गाजर घास का बढ़ता खतरा: एक पौधा छोड़ रहा 25 हजार बीज, खेती और सेहत पर मंडराया संकट

सीकर में गाजर घास का तेजी से बढ़ता फैलाव न केवल फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि इंसानी सेहत के लिए भी गंभीर चुनौती बन चुका है।

फसलों के लिए घातक गाजर घास

सीकर जिले में गाजर घास का प्रकोप तेजी से बढ़ता जा रहा है, जो कृषि और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए चिंता का विषय बन गया है। कृषि जानकारों के मुताबिक, अमेरिका से आई यह घास बहुत तेजी से फैलती है। एक एकल गाजर घास का पौधा एक साल की अवधि में 25 हजार तक बीज पैदा करने की क्षमता रखता है। इस बेतहाशा विस्तार के कारण खेतों में फसलों का उत्पादन 40% तक गिर सकता है, जिससे किसानों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है।

स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, गाजर घास सिर्फ जमीन की उर्वरता ही नष्ट नहीं करती, बल्कि इंसानों के लिए भी खतरनाक है। डॉ. अभिलाषा रणवा ने चेतावनी दी है कि इस घास के सीधे संपर्क में आने से त्वचा से जुड़ी गंभीर बीमारियां होने का खतरा रहता है। इतना ही नहीं, यह सांस संबंधी समस्याओं और दमा जैसी बीमारियों को भी बढ़ावा दे सकती है।

बचाव और नियंत्रण के उपाय

कृषि विशेषज्ञ दिनेश जाखड़ और रामचंद्र बाजिया ने इस खरपतवार को जड़ से खत्म करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं:

  • पौधों में फूल आने से पहले ही इन्हें नष्ट कर देना सबसे कारगर उपाय है।
  • घास को उखाड़ते समय सुरक्षा के लिए हाथों में दस्ताने जरूर पहनने चाहिए।
  • सामूहिक स्तर पर प्रयास किए जाने की जरूरत है ताकि इसका फैलाव रोका जा सके।
  • पंचायत स्तर पर विशेष सफाई अभियान चलाकर इसे सरकारी और खाली पड़ी जमीनों से हटाया जाना चाहिए।

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