अमेरिका की नौकरी ठुकराकर भारत लौटे शरद सागर, चुनौती सच कर दिखाई- राष्ट्रपति ने खुद बुलाया वाइट हाउस

बिहार के शरद विवेक सागर ने अमेरिका में मिली आलीशान जिंदगी और शानदार करियर को छोड़कर स्वदेश वापसी का साहसी फैसला लिया था। उन्होंने अपने दोस्तों से जो वादा किया था कि वे तब अमेरिका वापस लौटेंगे जब वहां के राष्ट्रपति उन्हें बुलाएंगे, वह सच साबित हुआ और उन्हें बराक ओबामा से विशेष निमंत्रण मिला।

जिंदगी के बड़े फैसले और अटूट आत्मविश्वास

सफलता की परिभाषा अक्सर मोटी सैलरी और आलीशान दफ्तरों से तय की जाती है, लेकिन बिहार के रहने वाले शरद विवेक सागर ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने न केवल अमेरिका में मिली शानदार करियर की संभावनाओं को ठुकराया, बल्कि अपने दृढ़ संकल्प के दम पर इतिहास भी रच दिया। शरद की यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि यदि इरादे पक्के हों और अपने देश के प्रति कुछ करने का जुनून हो, तो कोई भी लक्ष्य बड़ा नहीं होता। जब उन्होंने अमेरिका छोड़कर वापस आने का फैसला लिया था, तब उनके विदेशी दोस्त हैरान थे। उन्होंने यह कभी नहीं सोचा था कि कोई शख्स मैनहट्टन की ऊंची इमारतों और लग्जरी लाइफस्टाइल को पीछे छोड़कर वापस अपने देश लौटना क्यों चाहेगा।

दोस्तों के मजाक का अनोखा जवाब

शरद सागर ने उस दौर को याद करते हुए साझा किया कि जब उनके अमेरिकी दोस्त उनसे पूछते थे कि वे वापस कब आएंगे, तो उनका जवाब बेहद आत्मविश्वास से भरा होता था। उन्होंने हंसते हुए अपने दोस्तों से कहा था कि वे अमेरिका तभी लौटेंगे जब वहां के राष्ट्रपति खुद उन्हें बुलाएंगे। उस वक्त उनके दोस्तों के लिए यह बात एक मजाक के अलावा कुछ भी नहीं थी। लोगों को लगा कि यह एक बिहारी युवक का बचकाना उत्साह है, लेकिन शरद अपने विजन को लेकर बिल्कुल स्पष्ट थे। उन्हें पता था कि वे अपने देश के युवाओं के लिए कुछ बड़ा करना चाहते हैं और उनकी मेहनत एक दिन जरूर रंग लाएगी। उनकी कही हुई यह बात मात्र कुछ सालों के भीतर एक ऐतिहासिक भविष्यवाणी साबित हुई, जिसने न केवल उनके दोस्तों को बल्कि पूरी दुनिया को हैरान कर दिया।

ऐतिहासिक फोन कॉल और वाइट हाउस का निमंत्रण

सितंबर 2016 की एक सुबह शरद सागर के लिए जीवन बदलने वाली साबित हुई। जब यह ऐतिहासिक फोन कॉल आया, तो वह पश्चिम बंगाल में मौजूद थे। उन्हें तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की तरफ से आधिकारिक निमंत्रण प्राप्त हुआ था। यह निमंत्रण साउथ बाय साउथ लॉन: अ वाइट हाउस फेस्टिवल ऑफ आइडियाज, आर्ट एंड एक्शन कार्यक्रम के लिए था। 3 अक्टूबर 2016 को वाइट हाउस में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में दुनिया भर के चुनिंदा क्रिएटर्स, इनोवेटर्स और सामाजिक बदलाव लाने वाले नेताओं को आमंत्रित किया गया था। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उस वर्ष इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम के लिए आमंत्रित होने वाले शरद एकमात्र भारतीय थे, जो उनके लिए बेहद गर्व का पल था।

वाइट हाउस में बिताए गए 9 यादगार घंटे

शरद सागर ने वाइट हाउस के भीतर 9 घंटे का समय बिताया, जो उनके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण पलों में से एक है। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ 90 मिनट का अमूल्य समय बिताया। यह यात्रा केवल एक शानदार इमारत में जाने तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह उस लंबी मेहनत की मान्यता थी जिसे उन्होंने बहुत छोटी उम्र से शुरू कर दिया था। शरद ने मात्र 16 साल की उम्र में ही 2008 में डेक्सटेरिटी ग्लोबल नाम की संस्था की नींव रख दी थी। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और पिछड़े इलाकों के प्रतिभावान विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और लीडरशिप के अवसर उपलब्ध कराना था।

सफलता का नया नजरिया

टफ्ट्स यूनिवर्सिटी से इंटरनेशनल रिलेशंस की पढ़ाई करने वाले शरद चाहते तो अमेरिका में ही रहकर विलासितापूर्ण जीवन जी सकते थे। उनके पास करियर में आगे बढ़ने के अनगिनत रास्ते खुले थे। हालांकि, उन्होंने बिहार और भारत के युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने का कठिन मार्ग चुना। आज उनकी संस्था डेक्सटेरिटी ग्लोबल के माध्यम से हजारों बच्चे अपने सपनों को हकीकत में बदलने की दिशा में बढ़ रहे हैं। शरद सागर की यह जीवन यात्रा उन सभी युवाओं के लिए एक बड़ी सीख है जो सीमित संसाधनों के बीच रहकर भी बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने साबित कर दिया है कि असली कामयाबी बड़ी कंपनियों के पदकों में नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपने योगदान में छिपी होती है। यह कहानी हमें याद दिलाती है कि अगर हम अपनी मिट्टी से जुड़कर मेहनत करें, तो दुनिया का सबसे ताकतवर व्यक्ति भी हमें बुलाने पर मजबूर हो सकता है।

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