आदिवासी इलाकों में टिपरा मोथा का जलवा
त्रिपुरा में संपन्न हुए विलेज कमेटी चुनावों के परिणामों ने राज्य की राजनीति में एक बार फिर नए समीकरणों को जन्म दिया है। भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन में शामिल टिपरा मोथा पार्टी ने इन चुनावों में अपनी व्यापक लोकप्रियता का परिचय देते हुए ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल के अंतर्गत आने वाली कुल 587 विलेज कमेटियों की 4,594 सीटों पर हुए इस मतदान में प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देबबर्मा के नेतृत्व वाली टीएमपी का प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा है। पार्टी ने अकेले अपने दम पर 3,428 सीटों पर जीत का परचम लहराया है, जो स्पष्ट रूप से आदिवासी बहुल क्षेत्रों में उनकी मजबूत पकड़ को दर्शाता है।
मतगणना और चुनावी आंकड़े
इन चुनावों के अंतिम नतीजे 6 अक्टूबर की सुबह सार्वजनिक किए गए। मतदान की प्रक्रिया 28 सितंबर को पूरी हुई थी, जिसके बाद सोमवार से राज्य के 45 अलग-अलग केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतों की गणना शुरू की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कुल 4,594 सीटों में से टीएमपी ने 74.61 प्रतिशत सीटों पर कब्जा किया है। एनडीए गठबंधन के घटक दल भाजपा ने इन चुनावों में 859 सीटें यानी 18.70 प्रतिशत पर जीत हासिल की है। इसके अतिरिक्त, आदिवासी हितों के लिए काम करने वाली इंडिजिनस पीपल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा ने 33 सीटें यानी 0.72 प्रतिशत अपने नाम की हैं। वहीं दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल सीपीआई (एम) को मात्र 87 सीटें (1.89 प्रतिशत) और कांग्रेस को केवल 14 सीटें (0.30 प्रतिशत) मिली हैं, जो राज्य में उनके घटते जनाधार को उजागर करता है। निर्दलीय उम्मीदवारों ने 173 सीटों पर जीत दर्ज की है, जो कि कुल सीटों का 3.77 प्रतिशत है।
निर्विरोध जीत और नामांकन की स्थिति
चुनावी प्रक्रिया के दौरान कुछ सीटों पर निर्विरोध जीत भी देखने को मिली। हालांकि कुल 4,597 सीटों की घोषणा की गई थी, लेकिन विभिन्न कारणों से तीन सीटों के लिए कोई भी नामांकन पत्र दाखिल नहीं हो सका। कुल सीटों में से 1,644 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए। राज्य चुनाव आयोग के आंकड़ों पर गौर करें तो टीएमपी ने 1,557 सीटें यानी 33.87 प्रतिशत निर्विरोध जीतीं। भाजपा को 81 सीटों (1.76 प्रतिशत) पर निर्विरोध सफलता मिली, जबकि सीपीआई (एम) एक सीट पर निर्विरोध जीतने में कामयाब रही। शेष 2,950 सीटों के लिए ही असल मतदान प्रक्रिया संपन्न हुई थी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और संवैधानिक अधिकार
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप और दिशा-निर्देशों के बाद राज्य में एक दशक के लंबे अंतराल के पश्चात ये विलेज कमेटी चुनाव संपन्न हो सके हैं। प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देबबर्मा के मार्गदर्शन में टीएमपी पार्टी वर्ष 2021 से त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल का संचालन कर रही है। यह काउंसिल संवैधानिक रूप से राज्य के कुल 58 ब्लॉकों में से 52 ब्लॉकों के अधिकार क्षेत्र को संभालती है। इस निकाय की स्थापना 1 अप्रैल 1985 को 49वें संविधान संशोधन के अंतर्गत संविधान की छठी अनुसूची के तहत की गई थी। इस काउंसिल की संरचना में 28 निर्वाचित सदस्य होते हैं और 2 सदस्य राज्य सरकार द्वारा मनोनीत किए जाते हैं।
नेताओं की प्रतिक्रियाएं
चुनाव परिणामों पर अपनी प्रसन्नता जाहिर करते हुए मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कहा कि यह जनादेश एनडीए की विकासोन्मुखी नीतियों की जीत है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि वे सभी मतदाताओं के प्रति आभारी हैं जिन्होंने इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा लिया और भाजपा गठबंधन पर अपना भरोसा जताया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार पहाड़ी और मैदानी, दोनों क्षेत्रों में समान रूप से विकास की गति को तेज करने के लिए प्रतिबद्ध है।
वहीं, टिपरा मोथा प्रमुख प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देबबर्मा ने इसे आदिवासी समाज की जीत बताया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में लड़ी गई लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अब टिपरासा समुदाय को उनके संवैधानिक अधिकार वापस मिले हैं। उनके अनुसार, इन नतीजों से आदिवासी लोगों को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी और वे अपने अधिकारों की रक्षा करने में अधिक सक्षम होंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंततः यह जीत आम जनता और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों की है।
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