभूतियों पर ब्याज ऑफर करेगा:
- वर्ष 2030 तक की प्रतिभूतियों पर 7.88 फीसदी ब्याज दिया जाएगा।
- वर्ष 2031 की प्रतिभूतियों पर 6.10 फीसदी ब्याज मिलेगा।
- वर्ष 2032 तक की प्रतिभूतियों पर 7.95 फीसदी ब्याज की पेशकश की गई है।
- वर्ष 2033 के लिए यह दर 7.26 फीसदी तय की गई है।
- वर्ष 2034 तक की प्रतिभूतियों पर 7.10 फीसदी का ब्याज ऑफर किया जाएगा।
पहले भी हुआ है नकदी का प्रबंधन
यह पहली बार नहीं है जब आरबीआई ने इस तरह का कदम उठाया हो। इससे पहले भी रिजर्व बैंक बाजार से बड़ी मात्रा में नकदी वापस ले चुका है। सितंबर महीने के दौरान आरबीआई ने तीन अलग-अलग किस्तों में कुल 1 लाख करोड़ रुपये बाजार से सोखे थे। इसमें 17 सितंबर को 50 हजार करोड़, 21 सितंबर को 25 हजार करोड़ और 28 सितंबर को 25 हजार करोड़ रुपये वापस लिए गए थे। इस पूरी कवायद का लक्ष्य बैंकिंग प्रणाली में मौजूद अत्यधिक नकदी के दबाव को समाप्त करना है।
अर्थव्यवस्था की स्थिति
हालिया मौद्रिक नीति समिति की बैठक के आंकड़ों के अनुसार, बैंकिंग सिस्टम में अभी भी करीब 5.9 लाख करोड़ रुपये का सरप्लस कैश उपलब्ध है। यह अतिरिक्त नकदी बैंकों को आसानी से कर्ज देने में सक्षम बनाती है। वहीं दूसरी तरफ, महंगाई के बढ़ते दबाव को नियंत्रित करने के लिए रिजर्व बैंक ने करीब साढ़े तीन साल के लंबे अंतराल के बाद रेपो रेट में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी की है, जिससे अब यह 5.50 फीसदी पर पहुंच गया है। आरबीआई का यह कदम महंगाई को काबू में रखने और बाजार में वित्तीय स्थिरता बनाए रखने की दिशा में एक अहम रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
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