दुबई से तेल अवीव जा रहे फ्लाईदुबई के विमान को बड़े हादसे से बचाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की सेहत को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी स्थित एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है और डॉक्टरों की देखरेख में उनकी हालत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। पूरी दुनिया में अपनी बहादुरी का लोहा मनवाने वाले इस भारतीय जांबाज की वतन वापसी का देशवासी बड़ी उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, डॉक्टरों की अंतिम सलाह के बाद ही उनके भारत लौटने की सही तारीख तय हो पाएगी।
कॉकपिट में हमला और कैप्टन की अद्वितीय जांबाजी
यह पूरा मामला 30 सितंबर का है, जब फ्लाईदुबई की एक फ्लाइट दुबई से तेल अवीव की उड़ान पर थी। सफर के दौरान अचानक विमान के ही सह-पायलट ने कॉकपिट के भीतर मुख्य पायलट कैप्टन स्मित मच्छार पर जानलेवा हमला बोल दिया। हमलावर न केवल कैप्टन को नुकसान पहुंचाना चाहता था, बल्कि वह पूरे विमान को भी क्षतिग्रस्त करने की कोशिश में था। उस समय विमान में 174 यात्री और चालक दल के अन्य सदस्य सवार थे। इस बेहद तनावपूर्ण और जानलेवा स्थिति में भी स्मित मच्छार ने अपना आपा नहीं खोया।
गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी उन्होंने अदम्य साहस का परिचय दिया और किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल रहे। उनके दरवाजा खोलते ही विमान के चालक दल और यात्रियों ने तत्परता दिखाते हुए हमलावर को काबू में कर लिया। कैप्टन स्मित की सूझबूझ और बहादुरी के कारण विमान को सुरक्षित रूप से उतारा जा सका और हवा में मंडरा रहा एक बड़ा खतरा टल गया। इस साहसिक कार्य के बाद से ही उन्हें वैश्विक स्तर पर एक सच्चे नायक के रूप में देखा जा रहा है।
वैश्विक स्तर पर मिली सराहना, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की बात
कैप्टन स्मित मच्छार की इस बहादुरी की प्रशंसा केवल भारत में ही नहीं, बल्कि इजरायल, अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई देशों में की जा रही है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी खुद फोन करके कैप्टन स्मित से बातचीत की थी। प्रधानमंत्री ने बातचीत के दौरान उनका हाल-चाल जाना और उनके अद्वितीय साहस की सराहना करते हुए उन्हें देश का असली हीरो (रियल हीरो) बताया। इस बातचीत से स्मित का हौसला और बढ़ा है।
अबू धाबी में इलाज जारी, कब लौटेंगे स्वदेश?
स्मित मच्छार के परिवार के सदस्यों से मिली जानकारी के अनुसार, हमले में उन्हें काफी गहरी चोटें आई थीं। खासकर उनके सिर और हाथों पर गंभीर घाव हुए हैं, जिनकी वजह से उन्हें अत्यधिक दर्द का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में वे अबू धाबी के अस्पताल में डॉक्टरों की एक विशेष टीम की देखरेख में हैं।
अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों का मानना है कि उन्हें पूरी तरह से ठीक होने में अभी और समय लगेगा। अक्टूबर की शुरुआत में डॉक्टरों ने उनके परिवार को सूचित किया था कि कम से कम आठ और दिन तक उनका अस्पताल में ही इलाज जारी रहेगा। इसके बाद ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी देने की तारीख पर कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि हवाई यात्रा करने से पहले स्मित का पूरी तरह से स्वस्थ होना अनिवार्य है।
मानसिक रूप से बेहद मजबूत हैं स्मित, मुंबई में हो रही प्रार्थनाएं
कैप्टन स्मित के पिता उपेंद्र मच्छार ने अपने बेटे की मानसिक स्थिति के बारे में बात करते हुए कहा कि स्मित शारीरिक रूप से दर्द में जरूर हैं, लेकिन मानसिक तौर पर वे बहुत मजबूत हैं। जब भी कोई वरिष्ठ नेता या अधिकारी उनसे फोन पर संपर्क करते हैं, तो वे बेहद शांत और संयमित रहकर बात करते हैं। पिता ने यह भी बताया कि परिवार के लोग जानबूझकर अभी उनसे उस भयानक घटना के बारे में ज्यादा बात नहीं कर रहे हैं, ताकि उन्हें किसी भी प्रकार का मानसिक तनाव न हो और उनका पूरा ध्यान रिकवरी पर लगा रहे।
अस्पताल में स्मित की पत्नी सोनल भी उनके साथ मौजूद हैं और चौबीसों घंटे उनकी देखभाल में जुटी हुई हैं। उधर, भारत में मुंबई स्थित उनके घर पर परिजनों और पड़ोसियों के बीच चिंता और उम्मीद का माहौल है। सभी लोग स्थानीय स्तर पर उनकी जल्द से जल्द सेहतमंदी और सुरक्षित स्वदेश वापसी के लिए लगातार प्रार्थनाएं कर रहे हैं। स्वयं स्मित भी अपने परिवार को आश्वस्त कर रहे हैं कि वे बहुत जल्द पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौटेंगे।
अबू धाबी में स्थित भारतीय दूतावास भी लगातार पीड़ित परिवार और वहां के स्थानीय प्रशासन के संपर्क में है। दूतावास के अधिकारी पल-पल की जानकारी ले रहे हैं और परिवार को हर संभव चिकित्सा और कानूनी सहायता प्रदान कर रहे हैं। फिलहाल पूरे देश और दुनिया की नजरें इस जांबाज पायलट के पूरी तरह स्वस्थ होने और भारत लौटने पर टिकी हुई हैं।
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