खाटूश्यामजी में संजय शर्मा का आगमन
राजस्थान सरकार में वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा ने विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल खाटूश्यामजी पहुंचकर बाबा श्याम के दर्शन किए। अपने इस दौरे के दौरान उन्होंने बाबा के दरबार में विधिवत रूप से पूजा-अर्चना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए कामना की। खाटूश्यामजी की महिमा पूरे देश में फैली हुई है, जहां हर दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु अपनी आस्था लेकर पहुंचते हैं। मंत्री संजय शर्मा के आने पर श्री श्याम मंदिर परिवार द्वारा उनका भव्य स्वागत किया गया।
मंदिर परिवार ने किया सम्मान
मंत्री संजय शर्मा जब मंदिर परिसर पहुंचे, तो मंदिर समिति के नरेंद्र सिंह चौहान ने उनका स्वागत किया। इस दौरान उन्हें बाबा श्याम का पवित्र प्रतीक चिह्न भेंट स्वरूप प्रदान किया गया। साथ ही, उन्हें श्याम दुपट्टा ओढ़ाकर विशेष सम्मान दिया गया। मंत्री ने दर्शन के बाद बाबा श्याम के दरबार में अपना शीश नवाया और आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने इस दौरान मंदिर परिसर में कुछ समय बिताया और वहां की व्यवस्थाओं के बीच भक्तों की अपार श्रद्धा का अनुभव किया।
वीआईपी हस्तियों का केंद्र खाटूश्यामजी
खाटूश्यामजी न केवल आम लोगों की आस्था का केंद्र है, बल्कि यहां अक्सर देश की बड़ी हस्तियों का आना-जाना लगा रहता है। राजनीति से लेकर खेल और फिल्म जगत की तमाम बड़ी हस्तियां लखदातार के आगे नतमस्तक होने यहां पहुंचती हैं। हाल ही में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी खाटूश्यामजी आकर बाबा श्याम का आशीर्वाद लिया था। इसी परंपरा के चलते संजय शर्मा का यहां आना काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हारे के सहारे की महिमा
मीडिया से बातचीत के दौरान मंत्री संजय शर्मा ने कहा कि खाटूश्यामजी की महिमा अत्यंत निराली है। उन्होंने कहा कि बाबा श्याम को 'हारे का सहारा' कहा जाता है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जो भी व्यक्ति जीवन में निराश होकर या हार मानकर इस दरबार में पहुंचता है, उसे निश्चित रूप से बाबा श्याम की कृपा से जीवन में जीत हासिल होती है। यह दरबार भक्तों के दुख-दर्द दूर करने वाला है।
कौन हैं बाबा श्याम और क्या है इतिहास
बाबा श्याम को भगवान श्रीकृष्ण का ही एक अवतार माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत के युद्ध के समय भीम के पौत्र बर्बरीक कौरवों की ओर से युद्ध में शामिल होने जा रहे थे। तब भगवान श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण का वेश धारण कर उनसे शीश दान में मांगा था। बर्बरीक ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपना शीश दान कर दिया था। उनकी इस महानता और त्याग से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें यह वरदान दिया कि कलियुग में उनकी पूजा 'श्याम' नाम से होगी और वे हमेशा हारे हुए लोगों का साथ देंगे। यही कारण है कि आज देश भर के श्रद्धालु उन्हें 'हारे के सहारे' के रूप में पूजते हैं और अपनी मनोकामनाएं लेकर उनके चरणों में नमन करते हैं।
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