पाकिस्तान की राजनीति में गहराया संकट
पाकिस्तान में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव एक बार फिर चरम पर पहुंच चुका है। शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली सरकार और जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी पीटीआई के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन कोई भी नतीजा नहीं निकल सका। सरकारी पक्ष और पीटीआई के प्रतिनिधि किसी भी बिंदु पर आम सहमति बनाने में नाकाम रहे हैं। इस बातचीत के विफल होने के बाद, पीटीआई ने अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 4 अक्टूबर यानी आज से इस्लामाबाद की ओर अपना विरोध मार्च निकालने का ऐलान कर दिया है। सरकार की ओर से मार्च वापस लेने की शर्त रखी गई थी, जिसे विपक्षी पार्टी ने सिरे से खारिज कर दिया है।
बातचीत में क्यों आई रुकावट?
सरकार और पीटीआई के बीच केवल मार्च को लेकर ही खींचतान नहीं है, बल्कि कई अन्य मुद्दे भी इस दरार को बढ़ा रहे हैं। पीटीआई की मुख्य मांग है कि उनके पार्टी नेताओं को जेल में बंद इमरान खान से सीधे मिलने की अनुमति दी जाए। इसके अलावा, उनकी बहनों की रिहाई का मुद्दा भी बातचीत की मेज पर प्रमुखता से बना हुआ है। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि जब तक पीटीआई अपना इस्लामाबाद मार्च रद्द नहीं करती, तब तक किसी भी राजनीतिक रियायत या बातचीत को आगे बढ़ाने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
एक और महत्वपूर्ण पेच खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवाद के खिलाफ अपनाई जाने वाली रणनीति को लेकर फंसा है। केंद्र सरकार वहां एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू करना चाहती है और चाहती है कि प्रांतीय सरकार इसमें पूरा सहयोग करे। हालांकि, पीटीआई ने केंद्र के इस एक्शन प्लान पर अपनी सहमति नहीं जताई है। सरकार ने स्पष्ट लहजे में चेतावनी दी है कि यदि खैबर पख्तूनख्वा की सरकार आतंकवाद विरोधी अभियानों में सहयोग नहीं करती है, तो भविष्य में किसी भी तरह की राजनीतिक बातचीत या सुलह की संभावना पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
पीटीआई का मार्च और रूट प्लान
बातचीत बेनतीजा रहने के बाद पीटीआई ने अपने प्रदर्शन को लेकर सख्त रुख अपना लिया है। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने जानकारी दी है कि मार्च का आगाज 4 अक्टूबर को लक्की मरवत के गांधी चौक से होगा। पीटीआई ने इस विरोध प्रदर्शन के लिए कुल पांच दिनों का रूट चार्ट तैयार किया है।
- यह मार्च 8 अक्टूबर को खैराबाद पहुंचकर संपन्न होगा।
- अपने इस सफर के दौरान प्रदर्शनकारी टैंक, डेरा इस्माइल खान, बन्नू, करक, कोहाट, पेशावर और चरसद्दा जैसे अहम इलाकों से होकर गुजरेंगे।
- सोहेल अफरीदी ने दावा किया है कि 8 अक्टूबर तक पूरा प्रांत खैराबाद में एकजुट हो जाएगा, जहां मार्च के अगले चरण की घोषणा की जाएगी।
गौर करने वाली बात यह है कि पीटीआई ने पहले अपना यह लंबा मार्च 27 सितंबर के लिए प्रस्तावित किया था, जिसे बाद में टालकर 4 अक्टूबर कर दिया गया था। अब सरकार के साथ आखिरी दौर की बातचीत विफल होने के बाद पार्टी ने इसे और अधिक आक्रामक तरीके से आगे ले जाने का निर्णय लिया है।
नेताओं और बहनों की रिहाई की मांग
पीटीआई नेता हलीम आदिल शेख का कहना है कि उनकी पार्टी सरकार के साथ सकारात्मक भावना के साथ चर्चा करने को तैयार है, लेकिन सरकार को भी अपना रुख नरम करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर सरकार इमरान खान की बहनों—जिन्हें पिछले महीने गिरफ्तार किया गया था—की रिहाई समेत अन्य मांगों पर लचीलापन दिखाती है, तो समाधान निकल सकता है। पार्टी का स्पष्ट संदेश है कि जब तक इमरान खान तक उनकी पहुंच बहाल नहीं की जाती और उनकी बहनों को रिहा नहीं किया जाता, तब तक प्रदर्शन का दबाव जारी रहेगा। सरकार और विपक्ष के बीच की यह तनातनी पाकिस्तान के राजनीतिक और सुरक्षा हालातों को और अधिक अनिश्चित बना रही है।
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