इमरान खान की रिहाई के लिए PTI का मार्च और POK में भड़का जनाक्रोश, शहबाज सरकार के सामने दोहरी मुसीबत

पाकिस्तान में इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर PTI का लॉन्ग मार्च इस्लामाबाद की ओर बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भी स्थानीय जनता का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है जिससे शहबाज शरीफ सरकार मुश्किल में है।

इस्लामाबाद की ओर बढ़ते कदम

पाकिस्तान में सियासी पारा लगातार गर्माता जा रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की तत्काल रिहाई की मांग करते हुए पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) का लॉन्ग मार्च अब निर्णायक चरण की ओर बढ़ रहा है। शुक्रवार की देर रात तक यह विशाल काफिला पेशावर में मौजूद था और अब यह इस्लामाबाद की घेराबंदी करने के उद्देश्य से चरसद्दा की तरफ कूच कर रहा है। पार्टी के नेतृत्व ने इसे अपने राजनीतिक और संवैधानिक अधिकारों की बहाली की एक बड़ी जंग करार दिया है।

सरकार की सख्त चेतावनी

दूसरी तरफ शहबाज शरीफ की अगुवाई वाली संघीय सरकार ने भी अपना रुख कड़ा कर लिया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने मीडिया के माध्यम से एक स्पष्ट संदेश जारी किया है कि सरकार किसी भी सूरत में इस तरह के दबाव में आकर इमरान खान को रिहाई या कोई राहत प्रदान नहीं करेगी। ख्वाजा आसिफ ने PTI पर सरकार को ब्लैकमेल करने की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह पार्टी हर दो-तीन महीने में इस्लामाबाद पर चढ़ाई करने का एजेंडा चलाती है।

आतंकवाद और साठगांठ के गंभीर आरोप

रक्षा मंत्री ने PTI पर देश की सुरक्षा से जुड़े बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि इमरान की पार्टी प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के साथ मिलीभगत कर काम कर रही है। आसिफ ने यह भी कहा कि खैबर पख्तूनख्वा के कई इलाकों में आतंकवादी खुलेआम घूम रहे हैं, लेकिन वहां की प्रांतीय सरकार मूकदर्शक बनी हुई है। उन्होंने PTI से आग्रह किया कि वे आतंकवादियों का समर्थन और उन्हें मिल रही फंडिंग को तत्काल बंद करें।

टेस्ट मैच से T10 तक का सफर

खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। पेशावर में पार्टी समर्थकों को संबोधित करते हुए उन्होंने इस संघर्ष को क्रिकेट के स्वरूप में समझाया। अफरीदी का कहना है कि यह आंदोलन अभी अपने शुरुआती टेस्ट मैच वाले चरण में है, इसलिए कार्यकर्ताओं को लंबी लड़ाई के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके बाद आंदोलन ODI, फिर T20 और अंतिम निर्णायक चरण T10 जैसा होगा। अफरीदी ने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी की सात प्रमुख मांगें पूरी तरह से संविधान के दायरे में हैं। उन्होंने बिलावल भुट्टो-जरदारी और मरियम नवाज पर तंज कसते हुए इसे कोई फिक्स्ड मैच नहीं बताया और कहा कि चरसद्दा में वे अपनी अगली रणनीति का खुलासा करेंगे।

POK में भी भड़की चिंगारी

शहबाज सरकार के लिए चुनौतियां केवल इस्लामाबाद की सड़कों तक सीमित नहीं हैं। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में भी हालात नियंत्रण से बाहर होते दिख रहे हैं। वहां के स्थानीय लोग अपने बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर लगातार सड़कों पर उतर रहे हैं। रावलाकोट के ईदगाह मैदान में जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी द्वारा आयोजित एक विशाल रैली में हजारों लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

आंदोलन जारी रखने का संकल्प

रैली के दौरान कमेटी के कोर सदस्य सरदार अमान खान ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा लगातार की जा रही देरी और दबाव डालने की कोशिशों के बावजूद यह आंदोलन तब तक पीछे नहीं हटेगा, जब तक कि उनकी मांगें पूरी नहीं कर दी जातीं। अमान खान ने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति या समूह सामूहिक मांगों से समझौता करने की कोशिश करेगा, तो उसे जनता कतई स्वीकार नहीं करेगी। इस दोहरे मोर्चे पर घिरी सरकार के लिए आने वाले दिन बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।

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