अमेरिका में अनोखा न्याय और लाइव फांसी
अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने एक ऐसी घोषणा की है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। आधुनिक इतिहास में पहली बार, अमेरिका अपने एक दोषी को दी जाने वाली मौत की सजा का लाइव प्रसारण करने की तैयारी कर रहा है। वर्ष 2009 में टेक्सास के फोर्ट हूड मिलिट्री बेस पर 13 लोगों की हत्या करने वाले दोषी आर्मी अफसर निदाल हसन को 3 दिसंबर को मौत के घाट उतारा जाएगा। यह मिलिट्री एग्जीक्यूशन पूरी तरह से लाइवस्ट्रीम किया जाएगा।
यह निर्णय इसलिए भी चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि अमेरिका में इस तरह के सार्वजनिक प्रदर्शन का चलन लगभग एक सदी पहले समाप्त हो गया था। वर्तमान में, इस तरह की सार्वजनिक सजा का तरीका मुख्य रूप से ईरान, उत्तर कोरिया या अफगानिस्तान में तालिबान सरकार जैसे चुनिंदा देशों में ही देखने को मिलता है। इस फैसले की तुलना अक्सर इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी समूहों के क्रूर वीडियो से की जा रही है, जो अपने कैदियों की हत्याओं का प्रदर्शन करते थे।
फोर्ट हूड कांड: वह काला दिन
मेजर निदाल मलिक हसन ने वर्ष 2009 में फोर्ट हूड में एक भयानक नरसंहार को अंजाम दिया था। उसने अपनी निजी हैंडगन का इस्तेमाल करते हुए अंधाधुंध गोलियां चलाई थीं, जिसमें 13 लोगों की मौत हो गई थी और 32 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। मरने वालों में 12 सैनिक शामिल थे। यह अमेरिकी सैन्य इतिहास की सबसे घातक गोलीबारी की घटनाओं में से एक मानी जाती है, जिसने पूरे अमेरिकी सैन्य तंत्र को हिलाकर रख दिया था। इस घटना के बाद से ही मेजर हसन का नाम अमेरिका के सबसे बड़े अपराधियों की सूची में दर्ज हो गया था।
सार्वजनिक फांसी का इतिहास
अमेरिका में आधिकारिक रूप से सरेआम मौत की सजा देने की घटना 90 साल पुरानी है। अगस्त 1936 में रेनी बेथिया नाम के एक युवक को एक बुजुर्ग महिला के साथ बलात्कार के आरोप में फांसी दी गई थी, जिसे देखने के लिए करीब 20,000 लोगों की भीड़ जमा हुई थी। उसके बाद से अमेरिका ने कानूनी रूप से ऐसी सार्वजनिक सजाओं पर रोक लगा दी थी। हालांकि, एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसी मानवाधिकार संस्थाओं का कहना है कि दुनिया के कुछ हिस्सों में आज भी ऐसी सजाएं दी जाती हैं, लेकिन उन्हें सरकारी तंत्र के बजाय आतंकी समूहों द्वारा अधिक प्रचारित किया जाता है।
फायरिंग स्क्वॉड से सजा देने की प्रक्रिया
मेजर निदाल हसन को जिस फायरिंग स्क्वॉड पद्धति से सजा दी जानी है, वह बेहद व्यवस्थित और क्रूर प्रक्रिया है। इसके प्रमुख चरण निम्नलिखित हैं:
- कैदी को एक कुर्सी पर बिठाकर चमड़े की पट्टियों से कमर और सिर के पास मजबूती से बांध दिया जाता है।
- कैदी के सिर पर काला हुड (कपड़ा) पहनाया जाता है।
- एक डॉक्टर स्टेथोस्कोप की मदद से कैदी के दिल की सटीक जगह का पता लगाता है और वहां एक छोटा गोल सफेद निशाना लगा देता है।
- करीब 20 फीट की दूरी पर पांच निशानेबाज तैनात होते हैं, जिनके हाथों में .30 कैलिबर की राइफलें होती हैं।
- इन राइफलों में से किसी एक में खाली कारतूस (ब्लैंक राउंड) डाला जाता है। यह इसलिए किया जाता है ताकि किसी भी निशानेबाज को यह न पता चल सके कि असल गोली किसने चलाई।
- इस मनोवैज्ञानिक तरीके से हर निशानेबाज यह मान सकता है कि शायद उसकी बंदूक से गोली नहीं चली, जिससे फायरिंग करने वालों पर मानसिक बोझ कम होता है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 1976 के बाद से अमेरिका में कुल 6 लोगों को फायरिंग स्क्वॉड के जरिए मौत की सजा दी जा चुकी है। अब देखना यह होगा कि 3 दिसंबर को होने वाला यह लाइव प्रसारण किस तरह की वैश्विक प्रतिक्रिया पैदा करता है।
https://hindi.news18.com/world/america-fort-hood-shooter-and-murderer-major-nidal-hasan-to-be-shot-live-in-america-as-death-penalty-by-firing-squad-on-3-december-ws-l-10896601.html