विवाद की शुरुआत: खरगे का बयान
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने हाल ही में कर्नाटक के कलबुर्गी में एक बयान देकर सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। खरगे ने देश में संपन्न हुए सभी चुनावों को अवैध करार दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह के साथ-साथ सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी अवैध बताया। उन्होंने मांग की है कि मौजूदा चुनावी प्रक्रिया को पूरी तरह से दरकिनार कर फिर से चुनाव कराए जाने चाहिए। इतना ही नहीं, कांग्रेस अध्यक्ष का यह भी कहना है कि ये आगामी चुनाव पूरी तरह से बैलेट पेपर के माध्यम से होने चाहिए। वे पिछले कुछ समय से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी लगातार मुखर हैं और उन्हें उनके पद से हटाने की मांग कर रहे हैं।
किरेन रीजीजू ने दागे तीखे सवाल
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने खरगे के इस बयान पर कड़ा रुख अपनाते हुए उनसे सीधे सवाल पूछे हैं। रीजीजू ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों के जरिए खरगे को निशाने पर लिया। उन्होंने पूछा कि यदि देश में सरकारें अवैध हैं, तो क्या खरगे खुद एक अवैध सांसद हैं? उन्होंने राहुल गांधी की संसदीय सदस्यता पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या वे भी अवैध सांसद हैं? इसके अलावा, रीजीजू ने तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों का उल्लेख करते हुए वहां के मुख्यमंत्रियों को भी अवैध कहे जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने खरगे को भारतीय संविधान का सम्मान करने की नसीहत दी है।
भाजपा का तर्क: यह जनादेश का अपमान है
भाजपा के प्रवक्ता और राज्यसभा सदस्य सुधांशु त्रिवेदी ने इस मामले को लेकर कांग्रेस को घेरा है। उन्होंने कहा कि खरगे द्वारा दिया गया बयान न केवल एक राजनीतिक टिप्पणी है, बल्कि यह देश के उन करोड़ों मतदाताओं के जनादेश का अपमान है जिन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से सरकारों को चुना है। त्रिवेदी का कहना है कि चुनाव में जनता द्वारा दिए गए फैसले को सिरे से खारिज करना लोकतंत्र की गरिमा के खिलाफ है, इसलिए कांग्रेस को इस बेबुनियाद बयान के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए।
खुद के चुनाव पर भी घिरे खरगे
सुधांशु त्रिवेदी ने खरगे के कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि जब मल्लिकार्जुन खरगे अध्यक्ष बने थे, तब पार्टी के भीतर ही कई नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया और 'निर्वाचक मंडल की सूची' सार्वजनिक करने की मांग की थी। त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने वह सूची कभी किसी को नहीं दिखाई। इसी मुद्दे को आधार बनाते हुए उन्होंने खरगे से पूछा कि क्या अध्यक्ष पद के लिए आपका अपना चयन वैध था या वह भी अवैध था?
2014 के जनादेश की याद
भाजपा ने अपनी प्रतिक्रिया में वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों का भी जिक्र किया। सुधांशु त्रिवेदी ने याद दिलाया कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने जो पूर्ण बहुमत हासिल किया था, वह देश की एक महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि थी। उन्होंने कहा कि 2014 में ही देश को पहली बार ऐसी गैर-कांग्रेसी सरकार मिली थी जिसे स्पष्ट बहुमत प्राप्त हुआ था। भाजपा ने खरगे के बयान को जनता की इसी शक्ति और लोकतांत्रिक जनादेश को कमतर आंकने की कोशिश करार दिया है।
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