जमशेदपुर का स्वाद निराला है, और जब बात यहाँ के मशहूर स्ट्रीट फूड की आती है, तो समोसा चाट का नाम सबसे ऊपर आता है। लौहनगरी जमशेदपुर में स्वाद के शौकीनों के लिए एक ऐसा ठिकाना है जो पिछले चार दशकों से लोगों के दिलों पर राज कर रहा है। यह ठिकाना है शंकर साहू की समोसा चाट की दुकान। जमशेदपुर के लोग अपनी मेहमाननवाजी और खान-पान के शौक के लिए जाने जाते हैं। यहाँ के हर नुक्कड़ पर आपको कोई न कोई ऐसी दुकान मिल जाएगी जिसका इतिहास दशकों पुराना है। पिछले 40 साल से शंकर साहू अपने हाथों का ऐसा जादू बिखेर रहे हैं कि जो कोई भी एक बार उनकी चाट का स्वाद चख लेता है, वह हमेशा के लिए उनका मुरीद हो जाता है। आज के इस आधुनिक दौर में भी, जहाँ फास्ट फूड के अनगिनत विकल्प मौजूद हैं, शंकर साहू की यह साधारण सी दुकान अपनी सादगी और बेमिसाल स्वाद के दम पर जमी हुई है। सुबह से लेकर शाम तक यहाँ ग्राहकों का तांता लगा रहता है।
स्कूल के दिनों की यादें और 40 साल का लंबा सफर
शंकर साहू की यह प्रसिद्ध दुकान जमशेदपुर के दो जाने-माने विद्यालयों, मोतीलाल राजेंद्र विद्यालय और दयानंद स्कूल के ठीक मध्य में स्थित है। यही कारण है कि इस दुकान का नाता यहाँ पढ़ने वाले विद्यार्थियों से बहुत गहरा रहा है। स्कूल की आधी छुट्टी यानी लंच टाइम में इस दुकान पर बच्चों की जो भीड़ उमड़ती थी, वह नजारा आज भी कई लोगों के जेहन में ताजा है। शंकर साहू बताते हैं कि जब उन्होंने लगभग 40 वर्ष पहले इस काम की शुरुआत की थी, तब महंगाई इतनी नहीं थी। उस दौर में एक समोसा मात्र 1 रुपये में बिका करता था। समय बदला, महंगाई बढ़ी और सामग्री की लागत में भी भारी बढ़ोतरी हुई, लेकिन शंकर जी ने अपने स्वाद की गुणवत्ता से कभी कोई समझौता नहीं किया। आज भी उनके पुराने ग्राहक, जो कभी इन विद्यालयों में पढ़ाई किया करते थे, अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए यहाँ खिंचे चले आते हैं। कई लोग तो ऐसे हैं जो अब इस शहर से बाहर रहते हैं, लेकिन जब भी जमशेदपुर आते हैं, तो शंकर साहू की दुकान पर आना नहीं भूलते। वे न केवल खुद आते हैं, बल्कि अपने बच्चों और परिवार को भी इस पारंपरिक स्वाद से रूबरू कराने लाते हैं।
मात्र 15 रुपये में मिलता है पेट भरने वाला संतोष
आज के समय में जब खाने-पीने की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं, शंकर साहू मात्र 15 रुपये में एक भरपूर प्लेट समोसा चाट उपलब्ध कराते हैं। इस प्लेट की खासियत केवल इसकी कम कीमत नहीं है, बल्कि इसकी मात्रा भी है। एक प्लेट चाट इतनी पर्याप्त होती है कि इसे खाने के बाद किसी भी व्यक्ति का पेट आसानी से भर जाता है और उसे काफी समय तक कुछ और खाने की आवश्यकता महसूस नहीं होती। कम कीमत में बेहतरीन स्वाद और भरपूर मात्रा का यह अनूठा संयोजन ही इस दुकान को पूरे जमशेदपुर में सबसे अलग और खास बनाता है। मध्यम वर्ग से लेकर छात्रों तक, हर कोई इस सस्ती और स्वादिष्ट चाट का भरपूर आनंद उठाता है।
जानिए कैसे तैयार होती है यह लाजवाब समोसा चाट
शंकर साहू की इस विशेष चाट को तैयार करने की विधि भी बेहद पारंपरिक और आकर्षक है। इसे ग्राहकों के सामने बिल्कुल ताजा तैयार किया जाता है। इसे बनाने की प्रक्रिया इस प्रकार है:
- सबसे पहले कड़ाही से निकले गरमा-गरम और खस्ता समोसों को एक प्लेट में अच्छी तरह तोड़ा जाता है।
- इसके बाद, उन समोसों के ऊपर उबलती हुई गरम-गरम मटर की गाढ़ी सब्जी डाली जाती है।
- स्वाद को दोगुना करने के लिए इसमें खट्टी-मीठी इमली की चटनी और खास तौर पर तैयार की गई मीठी अमावट यानी आम पापड़ की चटनी मिलाई जाती है।
- फिर इसमें शंकर साहू के घर पर तैयार किए गए विशेष गरम मसाले, चटपटा चाट मसाला और साधारण नमक छिड़का जाता है।
- अंत में, चाट को और अधिक स्वादिष्ट व कुरकुरा बनाने के लिए ऊपर से बारीक कटा हुआ प्याज और बेसन की एकदम बारीक महीन सेव डालकर ग्राहकों को परोसा जाता है।
रोजाना जुटती है सैकड़ों ग्राहकों की भीड़
शंकर साहू की दुकान पर स्वाद का आनंद लेने वालों का तांता हर दिन लगा रहता है। उनके अनुसार, रोजाना 100 से अधिक ग्राहक उनकी दुकान पर समोसा चाट खाने पहुंचते हैं। सुबह के वक्त स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर दोपहर और शाम को दफ्तर के लोगों तक, हर वर्ग के लोग यहाँ चाट का लुत्फ उठाते दिखते हैं। अगर आप भी इस ऐतिहासिक स्वाद का अनुभव करना चाहते हैं, तो आपको सुबह के समय यहाँ आना होगा। यह दुकान रोजाना सुबह लगभग 8 बजे खुल जाती है और शाम को 4 बजे तक यहाँ ग्राहकों को गरमा-गरम चाट परोसी जाती है। जमशेदपुर आने वाले किसी भी भोजन प्रेमी के लिए शंकर साहू की यह दुकान एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दर्शनीय स्थल बन चुकी है, जहाँ जाकर वे अपनी पुरानी यादों को ताजा कर सकते हैं।
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