नेहरू की गलती का खामियाजा भुगत रहा देश, कांग्रेस के सहयोगी फारूक अब्दुल्ला ने बोला हमला

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को निशाने पर लिया है।

चुनाव आयोग के कामकाज पर उठे सवाल

देशभर में इन दिनों चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर तीखी बहस छिड़ी हुई है। विशेष रूप से SIR अभियान के जरिए मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने और नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया पर विपक्ष ने गंभीर आपत्ति जताई है। इस मसले पर केवल राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने भी इतनी भारी तादाद में नामों को सूची से हटाने पर सवाल खड़े किए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी एकतरफा और मनमाने तरीके से फैसले लेने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

फारूक अब्दुल्ला ने नेहरू को घेरा

इस पूरे विवाद के बीच एक चौंकाने वाला बयान सामने आया है। दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस के पुराने सहयोगी और जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस के समर्थन से सरकार चला रहे नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने इस मामले में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने चुनाव आयोग के मौजूदा हालातों के लिए नेहरू के पुराने फैसलों को आड़े हाथों लिया है।

क्या बोले फारूक अब्दुल्ला

फारूक अब्दुल्ला ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि देश आज जिस स्थिति से गुजर रहा है, वह असल में जवाहरलाल नेहरू की एक बहुत बड़ी गलती का नतीजा है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि नेहरू ने अपने कार्यकाल के दौरान चुनाव आयोग को पूरी तरह से स्वायत्त यानी ऑटोनोमस बना दिया होता, तो आज देश को इस तरह की परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता। उनका मानना है कि संस्थागत ढांचे में उस समय की गई चूक का असर आज भी चुनाव प्रक्रिया पर दिखाई दे रहा है। चुनाव आयोग की निष्पक्षता और कार्यशैली को लेकर यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि यह सीधे तौर पर कांग्रेस के साथ गठबंधन में शामिल एक वरिष्ठ नेता की ओर से आया है।

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