पितृपक्ष में तर्पण का विशेष महत्व
भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन अमावस्या तक चलने वाला पितृपक्ष का समय अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करने का सबसे प्रमुख अवसर माना जाता है। हिंदू धर्म में इन 16 दिनों का अत्यधिक महत्व बताया गया है। इन दिनों में तर्पण, पिंडदान और पितृ हवन जैसे धार्मिक कार्यों के माध्यम से कुल के सभी दिवंगत पूर्वजों को तृप्त किया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, पूरे साल में आने वाली सभी अमावस्याओं में पितृ अमावस्या को सबसे अधिक फलदायी माना गया है।
पितृ विसर्जन अमावस्या का महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, अश्विन मास की अमावस्या जिसे पितृ विसर्जन अमावस्या भी कहा जाता है, वह दिन है जब ज्ञात और अज्ञात सभी पितरों को धरती लोक से विदाई दी जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस तिथि पर विधि-विधान से किया गया तर्पण और पिंडदान पितरों को अत्यधिक प्रसन्न करता है। इससे न केवल जीवन के कष्ट दूर होते हैं, बल्कि घर-परिवार में सुख-समृद्धि का आगमन भी सुनिश्चित होता है। हालांकि, कई लोग आर्थिक तंगी या संसाधनों के अभाव के कारण भव्य रूप से पिंडदान या श्राद्ध नहीं कर पाते हैं। ऐसे लोगों के मन में अक्सर यह शंका रहती है कि क्या बिना सामग्री के पितर तृप्त होंगे।
साल 2026 में 10 अक्टूबर को विशेष दिन
धर्मनगरी हरिद्वार के पुरोहित पंडित नितिन शर्मा का कहना है कि वर्ष 2026 में पितृ विसर्जन अमावस्या 10 अक्टूबर को पड़ रही है। यह उन लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण दिन है जिनके पूर्वजों की देहावसान की तिथि उन्हें याद नहीं है या जिनका श्राद्ध किन्हीं कारणों से छूट गया है। पंडित नितिन शर्मा के अनुसार, हिंदू धर्म में पूर्वजों की संतुष्टि के लिए धन या भौतिक वस्तुओं का होना अनिवार्य नहीं है। पितरों को प्रसन्न करने के लिए धन से अधिक सच्ची श्रद्धा और समर्पण को सर्वोपरि स्थान दिया गया है।
आर्थिक तंगी होने पर कैसे करें तर्पण
यदि कोई व्यक्ति आर्थिक तंगी के कारण पिंडदान, हवन, नारायण बलि या अन्य महंगी सामग्री जुटाने में असमर्थ है, तो उसे निराश होने की आवश्यकता नहीं है। पंडित नितिन शर्मा बताते हैं कि ऐसे व्यक्ति को बहुत ही सरल उपाय करना चाहिए। यदि आपके पास सामग्री का अभाव है, तो केवल एक लोटा गंगाजल या शुद्ध जल लेकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अपने पितरों का नाम लेते हुए उसे अर्पित कर दें। केवल इतनी सी क्रिया से ही पितर तृप्त हो जाते हैं और अपनी कृपा बनाए रखते हैं।
आंखों के आंसुओं का अनूठा महत्व
पंडित नितिन शर्मा ने एक और अत्यंत भावुक और महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति के पास तांबे का पात्र या जल अर्पित करने की भी सामर्थ्य नहीं है, तो भी उसे चिंता नहीं करनी चाहिए। धार्मिक ग्रंथों में आंखों से छलके आंसुओं को संसार का सबसे पावन जल माना गया है। यदि कोई व्यक्ति अपने पूर्वजों के प्रति सच्ची श्रद्धा और प्रेम रखता है और उनकी याद में उसकी आंखों से आंसू छलक पड़ते हैं, तो उन आंसुओं के जल का अर्घ्य देना ही पर्याप्त है। यह सच्चा भाव पितृ ऋण से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है। इस भाव से पितर न केवल तृप्त होते हैं, बल्कि अपने वंशजों को खुशहाली, वंश की उन्नति और तरक्की का आशीर्वाद देकर खुशी-खुशी अपने लोक को लौट जाते हैं।
https://hindi.news18.com/news/dharm/pitru-visarjan-amavasya-tarpan-rules-without-money-know-process-by-pandit-local18-10895565.html