अंबाला: 100 साल पुरानी मिट्टी कला को जिंदा रखे हुए हैं देवराज, नई पीढ़ी के लिए बने प्रेरणा

हरियाणा के अंबाला में एक परिवार अपनी पुश्तैनी कला को पूरी शिद्दत से आगे बढ़ा रहा है। 75 वर्षीय देवराज पिछले कई दशकों से मिट्टी के बर्तन बनाने की अपनी पारिवारिक परंपरा को बखूबी निभा रहे हैं।

मिट्टी से जुड़ी है 100 साल पुरानी विरासत

अंबाला के कुम्हार मोहल्ले में रहने वाला एक परिवार आज भी अपनी जड़ों से मजबूती से जुड़ा हुआ है। 75 साल के देवराज इस पुरानी विरासत के संरक्षक बने हुए हैं, जो पिछले कई वर्षों से अपने हाथों से मिट्टी को सुंदर और उपयोगी आकार देने का काम कर रहे हैं। उनके परिवार के लिए मिट्टी के बर्तन बनाना महज एक पेशा नहीं, बल्कि 100 साल पुरानी एक परंपरा है। उनके दादा और पिता भी इसी हुनर में माहिर थे और उन्होंने ही देवराज को यह कला विरासत में दी है।

बदलाव के दौर में भी नहीं बदली निष्ठा

देवराज ने बताया कि पुराने समय में मिट्टी के बर्तनों की भारी मांग हुआ करती थी, लेकिन जैसे-जैसे समय बदला, बाजार में स्टील और प्लास्टिक जैसे आधुनिक बर्तनों का चलन बढ़ गया। इन सब बदलावों के बावजूद, देवराज ने अपने काम को कभी अधूरा नहीं छोड़ा। उनका मानना है कि मिट्टी के बर्तनों का अपना एक अलग और स्वास्थ्यवर्धक महत्व है, जिसे कोई अन्य चीज नहीं बदल सकती।

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

उनके बेटे सुरेंद्र ने अपने पिता के समर्पण को आगे बढ़ाते हुए बताया कि उन्होंने अपने परिवार के इस पुश्तैनी काम को कभी भी छोटा या कमतर नहीं आंका। सुरेंद्र का कहना है कि वे पूरे गर्व के साथ इस हुनर को आगे बढ़ा रहे हैं, जो उनके परिवार की पहचान है। आज के दौर में जब लोग अपनी पारंपरिक कलाओं को छोड़ रहे हैं, देवराज का परिवार अंबाला में अपनी मेहनत से एक मिसाल पेश कर रहा है।

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