भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्यसभा के आगामी द्विवार्षिक चुनावों और उपचुनावों के लिए अपने उम्मीदवारों की एक नई सूची जारी कर दी है। पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने इस बार बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाले नामों पर अपनी मुहर लगाई है। भाजपा की इस नई रणनीति के तहत पश्चिम बंगाल से बंगाली सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री रुक्मिणी मल्लिक, जिन्हें लोग कोयल मल्लिक के नाम से भी जानते हैं, को उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं दूसरी तरफ, उत्तराखंड की महत्वपूर्ण सीट के लिए पार्टी ने अपने संगठन के बेहद पुराने और अनुभवी नेता दिनेश आर्य पर भरोसा जताया है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में कोयल मल्लिक का नया दांव
पश्चिम बंगाल में होने जा रहे राज्यसभा उपचुनाव के लिए भाजपा ने बड़ा राजनीतिक कार्ड खेला है। पार्टी ने बंगाली फिल्मों की लोकप्रिय अभिनेत्री रुक्मिणी मल्लिक (कोयल मल्लिक) को कमल के चुनाव चिह्न पर चुनावी मैदान में उतारने का फैसला किया है। रुक्मिणी मल्लिक की बंगाली समाज और वहां के सिनेमा जगत में एक बेहद मजबूत पहचान है। उन्हें लोग कोयल के नाम से ज्यादा पहचानते हैं। दिलचस्प बात यह है कि रुक्मिणी मल्लिक पहले तृणमूल कांग्रेस की तरफ से राज्यसभा सदस्य रह चुकी हैं। उन्होंने बीते 16 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद यह सीट खाली हो गई थी। इस सीट पर उनका कार्यकाल 2 अप्रैल 2032 तक प्रस्तावित था। अब उसी खाली हुई सीट को वापस अपने पाले में करने के लिए भाजपा ने उन्हीं पर दांव चला है।
उत्तराखंड से संगठन के दिग्गज दिनेश आर्य को मौका
उत्तराखंड की एकमात्र राज्यसभा सीट के लिए भाजपा ने संगठन के प्रति समर्पित नेता दिनेश आर्य को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। दिनेश आर्य उत्तराखंड की राजनीति में एक जाना-माना नाम हैं और उनका प्रशासनिक और सांगठनिक अनुभव काफी लंबा रहा है। वह वर्तमान में उत्तराखंड के राज्यस्तरीय पेयजल अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जिसे वहां दर्जा राज्यमंत्री का स्थान प्राप्त है। इसके अलावा दिनेश आर्य उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जनसंपर्क अधिकारी के तौर पर भी कार्य कर चुके हैं। भाजपा के भीतर उनकी पकड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह नैनीताल जिले के जिलाध्यक्ष रहने के साथ-साथ भाजपा अनुसूचित मोर्चा के राष्ट्रीय मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। उनके इस लंबे राजनीतिक सफर और समर्पण को देखते हुए पार्टी ने उन्हें देश के उच्च सदन में भेजने का फैसला किया है।
चुनावों का पूरा गणित और सीटों का ब्योरा
देश के अलग-अलग राज्यों में राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होने जा रहे हैं। इसमें उत्तर प्रदेश की 10 सीटें और उत्तराखंड की 1 सीट पर द्विवार्षिक चुनाव कराए जाएंगे। इसके अलावा पश्चिम बंगाल की 1 सीट पर उपचुनाव आयोजित किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुल 11 राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल आगामी नवंबर 2026 में समाप्त होने जा रहा है, जिसकी वजह से इन सीटों पर चुनाव की घोषणा की गई है। चुनाव आयोग द्वारा तय किए गए कार्यक्रम के अनुसार, इन सभी महत्वपूर्ण सीटों पर आने वाली 16 अक्टूबर को मतदान प्रक्रिया संपन्न कराई जाएगी।
राज्यसभा चुनाव की समय-सारणी
भारतीय चुनाव आयोग ने इस चुनावी प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए पूरा शेड्यूल जारी कर दिया है:
- 6 अक्टूबर: उम्मीदवारों द्वारा नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि तय की गई है।
- 7 अक्टूबर: निर्वाचन अधिकारियों द्वारा दाखिल किए गए नामांकन पत्रों की बारीकी से जांच की जाएगी।
- 9 अक्टूबर: योग्य उम्मीदवार आगामी शुक्रवार तक अपना नामांकन पत्र वापस ले सकेंगे।
- 16 अक्टूबर: सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा। इसके तुरंत बाद, उसी दिन शाम 5 बजे से वोटों की गिनती का काम शुरू हो जाएगा।
- 19 अक्टूबर: चुनाव की इस पूरी प्रक्रिया को हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा।
मतदान के विशेष नियम और सुरक्षा व्यवस्था
चुनाव आयोग ने इस बार मतदान को लेकर एक बेहद सख्त और खास नियम भी जारी किया है। मतदान के समय मतपत्र (बैलेट पेपर) पर अपनी पसंद दर्ज करने के लिए विधायकों को केवल निर्वाचन अधिकारी (रिटर्निंग ऑफिसर) द्वारा दिए गए विशेष इंटीग्रेटेड वॉयलेट कलर के स्केच पेन का ही प्रयोग करना होगा। किसी भी अन्य पेन, पेंसिल या स्याही से डाला गया वोट पूरी तरह से अवैध घोषित कर दिया जाएगा। इसके साथ ही, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि संपूर्ण मतदान प्रक्रिया को पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए विशेष पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की जाएगी, जो पूरी चुनावी कार्यवाही पर पैनी नजर रखेंगे।
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