मीठा और लिवर का संबंध
भारत में त्योहारों का आयोजन मिठाइयों और स्वादिष्ट पकवानों के बिना अधूरा माना जाता है। चाहे होली हो या दिवाली, लोग घरों में जमकर मिठाइयां खाते हैं और एक दूसरे को उपहार में भी मीठा देते हैं। यह सिलसिला कई हफ्तों तक चलता रहता है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस अधिक चीनी के सेवन को शरीर के लिए काफी हानिकारक मानते हैं। मीठे पेय पदार्थ, तली-भुनी चीजें और भारी खानपान न केवल शरीर में कैलोरी की मात्रा को बढ़ाते हैं, बल्कि चीनी की अधिकता लिवर को गंभीर नुकसान भी पहुंचा सकती है। यदा-कदा थोड़ी मात्रा में मीठा खाने से लिवर पर तत्काल असर नहीं पड़ता, लेकिन बार-बार और अत्यधिक मात्रा में चीनी का सेवन करने से वजन बढ़ना, इंसुलिन रेजिस्टेंस और लिवर में फैट जमा होने जैसी खतरनाक समस्याएं पैदा हो जाती हैं।
लिवर पर चीनी का प्रभाव
शारदा हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ भुमेश त्यागी के अनुसार, हम जो भी मीठा खाते हैं, उसे पचाने में लिवर की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। चीनी और मीठे पेय पदार्थों में पाया जाने वाला फ्रक्टोज मुख्य रूप से लिवर में ही जाकर जमा होता है। जब कोई व्यक्ति लगातार उच्च ऊर्जा वाली चीजें अधिक मात्रा में खाता है, तो लिवर उस अतिरिक्त कार्बोहाइड्रेट के एक बड़े हिस्से को फैट में बदलने लगता है। लंबे समय तक ऐसा चलने से शरीर में मेटाबॉलिज्म से जुड़ी गड़बड़ियां शुरू हो जाती हैं, जो आगे चलकर स्टीटोटिक लिवर डिजीज या MASLD का रूप ले सकती हैं। इसे पूर्व में गैर-अल्कोहलिक फैटी लिवर यानी NAFLD के नाम से जाना जाता था।
चीनी शरीर में कैसे काम करती है
जब आप कोई मिठाई या मीठी चीज खाते हैं, तो उसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट ग्लूकोज में बदलकर रक्त प्रवाह में शामिल हो जाता है। हमारा शरीर ग्लूकोज का उपयोग ऊर्जा के लिए तुरंत करता है या उसे बाद के लिए जमा कर लेता है। वहीं, फ्रक्टोज का चयापचय मुख्य रूप से लिवर द्वारा किया जाता है। यदि आप लगातार अत्यधिक फ्रक्टोज और कैलोरी का सेवन करते हैं, तो लिवर 'डी नोवो लिपोजेनेसिस' नामक प्रक्रिया के जरिए फैटी एसिड का उत्पादन बहुत बढ़ा देता है। इस फैट का काफी हिस्सा लिवर की कोशिकाओं के भीतर जमा होने लगता है। एक दिन मीठा खाने से ऐसा नहीं होता, लेकिन यह आदत जब लंबे समय तक बनी रहती है, तो नुकसान निश्चित है। जिन लोगों का वजन पहले से अधिक है, जिन्हें टाइप 2 डायबिटीज है या जो इंसुलिन रेजिस्टेंस से जूझ रहे हैं, उनके लिए खतरा और भी बढ़ जाता है।
क्या चीनी लिवर में सूजन का कारण बनती है
लिवर में फैट जमा होने का मतलब यह कतई नहीं है कि लिवर में सूजन या डैमेज हो ही गया है। MASLD एक व्यापक समस्या है, जिसमें कुछ व्यक्तियों के लिवर में सूजन या चोट के बिना भी फैट जमा हो सकता है। हालांकि, कुछ लोगों में मेटाबॉलिज्म संबंधी विकार बढ़कर स्टीटोहेपेटाइटिस की स्थिति पैदा कर देते हैं। इस स्थिति में लिवर में फैट के साथ-साथ सूजन आने लगती है और लिवर की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। यदि इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह फाइब्रोसिस, सिरोसिस और कुछ मामलों में लिवर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का कारण भी बन सकता है।
अतिरिक्त स्वास्थ्य जानकारी
विशेषज्ञों का यह भी सुझाव है कि लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहना चाहिए। जैसे कि क्या आपने हेपेटाइटिस का टीका लगवाया है या क्या सभी वयस्कों को एक बार हेपेटाइटिस की जांच करानी चाहिए, इन विषयों पर अपने डॉक्टर से परामर्श अवश्य करना चाहिए।
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