विरोध प्रदर्शन की पूरी तैयारी
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी गठबंधन इंडिया ने अपनी आर-पार की लड़ाई का रोडमैप तैयार कर लिया है। बीते एक सप्ताह से चली आ रही बैठकों के लंबे दौर के बाद, अब विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग के विरोध में सड़क पर उतरने का अंतिम फैसला ले लिया है। यह मुद्दा न केवल राजनीतिक गलियारों में गरमाया हुआ है, बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं और जेन-जी के बीच भी अपनी जगह बना चुका है। विपक्षी दलों का मुख्य जोर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर है। इसके साथ ही वे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने और आगामी चुनावों में मतपत्र का इस्तेमाल करने की पुरजोर वकालत कर रहे हैं।
मकर द्वार से निर्वाचन सदन तक मार्च
विपक्षी गठबंधन के तमाम सांसद मंगलवार को निर्धारित योजना के अनुसार संसद भवन के मकर द्वार पर एकत्रित होंगे। यहां से एक संयुक्त पैदल मार्च निकाला जाएगा, जिसका अंतिम गंतव्य निर्वाचन सदन यानी चुनाव आयोग का मुख्यालय होगा। वहां पहुंचकर विपक्षी दल आयोग का घेराव करने की योजना बना रहे हैं। विपक्षी सांसदों के इस सख्त तेवर को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। संसद परिसर से लेकर निर्वाचन सदन के रास्ते तक सुरक्षा व्यवस्था को बेहद चाक-चौबंद किया जा रहा है। हालांकि, दिल्ली पुलिस इस हाई-प्रोफाइल पैदल मार्च को संसद परिसर से कितनी दूर तक आगे बढ़ने की इजाजत देती है, यह फिलहाल सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। मार्च के दौरान सुरक्षा की दृष्टि से धारा-163 लागू कर दी गई है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
सांसदों की एकजुटता और रणनीतिक भागीदारी
इस बड़े प्रदर्शन में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के भी दिल्ली पहुंचने की पूरी संभावना है। पार्टी के कई सांसद पहले ही राजधानी पहुंच चुके हैं। लोकसभा में कांग्रेस के बाद 37 सीटों के साथ समाजवादी पार्टी दूसरी सबसे बड़ी विपक्षी ताकत है, जो इस आंदोलन को मजबूती दे रही है। कांग्रेस पार्टी लगातार आम आदमी पार्टी और डीएमके (DMK) को इस मार्च में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इन दोनों दलों को विशेष निमंत्रण भी भेजा गया है। यह कवायद इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ये दोनों दल औपचारिक रूप से गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन संसद के भीतर वे अक्सर विपक्षी खेमे के साथ एकजुट होकर काम करते हैं।
संसद से सड़क तक आंदोलन का एजेंडा
मुख्य विपक्षी दल के रूप में कांग्रेस ने एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। उनका उद्देश्य इस मुद्दे को संसद के शीतकालीन सत्र तक जनता के बीच पूरी तरह जीवित रखना है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की साझा कोशिश है कि फरवरी में प्रस्तावित पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों तक यह विवाद चुनावी मुद्दा बना रहे। हालांकि, उनकी मौजूदा रणनीति का प्राथमिक केंद्र संसद के आगामी सत्र तक इस गति को बनाए रखने पर है। विपक्षी दलों का स्पष्ट आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता, मतदाता सूची की शुचिता और निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिनका जवाब चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को देना ही होगा।
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