बागवानी का नया तरीका
आजकल अपने घर के आंगन या बगीचे में फलदार पेड़ लगाना हर किसी को पसंद है। अगर आपके पास कोई ऐसा पेड़ है जिसके फल बहुत स्वादिष्ट हैं और लोग उसकी तारीफ करते हुए आपसे पौधा मांगते हैं, तो अब आपको बाजार जाकर महंगे पौधे खरीदने की आवश्यकता नहीं है। आप बहुत ही सरल तकनीक से अपने उसी मुख्य पेड़ से सैकड़ों नए पौधे विकसित कर सकते हैं। इस विधि को बागवानी की भाषा में एयर लेयरिंग या गुटी कलम तकनीक के नाम से जाना जाता है।
कौन से पौधों के लिए है यह तकनीक
विशेषज्ञों के अनुसार, यह विधि विशेष रूप से आम, लीची, अमरूद और नींबू जैसे फलों के पेड़ तैयार करने के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है। वाटिका नर्सरी के विशेषज्ञ राधेश्याम के अनुसार, यह तकनीक न केवल बेहद सरल है बल्कि बहुत किफायती भी है। इसमें आपको किसी बड़े खर्च या विशेष उपकरणों की जरूरत नहीं पड़ती है।
पौधा तैयार करने की चरणबद्ध प्रक्रिया
एयर लेयरिंग के माध्यम से नया पौधा तैयार करने के लिए आपको नीचे दी गई प्रक्रिया का पालन करना चाहिए:
- टहनी का चयन: सबसे पहले अपने बेहतरीन फल देने वाले वृक्ष की एक स्वस्थ टहनी चुनें। टहनी की मोटाई लगभग पेंसिल के बराबर होनी चाहिए।
- छिलका उतारना: चुनी हुई टहनी पर चाकू की मदद से लगभग एक इंच की गोलाई में ऊपर का छिलका सावधानी से हटा दें। ध्यान रखें कि इस प्रक्रिया में अंदर की लकड़ी को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए, केवल बाहरी परत ही हटनी चाहिए।
- मिश्रण का लेप: अब कोकोपीट, वर्मी कंपोस्ट और थोड़ी सी सामान्य मिट्टी को मिलाकर एक लेप या गोला तैयार करें। इस मिश्रण को टहनी के छिले हुए भाग पर चारों ओर से अच्छी तरह लपेट दें।
- प्लास्टिक से कवर करना: नमी बनाए रखने के लिए इस मिश्रण के ऊपर प्लास्टिक की पन्नी लपेटें और उसे दोनों सिरों से मजबूती से बांध दें ताकि मिश्रण गिरे नहीं और उसमें लंबे समय तक नमी बनी रहे।
कितने समय में मिलता है फल
राधेश्याम के अनुसार, लगभग 45 दिन की अवधि के बाद उस हिस्से से नई जड़ें निकलनी शुरू हो जाती हैं। जब प्लास्टिक के भीतर जड़ें साफ तौर पर दिखाई देने लगें, तब उस टहनी को मुख्य पेड़ से सावधानीपूर्वक काटकर अलग कर लिया जाता है। इसके बाद आप इसे पॉलीथीन बैग में या सीधे जमीन में रोप सकते हैं। इस तकनीक से तैयार पौधे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह अपने मदर प्लांट जैसा होता है और इसमें फल बहुत जल्द आते हैं। यदि आप बीज से पौधा उगाते हैं तो उसमें 5 से 6 साल का समय लग सकता है, जबकि एयर लेयरिंग से तैयार पौधा मात्र 2 साल बाद ही फल देने में सक्षम हो जाता है। यह विधि किसानों के लिए एक वरदान की तरह है, जिससे वे कम लागत में अपनी नर्सरी विकसित कर अच्छी कमाई कर सकते हैं।
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