ऋषिकेश की बदलती पहचान: क्या योग और अध्यात्म पर भारी पड़ रहा है रोमांचक पर्यटन?

ऋषिकेश अपनी सदियों पुरानी आध्यात्मिक पहचान खो रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि अब यहाँ योग और शांति के बजाय राफ्टिंग और कैंपिंग का बोलबाला बढ़ गया है।

उत्तराखंड का प्रसिद्ध शहर ऋषिकेश हमेशा से ही अपनी पवित्रता, योग और अध्यात्म के लिए जाना जाता रहा है। सदियों से देश-विदेश के लोग यहाँ गंगा के दर्शन करने, मन की शांति पाने और साधना करने आते थे। हालांकि, बीते कुछ वर्षों में इस पावन नगरी की तस्वीर और तासीर दोनों में बहुत बड़ा बदलाव आया है। आज ऋषिकेश की पुरानी पहचान कहीं खोती जा रही है और इसकी जगह नए तरह के एडवेंचर टूरिज्म ने ले ली है।

धार्मिक नगरी या एडवेंचर डेस्टिनेशन?

वर्तमान समय में ऋषिकेश आने वाले पर्यटकों की प्राथमिकताएं पूरी तरह बदल चुकी हैं। अब यहाँ लोग मानसिक शांति की तलाश में कम और रोमांच की चाह में ज्यादा आ रहे हैं। इस शहर में अब राफ्टिंग, कैंपिंग, फैशनेबल कैफे, आलीशान होटल और कई तरह की एडवेंचर गतिविधियां तेजी से लोकप्रिय हुई हैं। ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि क्या ऋषिकेश को अब योग सिटी और धार्मिक नगरी के बजाय केवल एक एडवेंचर डेस्टिनेशन के रूप में पहचाना जाने लगा है। इस विषय पर जब स्थानीय लोगों से बातचीत की गई, तो उनकी चिंताएं साफ नजर आईं।

स्थानीय लोगों का क्या है कहना?

बदलते ऋषिकेश के इस परिदृश्य को लेकर यहाँ के स्थानीय निवासियों का दर्द छलक उठा है। यहाँ की निवासी चंदना साधु ने बताया कि उन्होंने इस ऐतिहासिक शहर को अपनी आँखों के सामने बदलते देखा है। वह याद करती हैं कि आज से करीब 57 साल पहले यहाँ का वातावरण आज की तुलना में बिल्कुल अलग और शांत था। उनके अनुसार, अब यहाँ केवल मौज-मस्ती और पर्यटन के लिए आने वाले लोगों की भीड़ बढ़ गई है, जबकि श्रद्धा और सच्ची भक्ति भाव के साथ गंगा किनारे आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में काफी कमी आई है।

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