बागेश्वर धाम रेप मामला: DNA रिपोर्ट और पीड़िता के पलटने के बाद हाईकोर्ट ने SIT जांच के दिए निर्देश

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बागेश्वर धाम से जुड़े रेप मामले में बड़ी राहत न देते हुए नई SIT जांच के आदेश दिए हैं, क्योंकि DNA रिपोर्ट में आरोपी पिता नहीं साबित हुआ और पीड़िता भी अपने बयान से पीछे हट गई है।

मामले में आया नया मोड़

मध्य प्रदेश में बहुचर्चित बागेश्वर धाम रेप मामले में अब एक नया और बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है। जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इस पूरे मामले की नए सिरे से निष्पक्ष जांच करने का निर्देश दिया है। यह कदम तब उठाया गया है जब हाल ही में सामने आई DNA रिपोर्ट में आरोपी राजू जाटव के उस भ्रूण का जैविक पिता होने की पुष्टि नहीं हो पाई है, जिससे यह मामला और अधिक उलझ गया है।

क्या है मामला और क्यों हुई जांच

इस साल 15 मार्च को 16 साल की एक किशोरी के साथ रेप का मामला सामने आया था। सरकारी पक्ष के मुताबिक, यह लड़की अपनी मां के साथ झगड़ा होने के बाद घर से निकल गई थी और भटकते हुए बागेश्वर धाम पहुंच गई थी। आरोप है कि वहां उसकी मुलाकात राजू जाटव से हुई, जिसने आश्रम के नजदीक एक खेत में लड़की के साथ दुष्कर्म किया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी उसे 15 दिनों तक अपने साथ रखे रहा और बाद में उसे ट्रेन के जरिए पचोर ले गया था।

पीड़िता के बयानों में विरोधाभास

मामले की गंभीरता तब बढ़ गई जब पीड़िता ने कोर्ट में अपने बयानों को पूरी तरह बदल दिया। इससे पहले, पुलिस के पास दर्ज बयानों में, अपनी बहन और बाल कल्याण समिति की मौजूदगी में मजिस्ट्रेट के सामने लड़की ने स्पष्ट रूप से राजू जाटव पर रेप का आरोप लगाया था। लेकिन, हाई कोर्ट के समक्ष सुनवाई के दौरान उसने अपने पुराने बयानों का खंडन कर दिया। जस्टिस अजय कुमार निरंजन की बेंच ने गौर किया कि पीड़िता ने क्रॉस-एग्जामिनेशन के दौरान सरकारी पक्ष के दावों का समर्थन नहीं किया, जिससे पूरा केस एक पहेली बन गया है।

DNA रिपोर्ट ने बढ़ाई चुनौती

जांच के दौरान पीड़िता के 2 महीने के गर्भ का परीक्षण कराया गया था, जिसे अबॉर्शन प्रक्रिया के जरिए पहले ही हटा दिया गया था। 29 अगस्त को इस भ्रूण की DNA रिपोर्ट प्राप्त हुई, जिसमें राजू जाटव के जैविक पिता होने की पुष्टि नहीं हुई। इस रिपोर्ट के आने और पीड़िता के बयान बदलने के बाद, हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की सच्चाई तक पहुंचना जरूरी है।

अब SIT करेगी गहन पड़ताल

हाई कोर्ट ने छतरपुर के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया है कि वे तत्काल एक विशेष जांच दल यानी SIT का गठन करें। इस टीम को 2 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। SIT का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि आखिर उस नाबालिग के साथ असली दोषी कौन था और उस गर्भ का वास्तविक जैविक पिता कौन है।

आरोपी की जमानत याचिका खारिज

कानूनी दांव-पेच के बीच, 25 सितंबर को हाई कोर्ट ने आरोपी राजू जाटव की दूसरी जमानत अर्जी को भी सिरे से खारिज कर दिया है। इस फैसले की प्रति 4 अक्टूबर को कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड की गई थी। अब पूरी कानूनी प्रक्रिया और उम्मीदें SIT की आगामी जांच पर टिकी हुई हैं, जो यह तय करेगी कि कानून के दायरे में असली मुजरिम कौन है और क्या पीड़िता के बदले हुए बयानों के पीछे कोई अन्य दबाव है या सच्चाई कुछ और है।

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