हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रामपुर बुशैहर में एक बेहद अनूठा और आत्मीय नजारा देखने को मिला। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पहुंचे और वहां के विद्यार्थियों के साथ सीधे रूबरू हुए। इस संवाद के दौरान मुख्यमंत्री और बच्चों के बीच कई दिलचस्प, गंभीर और गुदगुदाने वाले सवाल-जवाब हुए। बच्चों के बेबाक सवालों ने जहां मुख्यमंत्री को उनके छात्र राजनीति के दिनों की याद दिला दी, वहीं मुख्यमंत्री के हाजिरजवाब अंदाज ने बच्चों का दिल जीत लिया। इस पूरे कार्यक्रम की एक सबसे मजेदार घटना सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है, जब मुख्यमंत्री ने एक छात्र को स्कूल में मोबाइल के साथ पकड़ा और छात्र ने ऐसा जवाब दिया कि खुद मुख्यमंत्री भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए।
मुख्यमंत्री ने छात्र को पकड़ा रंगे हाथ, मिला बेहद मासूम जवाब
विद्यार्थियों से सीधे बातचीत के दौरान अचानक मुख्यमंत्री की नजर सभागार में बैठे एक छात्र पर पड़ी, जो चुपके से अपने मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहा था। स्कूल परिसर में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध होने के कारण मुख्यमंत्री ने तुरंत उस छात्र को टोक दिया। उन्होंने बड़े ही दोस्ताना लहजे में छात्र से पूछा, "जब स्कूल के नियमों के अनुसार यहां मोबाइल फोन लाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है, तो फिर आप इसे अपने साथ क्यों लेकर आए हैं?"
इस सीधे सवाल पर छात्र बिल्कुल भी घबराया नहीं और उसने बेहद मासूमियत और सच्चाई के साथ जवाब दिया। छात्र ने कहा, "मेरी मम्मी ने यह मोबाइल मुझे खास तौर पर इसलिए दिया था ताकि मैं आपकी एक अच्छी सी फोटो खींच सकूं।"
छात्र की इस मासूमियत भरे और ईमानदार जवाब को सुनकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू मुस्कुरा उठे और पूरे सभागार में हंसी की लहर दौड़ गई। इसके बाद मुख्यमंत्री ने छात्र को प्यार से समझाया और सभी विद्यार्थियों को स्कूल में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर लगाए गए प्रतिबंधों का कड़ाई से पालन करने की सलाह दी। उन्होंने बच्चों से कहा कि वे स्क्रीन टाइम को कम करें और अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करें।
पढ़ाई के साथ-साथ खेलों और रचनात्मकता पर दें ध्यान
इसी बातचीत के दौरान एक उत्सुक छात्रा ने मुख्यमंत्री से पूछा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए पढ़ाई के अलावा और किन-किन चीजों पर ध्यान देना सबसे ज्यादा जरूरी है। इस पर मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को तकनीकी उपकरणों, विशेषकर मोबाइल फोन से उचित दूरी बनाए रखने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि आज के दौर में बच्चे शारीरिक गतिविधियों से दूर होते जा रहे हैं, जो सही नहीं है।
मुख्यमंत्री ने बच्चों को इनडोर और आउटडोर दोनों तरह के खेलों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा, "बचपन हमारे पूरे जीवन का सबसे सुंदर और अनमोल समय होता है। इस समय का उपयोग केवल मोबाइल देखने में नहीं, बल्कि पढ़ाई करने, खेलकूद का आनंद लेने और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों में खुद को व्यस्त रखने के लिए किया जाना चाहिए।" उन्होंने जोर देकर कहा कि खेलकूद से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है, बल्कि मानसिक दृढ़ता और टीम भावना का भी विकास होता है।
शिक्षकों की गैर-शैक्षणिक ड्यूटी और रामपुर का ट्रैफिक
संवाद का सिलसिला आगे बढ़ा तो छात्राओं ने कुछ बेहद गंभीर और व्यावहारिक मुद्दे भी मुख्यमंत्री के सामने उठाए। एक छात्रा ने सवाल किया कि स्कूलों में शिक्षकों की गैर-शैक्षणिक कार्यों में बार-बार ड्यूटी क्यों लगाई जाती है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। इस सवाल पर मुख्यमंत्री ने पहले तो मजाकिया अंदाज में चुटकी ली और कहा, "कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम्हारी इस ड्यूटी से बचने के लिए तुम्हारे किसी टीचर ने ही तुम्हें यह सवाल पूछने के लिए भेजा है?"
इसके बाद मुख्यमंत्री ने इस विषय पर गंभीरता से बात करते हुए कहा कि सरकार इस बात को लेकर बेहद संवेदनशील है। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रदेश सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से यथासंभव मुक्त रखा जाए ताकि वे अपना पूरा समय और ध्यान केवल विद्यार्थियों को अच्छी शिक्षा देने में लगा सकें।
इसके तुरंत बाद, एक अन्य छात्रा ने रामपुर क्षेत्र में रोजाना लगने वाले विकराल ट्रैफिक जाम की समस्या का मुद्दा उठाया और मुख्यमंत्री से इसका स्थाई समाधान खोजने की गुहार लगाई। छात्रा की इस प्रशासनिक समझ और जागरूकता से मुख्यमंत्री बेहद प्रभावित हुए। उन्होंने हंसते हुए कहा, "तुम्हारी इस सोच को देखकर लगता है कि तुम्हें तो भविष्य में MLA बनाना पड़ेगा।" उन्होंने छात्रा की पीठ थपथपाते हुए कहा कि यह बहुत गर्व की बात है कि इतनी कम उम्र में स्कूली बच्चे अपने क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं के प्रति इतने जागरूक हैं। उन्होंने प्रशासन को इस दिशा में उचित कदम उठाने के निर्देश देने का भरोसा दिलाया।
'अगर मुख्यमंत्री न होता, तो खेतों में काम कर रहा होता'
एक छात्र ने मुख्यमंत्री से उनके व्यक्तिगत जीवन से जुड़ा एक बहुत ही दिलचस्प सवाल पूछा कि यदि वह आज प्रदेश के मुख्यमंत्री नहीं होते, तो क्या कर रहे होते? इस सवाल का सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बहुत ही जमीनी और सीधा जवाब दिया। उन्होंने कहा, "अगर मैं आज मुख्यमंत्री पद पर न होता, तो निश्चित रूप से अपने गांव के खेतों में काम कर रहा होता और खेती-बाड़ी कर रहा होता।"
मुख्यमंत्री ने अपनी पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया कि उन्होंने वकालत की पढ़ाई (लॉ) की थी। अपनी कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने लगभग 15 दिन तक वकालत की प्रैक्टिस भी की और कोर्ट में काला कोट भी पहना। लेकिन बहुत जल्द ही उन्हें यह अहसास हो गया कि वकालत के पेशे में उनका मन नहीं लग रहा है।
उन्होंने साझा किया कि बचपन से ही उनके मन में समाज और देश के लिए कुछ करने और राजनीति में आने की गहरी इच्छा थी। उन्होंने बताया कि कॉलेज के दिनों में क्लास रिप्रेजेंटेटिव यानी CR चुने जाने के बाद से उनकी औपचारिक राजनीतिक यात्रा शुरू हुई थी। इसके बाद वे धीरे-धीरे आगे बढ़े, पहले काउंसलर बने और फिर बाद में जनता के आशीर्वाद से MLA के रूप में विधानसभा पहुंचे।
मुख्यमंत्री बनने के बाद आए खुशी के आंसू
जब एक छात्रा ने उनसे पूछा कि जब आपको पता चला कि आप हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए हैं, तो उस समय आपको कैसा महसूस हुआ था? इस पर मुख्यमंत्री सुक्खू ने अपने दिल की बात साझा करते हुए कहा कि उस ऐतिहासिक क्षण में उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े थे, लेकिन वे खुशी के आंसू थे। उन्होंने कहा, "जब किसी साधारण परिवार के व्यक्ति का कोई बड़ा सपना या संघर्ष पूरा होता है, तो आंखों में खुशी के आंसू आना स्वाभाविक है। किसी भी बड़े सपने को सच करने के लिए व्यक्ति को कठिन परिश्रम, अटूट लगन और ईमानदारी के साथ काम करना पड़ता है।"
राजनीति को समाज सेवा के माध्यम के रूप में चुनने के सवाल पर उन्होंने कहा कि समाज की सेवा डॉक्टर या इंजीनियर बनकर भी की जा सकती है, लेकिन राजनीति आपको बड़े पैमाने पर नीतिगत फैसले लेकर लोगों के जीवन को बेहतर बनाने का अवसर देती है। उन्होंने मजाकिया लहजे में यह भी कहा, "एक बार जो व्यक्ति राजनीति में आकर MLA बन जाता है, फिर वह किसी अन्य काम के लायक नहीं रह जाता है।"
पंचायत स्तर के चुनावों में जनप्रतिनिधियों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तय न होने के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके लिए देश के संविधान में बदलाव करने की आवश्यकता होगी। उन्होंने लोकतंत्र की ताकत का जिक्र करते हुए कहा कि अंतिम फैसला जनता के हाथ में होता है और वह अपनी समझ से सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधि चुनती है। उन्होंने गर्व से बताया कि हमारी विधानसभा में आज भी उच्च शिक्षित सदस्य, जिनमें एमबीबीएस डॉक्टर और अनुभवी इंजीनियर शामिल हैं, चुनकर देश सेवा कर रहे हैं।
रचौली स्कूल के लिए 2 करोड़ रुपये की घोषणा और मनपसंद भोजन
इस संवाद कार्यक्रम में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रचौली की एक छात्रा ने भी भाग लिया और मुख्यमंत्री के सामने अपने स्कूल की एक बड़ी समस्या रखी। छात्रा ने बताया कि उनका स्कूल वर्तमान समय में दो अलग-अलग स्थानों पर चल रहा है, जिससे विद्यार्थियों को काफी परेशानी होती है। उसने बताया कि एक स्थान पर नया स्कूल भवन बनाने के लिए पर्याप्त सरकारी भूमि उपलब्ध है, लेकिन बजट की कमी है।
छात्रा की इस वाजिब मांग को सुनते ही मुख्यमंत्री ने तुरंत मंच से ही रचौली स्कूल के नए भवन के निर्माण के लिए 2 करोड़ रुपये देने की बड़ी घोषणा कर दी। मुख्यमंत्री की इस त्वरित घोषणा से स्कूल के बच्चे और शिक्षक खुशी से झूम उठे।
इसी बीच एक छात्र ने हल्के-फुल्के अंदाज में उनके पसंदीदा खाने के बारे में पूछा। मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि उन्हें बाहरी व्यंजनों की तुलना में हिमाचल प्रदेश के स्थानीय और पारंपरिक व्यंजन सबसे ज्यादा पसंद हैं। उन्होंने बताया कि हिमाचल का मशहूर पारंपरिक व्यंजन 'सिड्डू' उनका सबसे पसंदीदा भोजन है।
नशे के खिलाफ जंग: 'एंटी चिट्टा' रैली को दिखाई हरी झंडी
इस संवाद कार्यक्रम के समापन के अवसर पर मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के साथ मिलकर सामाजिक बुराइयों के खिलाफ भी आवाज उठाई। उन्होंने स्कूल परिसर से एक विशाल 'एंटी चिट्टा' (नशा विरोधी) रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस रैली में स्कूल के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया।
विद्यार्थियों ने अपने हाथों में नशे के दुष्प्रभावों और इसके खिलाफ जागरूक करने वाले संदेशों से लिखी तख्तियां और बैनर थामे हुए थे। बच्चों ने पूरी घाटी में नशे के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और लोगों को जागरूक किया। रैली के समापन पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्वयं सभी विद्यार्थियों को जीवन में कभी भी नशे का सेवन न करने और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करने की गंभीर शपथ दिलाई। उन्होंने युवाओं से एक स्वस्थ और नशामुक्त समाज के निर्माण में अपनी सक्रिय और महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की अपील की।
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