हरियाणा में बदला मौसम का मिजाज
हरियाणा के विभिन्न क्षेत्रों में अचानक मौसम ने करवट ली है। राज्य के कई हिस्सों में हो रही बारिश और ओलावृष्टि ने न केवल लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत दी है, बल्कि किसानों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में भी बारिश का यह सिलसिला जारी रह सकता है। चंडीगढ़ स्थित मौसम विज्ञान केंद्र ने जानकारी दी है कि प्रदेश में दो वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हैं, जिसके चलते 12 अक्टूबर तक बारिश की प्रबल संभावना बनी हुई है।
नौ जिलों के लिए येलो अलर्ट
मौसम विभाग ने 7 अक्टूबर को हरियाणा के नौ प्रमुख जिलों में बारिश और आंधी-तूफान को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में अंबाला, पंचकूला, यमुनानगर, करनाल, कुरुक्षेत्र, पानीपत, सोनीपत, गुरुग्राम और फरीदाबाद शामिल हैं। मौसम केंद्र का पूर्वानुमान है कि इन इलाकों में बारिश के दौरान हवाएं 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं। इस बदलाव की शुरुआत 6 अक्टूबर की शाम से ही हो गई थी, जब पंचकूला और यमुनानगर के कई इलाकों में बारिश दर्ज की गई। इसके अगले ही दिन मंगलवार रात को पंचकूला में बारिश के साथ-साथ ओले भी गिरे, जिसने फसलों को प्रभावित किया है।
मंडियों में बेहाल धान की फसल
इस समय राज्य की मंडियों में धान की खरीद का सीजन पूरे जोर-शोर से चल रहा है। ऐसे में अचानक हुई बारिश ने अनाज मंडियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यमुनानगर की साढौरा और छछरौली अनाज मंडियों में बारिश के बाद हालात काफी चिंताजनक बने हुए हैं। साढौरा मंडी में तो बारिश के कारण करीब एक फीट तक पानी भर गया, जिससे वहां खुले में रखी धान की ढेरियां पूरी तरह भीग गईं। स्थिति इतनी खराब रही कि तेज पानी के बहाव में धान बहते हुए भी दिखाई दिया। किसानों की मेहनत से तैयार की गई फसल का इस तरह बर्बाद होना उनके लिए किसी बड़े संकट से कम नहीं है। छछरौली मंडी में भी बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है, जहां अनाज को बचाने के लिए पुख्ता इंतजाम न होने के कारण धान की बोरियां भीग गई हैं।
व्यवस्था पर उठते सवाल
मंडियों में धान की फसल का भीगना प्रशासन की लचर तैयारियों को उजागर करता है। किसान अपनी फसल लेकर मंडियों में पहुंच चुके हैं, लेकिन बारिश से बचाने के लिए शेड या तिरपाल जैसी सुविधाओं की कमी ने किसानों को बेबस कर दिया है। फसल सुरक्षा को लेकर मंडियों में बरती गई लापरवाही से किसान काफी आक्रोशित और चिंतित हैं। क्या सरकार और मंडियों के प्रबंधकों ने इस सीजन की तैयारियों में कोई ठोस कदम नहीं उठाए थे, यह प्रश्न अब हर जगह चर्चा का विषय बना हुआ है।
तापमान में दर्ज की गई गिरावट
मौसम के इस बदलाव का असर प्रदेश के तापमान पर भी साफ देखा गया है। मंगलवार को हरियाणा के औसत अधिकतम तापमान में 0.6°C की मामूली गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, अभी भी कुछ हिस्सों में गर्मी का असर बना हुआ है। विभिन्न शहरों में अधिकतम तापमान का विवरण इस प्रकार रहा:
- हिसार: 38.1°C
- महेंद्रगढ़ (नारनौल): 38.0°C
- चरखी दादरी: 38.0°C
- बालसमंद: 37.6°C
- भिवानी: 37.0°C
- अंबाला: 35.2°C
- करनाल: 33.5°C
- रोहतक: 33.3°C
मौसम विभाग की चेतावनियों को देखते हुए किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी फसल को सुरक्षित स्थानों पर रखने का प्रयास करें, क्योंकि अगले कुछ दिनों तक मौसम के तेवर तल्ख बने रहने की आशंका है।
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