कर्नाटक में मतदाता सूची सुधार (SIR) को लेकर बढ़ा सियासी तापमान, भाजपा-जदएस ने राज्यपाल से की कांग्रेस सरकार की शिकायत

कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। एनडीए (NDA) के घटक दलों भाजपा और जदएस ने कांग्रेस सरकार पर पुलिस बल के दुरुपयोग और चुनाव प्रक्रिया में अनुचित हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा है।

कर्नाटक की सियासत में इन दिनों मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया को लेकर घमासान मचा हुआ है। राज्य में विपक्षी दलों के गठबंधन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल सेक्युलर (JDS) के वरिष्ठ नेताओं ने एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल के रूप में राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात की। इस दौरान नेताओं ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हुए उन्हें एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। विपक्ष का आरोप है कि राज्य की कांग्रेस सरकार मतदाता सूची पुनरीक्षण की इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया में पूरी तरह से गैर-कानूनी और अनुचित तरीके से दखल दे रही है।

मतदाता सूची सुधार और एसआईआर प्रक्रिया का महत्व

राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में एनडीए के नेताओं ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में अवैध घुसपैठियों और अयोग्य व्यक्तियों के नाम शामिल होने से रोकने के लिए विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया चलाई जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में केवल वास्तविक और वैध मतदाता ही मतदान कर सकें। नेताओं के अनुसार, मतदाता सूची में किसी भी अयोग्य नाम को शामिल करने के खिलाफ आपत्ति दर्ज करना हर नागरिक का एक वैधानिक और कानूनी अधिकार है। यह अधिकार जांच, नियंत्रण, चुनाव अधिकारियों द्वारा की जाने वाली संवीक्षा और कानून द्वारा मान्यता प्राप्त अपील प्रक्रिया के तहत सुरक्षित है।

ज्ञापन में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि वर्तमान नियमों के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची में आवश्यक सुधारों की पहचान करने के लिए थोक में आवेदन जमा करने का स्पष्ट प्रावधान है। इन आपत्तियों के निपटारे से पहले चुनाव पंजीकरण अधिकारी (ERO) और सहायक चुनाव पंजीकरण अधिकारी (AERO) द्वारा हर एक शिकायत का गहनता से क्रॉस-सत्यापन किया जाता है। इसके अलावा, बूथ स्तर के सहायक (BLA) को यह अधिकार प्राप्त है कि वह कई प्रपत्र-7 (फॉर्म 7) आवेदन पत्र दाखिल कर सकते हैं ताकि गलत प्रविष्टियों को हटाया जा सके।

एनडीए नेताओं ने कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप

भाजपा और जदएस के नेताओं ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि जब इस संवैधानिक प्रक्रिया को पूरा किया जा रहा है, तब कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के सदस्य और कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के कार्यकर्ता इसमें बाधा डाल रहे हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि सत्तापक्ष के लोग एसआईआर प्रक्रिया के कामकाज को प्रभावित करने के लिए बड़े पैमाने पर अनुचित दबाव और हस्तक्षेप कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर राज्य सरकार अपनी पुलिस मशीनरी का दुरुपयोग कर रही है।

विपक्ष के अनुसार, जो लोग नियमों के दायरे में रहकर फॉर्म 7 के माध्यम से मतदाता सूची पर अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं, उनके खिलाफ पुलिस का इस्तेमाल कर झूठे और गंभीर आपराधिक मामले दर्ज किए जा रहे हैं। इसका एकमात्र उद्देश्य आपत्तियां दर्ज कराने वाले नागरिकों के मन में डर और भय का माहौल पैदा करना है, जिससे पूरी एसआईआर प्रक्रिया कमजोर हो रही है। नेताओं ने बताया कि हालांकि फर्जी आपत्तियां दर्ज कराने पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है, लेकिन राज्य सरकार पुलिस पर दबाव बनाकर भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी, धमकी देने और शांति भंग करने जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज करवा रही है। उनका सीधा निशाना भाजपा के कार्यकर्ताओं और समर्थकों को बनाना है।

राज्य के विभिन्न जिलों में दर्ज हुई एफआईआर

ज्ञापन में उन विशिष्ट क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है जहां विपक्ष के कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर निशाना बनाया गया है। अब तक राज्य के अलग-अलग हिस्सों में ऐसे 6 प्राथमिक मामले (FIR) दर्ज किए जाने की खबरें सामने आई हैं। इन क्षेत्रों में शामिल हैं:

  • भाल्की (बीदर जिला)
  • मार्केट एरिया (बेलगावी जिला)
  • व्यालिकवल (बेंगलुरु)
  • बल्लारी
  • नरसिम्हाराजा (मैसूरु जिला)

विपक्षी नेताओं का कहना है कि पुलिस बल का यह दुरुपयोग भारत निर्वाचन आयोग जैसे स्वतंत्र और निष्पक्ष निकाय की स्वायत्तता पर सीधा हमला है। इस तरह के कदमों से पूरी एसआईआर प्रक्रिया की विश्वसनीयता और पवित्रता खतरे में पड़ गई है।

1 अक्टूबर की घटना और मुख्य निर्वाचन कार्यालय पर दबाव का मुद्दा

एनडीए के ज्ञापन में 1 अक्टूबर को हुई एक घटना का भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। आरोप लगाया गया है कि उस दिन कांग्रेस सरकार के मंत्रियों ने अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के बड़े दल-बल के साथ, निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद, चुनाव अधिकारी के कार्यालय परिसर के भीतर अवैध रूप से विरोध प्रदर्शन किया था। इस अनधिकृत प्रदर्शन के कारण मुख्य निर्वाचन कार्यालय के सामान्य कामकाज पर अनुचित प्रभाव पड़ा। विपक्ष का कहना है कि हालांकि मुख्य चुनाव अधिकारी ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 के तहत कार्रवाई का प्रस्ताव दिया था, लेकिन यह कार्रवाई पुलिस बल के दुरुपयोग को रोकने के बजाय उसे वैध बनाती हुई दिखाई दे रही है। इसके परिणामस्वरूप बेलगावी, बीदर, बल्लारी और मैसूरु जैसे जिलों में आम नागरिकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच डर का माहौल है कि उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 के तहत गंभीर आपराधिक मामले दर्ज कर लिए जाएंगे।

राज्यपाल से की गई ये प्रमुख मांगें

राज्यपाल को सौंपे गए इस शिकायत पत्र में चिंता जताई गई है कि कर्नाटक का मुख्य निर्वाचन कार्यालय भी राज्य सरकार के भारी प्रशासनिक दबाव के आगे झुकता हुआ दिखाई दे रहा है। इन चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों को देखते हुए भाजपा और जदएस के नेताओं ने राज्यपाल से तुरंत हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है। उन्होंने राज्यपाल से निम्नलिखित मांगें की हैं:

  • कर्नाटक सरकार को तुरंत उचित और कड़े निर्देश जारी किए जाएं ताकि फॉर्म 7 के जरिए वैध आपत्तियां दर्ज कराने वाले नागरिकों के अधिकारों और हितों की रक्षा की जा सके।
  • एसआईआर की इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं और अन्य आम नागरिकों के खिलाफ दर्ज किए जा रहे झूठे, बेबुनियाद और अनधिकृत मामलों पर रोक लगाई जाए।
  • पुलिस को निर्देश दिया जाए कि वह राजनीतिक द्वेष के चलते भारतीय न्याय संहिता 2023 की गंभीर धाराओं के तहत मनमाने ढंग से आपराधिक मामले दर्ज न करे।

एनडीए नेताओं को उम्मीद है कि राज्यपाल इन गंभीर आरोपों पर संज्ञान लेंगे और कर्नाटक में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाएंगे।

https://www.indiatv.in/india/politics/karnataka-political-row-over-sir-bjp-jds-complain-to-governor-about-congress-government-submit-memorandum-2026-10-06-1247199