भारत में जुगाड़ और हुनर की मिसालें अक्सर देखने को मिलती हैं। जब इंसान के पास कुछ अलग करने का हौसला हो, तो वह बड़ी से बड़ी मुश्किल को भी पार कर जाता है। झारखंड के औद्योगिक शहर जमशेदपुर के रहने वाले मंटू ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। उन्होंने अपनी सूझबूझ और कड़ी मेहनत के बल पर एक बंद पड़ी पुरानी स्कूल वैन को एक हाईटेक, चलती-फिरती मोबाइल दुकान में बदल दिया है। यह कहानी न केवल एक अनोखे बिजनेस आइडिया की है, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में कभी हिम्मत न हारने के जज्बे की भी है।
डिफेंस सर्विस में चयन न होने पर भी नहीं मानी हार
मंटू का शुरुआती सफर आसान नहीं था। उनका सपना देश की सेवा करना था, जिसके लिए वह रक्षा क्षेत्र यानी डिफेंस सर्विसेज में शामिल होने की तैयारी कर रहे थे। इसी सिलसिले में उन्होंने सेना की भर्ती परीक्षा भी दी थी। परीक्षा देने के लिए वह कोलकाता गए, जहां उन्होंने लिखित परीक्षा पास कर ली और उनका नाम मेरिट लिस्ट में भी आ गया। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। शारीरिक और मेडिकल जांच के दौरान उन्हें अनफिट घोषित कर दिया गया। इस असफलता से मंटू का डिफेंस में जाने का सपना टूट गया, लेकिन उन्होंने जीवन से हार नहीं मानी। इसके बाद उन्होंने रोजगार के लिए एक वैन खरीदी और जमशेदपुर में बच्चों को स्कूल लाने और ले जाने का काम शुरू कर दिया।
कोविड-19 महामारी और कोलकाता के बाजार से मिला आइडिया
जब सब कुछ ठीक चल रहा था, तभी देश में कोविड-19 महामारी ने दस्तक दी। लॉकडाउन के कारण सभी स्कूल पूरी तरह बंद हो गए। इसके साथ ही मंटू का बच्चों को स्कूल पहुंचाने का काम भी ठप पड़ गया। उनके सामने कमाई का साधन खत्म होने से आर्थिक संकट खड़ा हो गया। ऐसी कठिन परिस्थिति में भी मंटू ने हिम्मत बनाए रखी। जब वह कोलकाता में थे, तब उन्होंने वहां के बड़े मोबाइल बाजारों को बेहद करीब से देखा था। वहीं से उनके दिमाग में मोबाइल और उसके सहायक उपकरणों (एक्सेसरीज) का व्यापार शुरू करने का विचार आया था। उन्होंने तय किया कि वह इस मंदी को अपने लिए एक अवसर में बदलेंगे।
लाखों की लागत से स्कूल वैन को बनाया 'स्मार्ट मोबाइल शॉप'
मंटू ने दोबारा कोलकाता का रुख किया और वहां से थोक भाव में मोबाइल फोन, हेडफोन, चार्जर और अन्य एक्सेसरीज का सामान खरीदकर लाए। अब सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि दुकान कहां खोली जाए, क्योंकि दुकान किराए पर लेने के लिए काफी पैसों की जरूरत थी। ऐसे में उन्होंने अपनी उसी पुरानी स्कूल वैन को इस्तेमाल करने का फैसला किया। उन्होंने गाड़ी को पूरी तरह से मॉडिफाई कराया और उसमें एक सुंदर मोबाइल शोरूम का लुक दिया।
वैन को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने के लिए मंटू ने उसमें निम्नलिखित आधुनिक सुविधाएं इंस्टॉल करवाईं:
- दुकान में निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए छत पर सोलर पैनल लगवाए।
- पावर बैकअप के लिए एक मजबूत इनवर्टर लगाया।
- बिजली स्टोर करने के लिए हैवी-ड्यूटी बैटरी का सेटअप तैयार किया।
इस पूरे मेकओवर और दुकान की साज-सज्जा को तैयार करने में मंटू ने करीब 5 से 6 लाख रुपये का निवेश किया। बिजली की स्वतंत्र व्यवस्था होने के कारण उन्हें दुकान चलाने के लिए किसी बाहरी बिजली कनेक्शन पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
परसुडीह बाजार और जमशेदपुर के मेलों में जमी दुकान
आज मंटू की यह चलती-फिरती मोबाइल दुकान जमशेदपुर के लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बन चुकी है। वह अपनी वैन लेकर शहर के विभिन्न व्यस्त इलाकों में जाते हैं। खासकर परसुडीह बाजार और उसके आस-पास के क्षेत्रों में उनकी यह मोबाइल शॉप नियमित रूप से देखी जा सकती है। इसके अलावा, जमशेदपुर और आस-पास के इलाकों में जब भी कोई मेला, त्योहार, सांस्कृतिक कार्यक्रम या भारी भीड़भाड़ वाला आयोजन होता है, मंटू अपनी वैन लेकर वहां पहुंच जाते हैं। ग्राहकों को एक ही जगह पर मोबाइल से जुड़ी तमाम चीजें मिल जाती हैं, जिससे उनकी अच्छी बिक्री हो जाती है। मंटू का यह प्रयास साबित करता है कि अगर आपके भीतर कुछ नया करने की लगन हो, तो संसाधनों की कमी कभी आपके रास्ते का रोड़ा नहीं बन सकती।
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