बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल को काबू में करने के असरदार आयुर्वेदिक नुस्खे और जीवनशैली में बदलाव

यदि आपकी ब्लड रिपोर्ट में कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक आ रहा है, तो इसे नजरअंदाज करना घातक हो सकता है। आयुर्वेदिक डॉक्टर चंचल शर्मा के अनुसार, सही खान-पान, व्यायाम और जड़ी-बूटियों के माध्यम से इसे प्राकृतिक रूप से नियंत्रित किया जा सकता है।

कोलेस्ट्रॉल को लेकर सतर्क होना क्यों है जरूरी

अगर मेडिकल जांच रिपोर्ट में आपका कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ा हुआ आता है, तो इसे बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह स्थिति दिल के दौरे और स्ट्रोक जैसी जानलेवा बीमारियों की संभावना को कई गुना बढ़ा देती है। चिकित्सा विशेषज्ञ मानते हैं कि दवाओं के अलावा जीवनशैली में सुधार और शारीरिक व्यायाम के जरिए इसे प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। इसके अलावा, आयुर्वेद में कई ऐसे घरेलू और प्राकृतिक उपाय मौजूद हैं जो कोलेस्ट्रॉल के प्रबंधन में बेहद सहायक साबित होते हैं। आशा आयुर्वेद क्लीनिक की डॉक्टर चंचल शर्मा के अनुसार, आयुर्वेद के प्राचीन सिद्धांतों का पालन करके आप अपने शरीर के भीतर फैट के स्तर को संतुलित रख सकते हैं।

कोलेस्ट्रॉल आखिर है क्या

आयुर्वेदिक दृष्टि से देखा जाए तो शरीर में 'कफ' दोष की अधिकता होने पर कोलेस्ट्रॉल का निर्माण होता है। मुख्य रूप से कोलेस्ट्रॉल को दो श्रेणियों में बांटा गया है: पहला अच्छा कोलेस्ट्रॉल जिसे HDL यानी हाई-डेंसिटी लिपोप्रोटीन कहा जाता है, और दूसरा बुरा कोलेस्ट्रॉल जिसे LDL यानी लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन के नाम से जाना जाता है। HDL हमारे शरीर के लिए लाभकारी है क्योंकि यह काफी हल्का होता है और रक्त वाहिकाओं से वसा के जमाव को साफ करने का काम करता है। वहीं, दूसरी ओर LDL का स्वभाव काफी गाढ़ा और चिपचिपा होता है, जो धमनियों की दीवारों पर चिपक कर रक्त संचार को बाधित करता है।

हाई LDL लेवल के परिणाम

जब शरीर में LDL कोलेस्ट्रॉल की मात्रा हद से ज्यादा बढ़ जाती है, तो यह धमनियों के रास्ते में बाधा पैदा करता है। इस रुकावट के चलते हृदय रोगों, उच्च रक्तचाप और मोटापे जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं जन्म लेती हैं। इस स्थिति का सटीक पता लगाने के लिए लिपिड प्रोफाइल नाम का रक्त परीक्षण किया जाता है। एक स्वस्थ वयस्क के लिए कोलेस्ट्रॉल का मानक स्तर इस प्रकार होना चाहिए: कुल कोलेस्ट्रॉल 200 mg/dL से कम, HDL 60 mg/dL से ज्यादा और LDL 100 mg/dL से कम।

कोलेस्ट्रॉल की मानक रेंज

  • टोटल कोलेस्ट्रॉल: 200 mg/dL से नीचे।
  • एलडीएल (खराब कोलेस्ट्रॉल): सामान्य लोगों के लिए 100 mg/dL से कम, जबकि हृदय रोगियों के लिए 70 mg/dL से कम होना चाहिए।
  • एचडीएल (अच्छा कोलेस्ट्रॉल): पुरुषों में 40 mg/dL से अधिक और महिलाओं में 50 mg/dL से अधिक (आदर्श रूप से 60 mg/dL या उससे अधिक)।
  • ट्राइग्लिसराइड्स: 150 mg/dL से कम।

कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के प्रमुख कारण

कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने के पीछे कई कारक जिम्मेदार हो सकते हैं, जिन्हें समझना जरूरी है:

  • असंतुलित आहार: भोजन में ट्रांस फैट और सैचुरेटेड फैट का अत्यधिक सेवन।
  • शारीरिक निष्क्रियता: व्यायाम, योग या मेहनत न करने के कारण शरीर में फैट का जमाव बढ़ना।
  • धूम्रपान और शराब: नशीले पदार्थों का सेवन फैट मेटाबॉलिज्म को बुरी तरह प्रभावित करता है।
  • जेनेटिक्स: पारिवारिक इतिहास में कोलेस्ट्रॉल की समस्या होने पर जोखिम अधिक रहता है।
  • डायबिटीज: मधुमेह के मरीजों में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की संभावना अधिक होती है।
  • अन्य स्थितियां: लिवर, किडनी की बीमारियां, हाइपोथायरायडिज्म और अन्य गंभीर स्वास्थ्य स्थितियां भी कोलेस्ट्रॉल को प्रभावित करती हैं।

आयुर्वेद का नजरिया और प्राचीन ग्रंथ

डॉक्टर चंचल शर्मा बताती हैं कि आयुर्वेद कोलेस्ट्रॉल को 'मेदा धातु में वृद्धि' और 'कफ दोष' का असंतुलन मानता है। चरक संहिता और सुश्रुत संहिता में इसका विस्तार से वर्णन किया गया है। एक प्राचीन श्लोक में स्पष्ट उल्लेख है कि शरीर में वसा या कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के क्या लक्षण होते हैं। इसके मुख्य लक्षणों में अंगों में चिकनाई का बढ़ना, पेट और पसलियों के हिस्से का भारी होना, सांस फूलना, खांसी और शरीर से दुर्गंध आना शामिल है।

कोलेस्ट्रॉल कम करने के आयुर्वेदिक उपाय

कोलेस्ट्रॉल को प्राकृतिक रूप से कम करने के लिए निम्नलिखित उपाय कारगर हो सकते हैं:

  • सरसों का तेल: खाना पकाने के लिए सरसों के तेल का उपयोग करें, क्योंकि इसमें मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड प्रचुर मात्रा में होते हैं।
  • धनिया और मेथी: धनिया के बीज का पानी पाचन सुधारता है। मेथी के बीजों में मौजूद घुलनशील फाइबर आंतों में कोलेस्ट्रॉल के अवशोषण को रोकता है।
  • अलसी के बीज: अलसी के पाउडर का सेवन छाछ या पानी के साथ करने से कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण में रहता है।
  • सोयाबीन: यह लिवर को LDL साफ करने में मदद करता है।
  • आहार में बदलाव: जई, अदरक, दालचीनी, हल्दी और आंवला जैसी चीजों को अपने दैनिक भोजन का हिस्सा बनाएं।
  • किशमिश और बादाम: रात भर भीगे 10-12 किशमिश और 6-7 बादाम सुबह खाली पेट खाना लाभदायक है (डायबिटीज वाले किशमिश का सेवन न करें)।
  • आयुर्वेदिक औषधियां: गुग्गुल फैट मेटाबॉलिज्म में सुधार करता है, अर्जुन की छाल का पाउडर हृदय की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और त्रिफला चूर्ण शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालकर लिपिड प्रोफाइल को सुधारता है।

अंतिम सलाह: किसी भी औषधि जैसे आरोग्यवर्धिनी वटी या सप्लीमेंट्स को शुरू करने से पहले अपनी प्रकृति के अनुसार सही खुराक जानने के लिए किसी अनुभवी आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श जरूर करें।

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