हिमाचल की राजनीति में वीरभद्र सिंह की अनदेखी पर सियासी घमासान
हिमाचल प्रदेश की सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के भीतर पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को लेकर जारी खींचतान एक बार फिर सार्वजनिक हो गई है। हाल ही में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के रोहड़ू दौरे के दौरान वीरभद्र सिंह के न तो पोस्टर लगाए गए और न ही किसी भाषण में उनके योगदान का उल्लेख किया गया। इस अनदेखी ने पार्टी के भीतर पुराने और नए खेमों के बीच की दूरियों को और बढ़ा दिया है।
प्रतिभा सिंह की नाराजगी और पार्टी पदाधिकारियों पर सवाल
इस पूरे मामले पर वीरभद्र सिंह की पत्नी और कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने सवाल खड़ा किया है कि वीरभद्र सिंह को दुनिया से गए अभी चार साल भी पूरे नहीं हुए हैं और उन्हें इतनी जल्दी विस्मृत करने की कोशिश क्यों की जा रही है। उन्होंने पार्टी के पदाधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रतिभा सिंह का यह बयान पार्टी के भीतर उस नाराजगी को दर्शाता है जो समय-समय पर वीरभद्र सिंह के समर्थकों के बीच उभरती रहती है।
मुख्यमंत्री की चुप्पी और पार्टी संगठन की सफाई
इस विवाद पर जब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने पूरी तरह से चुप्पी साधे रखी। मुख्यमंत्री की तरफ से कोई भी आधिकारिक टिप्पणी न आना चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, डैमेज कंट्रोल की कोशिश करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने सफाई पेश की है। उन्होंने कहा कि पोस्टर न लगना संभवतः एक मानवीय भूल हो सकती है और भविष्य में पार्टी ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न नहीं होने देगी। विनय कुमार का यह बयान ऐसे समय आया है जब पार्टी नेतृत्व पर लगातार दबाव बढ़ रहा है।
जयराम ठाकुर का तंज
इस स्थिति का फायदा उठाते हुए नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर निशाना साधा है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि जिस हॉलीलॉज का हिमाचल की राजनीति पर दशकों तक दबदबा और विशेष प्रभाव रहा, उसे कमजोर करने या हाशिए पर धकेलने में मुख्यमंत्री सफल हुए हैं। विपक्ष के इस बयान ने कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी को और अधिक हवा दे दी है।
रोहड़ू और वीरभद्र सिंह का ऐतिहासिक नाता
रोहड़ू विधानसभा क्षेत्र का वीरभद्र सिंह से गहरा और भावनात्मक संबंध रहा है। वे यहां से लगातार पांच बार विधायक चुने गए थे। उन्होंने 1990 से 2007 तक इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व विधानसभा में किया था। दो अक्टूबर को जब मुख्यमंत्री सुक्खू रोहड़ू के दौरे पर गए, तो वीरभद्र सिंह के इस गढ़ में उनके योगदान को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया, जिसने समर्थकों को आहत किया है।
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा विवाद
वीरभद्र सिंह की अनदेखी का यह कोई पहला मामला नहीं है। दिसंबर 2025 में मंडी में जब सरकार ने अपने तीन साल का कार्यकाल पूरा होने पर संकल्प रैली आयोजित की थी, तब भी वीरभद्र सिंह के पोस्टरों का अभाव रहा था। उस वक्त पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था। इसके अलावा, कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह को अपने पिता की प्रतिमा रिज मैदान पर स्थापित करने के लिए भी राज्य सरकार के साथ लंबी जद्दोजहद करनी पड़ी थी। उस समय सरकार द्वारा दो गज जमीन न देने का दर्द राज्यसभा चुनाव के दौरान विक्रमादित्य सिंह के बयानों में स्पष्ट छलका था।
सुक्खू और वीरभद्र सिंह खेमे में 36 का आंकड़ा
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और वीरभद्र सिंह के बीच राजनीतिक मतभेद लंबे समय से चर्चा का विषय रहे हैं। सार्वजनिक मंचों पर भी उनके बीच टकराव की खबरें सामने आती रही हैं। वीरभद्र सिंह ने अपने जीवनकाल में सुक्खू पर कई बार तीखे हमले किए थे। आज भी कांग्रेस के भीतर वीरभद्र सिंह गुट और सुक्खू गुट के बीच खींचतान बनी हुई है। हालांकि, वर्तमान में मुख्यमंत्री के पास सत्ता की बागडोर होने के कारण सुक्खू खेमा अधिक प्रभावी नजर आता है। यही कारण है कि सरकारी कार्यक्रमों में अब वीरभद्र सिंह का जिक्र न के बराबर ही रह गया है।
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