इंडिया गठबंधन के विरोध मार्च से क्यों दूर रहे ओवैसी
दिल्ली में मंगलवार को चुनाव आयोग के खिलाफ इंडिया गठबंधन के सांसदों द्वारा किए गए विरोध मार्च में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जब असदुद्दीन ओवैसी से इस विषय पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट लहजे में कहा कि वह इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए इस प्रदर्शन में शामिल होने का कोई औचित्य नहीं था। उन्होंने इस स्थिति को एक पुराने मुहावरे के जरिए स्पष्ट करते हुए कहा कि 'बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना' वाली स्थिति है, जिसका अर्थ है कि जिस गठबंधन का वे हिस्सा नहीं हैं, उसके विरोध में शामिल होकर वे अपना समर्थन नहीं देना चाहते थे।
चुनाव आयुक्त के चयन पर जताई गंभीर चिंता
असदुद्दीन ओवैसी ने केवल प्रदर्शन से दूरी ही नहीं बनाई, बल्कि देश के मुख्य चुनाव आयुक्त यानी CEC के चयन की मौजूदा प्रक्रिया पर भी कड़े सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था पूरी तरह से सरकार या कार्यपालिका के पक्ष में झुकी हुई है और इसे तत्काल बदलने की आवश्यकता है। ओवैसी ने एक वैकल्पिक व्यवस्था का सुझाव देते हुए कहा कि CEC का चयन निष्पक्ष होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि इसके लिए ऐसी चयन समिति बनाई जानी चाहिए, जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश यानी CJI की भूमिका शामिल हो, ताकि चुनाव आयोग की स्वायत्तता बनी रहे।
SIR को बताया पिछले दरवाजे से NRC
असदुद्दीन ओवैसी ने बिहार में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया पर भी अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने दावा किया कि वे इस प्रक्रिया का पहले भी विरोध कर चुके हैं। ओवैसी ने कहा कि बिहार में अपनाई जा रही यह SIR प्रक्रिया पूरी तरह से गलत है। उन्होंने इसे सीधे तौर पर एक बड़ा आरोप देते हुए कहा कि यह पिछले दरवाजे से लाया गया NRC है, जिसके जरिए लोगों को अनावश्यक रूप से परेशानी का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने व्यवस्था की खामियों को उजागर करते हुए इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए खतरनाक बताया।
इंडिया गठबंधन का विरोध और राहुल गांधी की हिरासत
उल्लेखनीय है कि मंगलवार को इंडिया गठबंधन में शामिल 19 राजनीतिक दलों ने मिलकर संसद के मकर द्वार से चुनाव आयोग कार्यालय तक एक विरोध मार्च निकाला था। इस दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने बैरिकेडिंग पार कर आकाशवाणी भवन परिसर में धरना प्रदर्शन किया था। इस घटना के बाद मंगलवार रात को ही पुलिस की टीम ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई प्रमुख कांग्रेस नेताओं को हिरासत में ले लिया था। हालांकि, कुछ समय बाद ही इन नेताओं को पुलिस ने रिहा कर दिया। असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर दोहराया कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता बहाल करने के लिए मौजूदा नियुक्ति कानूनों में संशोधन करना अनिवार्य है।
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