आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई मिसाल
बिहार के छपरा जिले में बदलाव की एक सुखद तस्वीर उभरकर सामने आई है। यहां गरखा प्रखंड की महिलाएं अब घर की दहलीज लांघे बिना ही आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं। सरकार की महत्वाकांक्षी जीविका योजना ने इन महिलाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोल दिए हैं। इस पहल के कारण अब न केवल उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है, बल्कि वे अपने बच्चों की शिक्षा का जिम्मा भी खुद उठा रही हैं, जिससे परिवारों का भविष्य भी सुरक्षित हो रहा है।
मीठेपुर गांव की सुनैना देवी की संघर्ष गाथा
इस बदलाव की एक प्रेरणादायक कहानी गरखा प्रखंड के मीठेपुर गांव की रहने वाली सुनैना देवी की है। सुनैना एक सामान्य गृहिणी थीं और इससे पहले उनके पास कोई निश्चित रोजगार का साधन नहीं था। उनके परिवार की आजीविका पूरी तरह से मजदूरी पर निर्भर थी, जो कि अनिश्चित होने के कारण घर में अक्सर आर्थिक तंगी बनी रहती थी। परिवार की समस्याओं को करीब से देखते हुए सुनैना ने अपनी स्थिति बदलने की ठानी और जीविका योजना का दामन थाम लिया।
सिलाई मशीन ने बदली किस्मत
जीविका समूह से जुड़ने के बाद सुनैना देवी को अपना छोटा सा स्वरोजगार शुरू करने के लिए 10 हजार रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। चूंकि उन्हें पहले से सिलाई का हुनर आता था, इसलिए उन्होंने इस राशि का उपयोग एक नई सिलाई मशीन खरीदने में किया। इसके बाद उन्होंने बाजार से कपड़े, थान और फॉल जैसे जरूरी सामान मंगवाकर अपने घर से ही सिलाई का काम शुरू कर दिया। आज स्थिति यह है कि गांव के लोग भी उनके पास कपड़े सिलवाने के लिए आने लगे हैं।
सपनों को मिल रही नई उड़ान
अपने अनुभव साझा करते हुए सुनैना बताती हैं कि वे आस्था जीविका समूह की सदस्य हैं। उन्होंने बताया कि 10 हजार रुपये के शुरुआती सहयोग ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी है। अब वे सिले हुए कपड़ों से अच्छी कमाई कर रही हैं और अपनी बचत से बच्चों की स्कूल फीस समय पर जमा कर पा रही हैं। उन्होंने सरकार की इस योजना की प्रशंसा करते हुए कहा कि पहले खाली बैठने वाली महिलाएं अब सम्मान के साथ काम कर रही हैं।
आगे बढ़ने की उम्मीद
सुनैना देवी अब अपने इस छोटे से व्यवसाय को भविष्य में विस्तार देने का सपना देख रही हैं। उनका मानना है कि यदि उन्हें सरकार से और अधिक सहयोग मिलता है, तो वे अपने काम को बड़े स्तर पर ले जा सकेंगी। छपरा में सुनैना जैसी अनेक महिलाएं आज जीविका योजना के जरिए अपने परिवार का मजबूत सहारा बनी हुई हैं, जो समाज में महिला सशक्तिकरण की एक बेहतरीन मिसाल पेश करती हैं।
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