साड़ी पहनकर लगाई दौड़: रामगढ़ में सुनीता और जागेश्वरी के जज्बे ने हर किसी को हैरान किया

झारखंड के रामगढ़ में होमगार्ड भर्ती के ट्रायल के दौरान दो महिलाओं ने बिना किसी खेल के साजो-सामान के साड़ी में दौड़कर सबको अचंभित कर दिया। बूढ़ा खुखरा गांव की इन महिलाओं ने तय समय से पहले ही 1600 मीटर की दौड़ पूरी कर अपना हौसला साबित किया है।

साड़ी में दौड़कर पेश की मिसाल

झारखंड के रामगढ़ में होमगार्ड बहाली को लेकर आयोजित ट्रायल का एक वीडियो इन दिनों इंटरनेट की दुनिया में सुर्खियों का विषय बना हुआ है। आमतौर पर दौड़ने के लिए लोग महंगे स्पोर्ट्स शूज़ और आरामदायक ट्रैकसूट का उपयोग करते हैं, लेकिन रामगढ़ के सिद्धू-कान्हू जिला मैदान में नजारा कुछ अलग ही था। यहाँ बूढ़ा खुखरा गांव की दो महिलाओं, सुनीता देवी और जागेश्वरी कुमारी ने बिना किसी आधुनिक सुविधा या खेल पोशाक के, अपनी पारंपरिक साड़ी में ही 1600 मीटर की दौड़ पूरी कर उपस्थित सभी लोगों को चौंका दिया।

साड़ी संभालते हुए पूरी की चुनौती

ट्रायल के दौरान इन महिलाओं के पास न तो दौड़ने के लिए विशेष जूते थे और न ही ट्रैकसूट, लेकिन उनका इरादा काफी मजबूत था। रामगढ़ प्रखंड के सुदूर ग्रामीण इलाके से आने वाली सुनीता और जागेश्वरी ने मैदान में कदम रखते ही अपनी साड़ी को संभालते हुए दौड़ शुरू कर दी। नियमानुसार, होमगार्ड भर्ती के इस ट्रायल में 1600 मीटर की दौड़ को 8 मिनट के भीतर पूरा करना था। हैरानी की बात यह रही कि साड़ी जैसी पोशाक में भी इन महिलाओं ने उस दूरी को महज 7 मिनट में ही तय कर लिया। 36 वर्षीय सुनीता देवी और 28 वर्षीय जागेश्वरी कुमारी की इस उपलब्धि ने साबित कर दिया कि शारीरिक फिटनेस के लिए केवल दृढ़ संकल्प की आवश्यकता होती है, न कि महंगे उपकरणों की।

खेती-किसानी और संघर्ष भरी दिनचर्या

सुनीता और जागेश्वरी की यह कहानी केवल एक वायरल वीडियो भर नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण भारत के संघर्ष को दर्शाती है। ये महिलाएं एक सामान्य ग्रामीण पृष्ठभूमि से आती हैं और खेती-बाड़ी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करती हैं। अपनी दैनिक जिम्मेदारियों के बावजूद, वे होमगार्ड में नौकरी पाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं। दोनों महिलाएं बताती हैं कि वे खुद को फिट रखने के लिए रोज सुबह 4 बजे ही अपने घर से दौड़ का अभ्यास करने निकल जाती हैं। उनके गांव की अन्य महिलाएं और युवतियां भी होमगार्ड भर्ती की तैयारी में जुटी हैं, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वे ट्रैकसूट या अच्छे जूतों जैसी सुविधाएं जुटा पाने में असमर्थ हैं।

संसाधनों की कमी लेकिन हौसले बुलंद

इन महिलाओं का मानना है कि सुविधाओं का अभाव उनके सपनों के आड़े नहीं आ सकता। साड़ी पहनकर दौड़ना उनकी मजबूरी जरूर हो सकती है, लेकिन इसे उन्होंने अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। बूढ़ा खुखरा गांव की इन महिलाओं का कहना है कि उनके पास संसाधन सीमित हैं, लेकिन मेहनत और हिम्मत की कोई कमी नहीं है। इसी जज्बे के साथ वे सुबह के अंधेरे में ही अपनी ट्रेनिंग शुरू कर देती हैं। उनका यह सफर इस बात का प्रतीक है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, तो कठिन परिस्थितियां भी बाधा नहीं बन पातीं।

284 पदों पर होनी है भर्ती

रामगढ़ जिले में होमगार्ड के कुल 284 पदों के लिए बहाली प्रक्रिया आयोजित की जानी है, जिसकी औपचारिक शुरुआत 24 अक्टूबर से होगी। इन ग्रामीण महिलाओं के लिए यह बहाली केवल सरकारी नौकरी हासिल करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह अपनी मेहनत को समाज के सामने साबित करने का एक मंच भी है। जब सुनीता और जागेश्वरी की साड़ी में दौड़ते हुए तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए, तो लोगों ने उनकी जमकर तारीफ की। उनका यह वायरल होना यह स्पष्ट करता है कि जीत के लिए मैदान और आत्मविश्वास की जरूरत होती है, महंगे ट्रैकसूट की नहीं। सरकारी नौकरी का सपना देख रही ये महिलाएं अब उन सभी के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं जो अभावों के बावजूद अपने लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ते रहते हैं।

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