पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की वायुसेना द्वारा पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमानों को हासिल करने और उसके पायलटों की ट्रेनिंग शुरू करने की खबरों के बीच भारतीय वायुसेना पूरी तरह मुस्तैद है। इस संवेदनशील सामरिक घटनाक्रम पर भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने एक बड़ा और बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि सीमा पार इस तरह की अत्याधुनिक सैन्य तकनीक का पहुंचना भारत के लिए निश्चित रूप से एक चिंता का विषय है। खासकर तब, जब पाकिस्तानी पायलटों ने इन विमानों के लिए अपनी ट्रेनिंग भी शुरू कर दी हो।
युद्ध की रणनीति और सिस्टम इंटीग्रेशन पर जोर
वायुसेना प्रमुख ने देशवासियों और रणनीतिकारों को आश्वस्त करते हुए कहा कि भारत के पास इस नए खतरे से निपटने के लिए पर्याप्त क्षमताएं और पुख्ता रणनीति मौजूद हैं। उन्होंने युद्ध के आधुनिक स्वरूप को रेखांकित करते हुए कहा कि आज की जंग में केवल कोई एक एडवांस एयरक्राफ्ट या प्लेटफॉर्म अकेले मुकाबला तय नहीं करता। असल महत्व इस बात का होता है कि उस लड़ाकू विमान या तकनीक को हमारे समूचे सैन्य और डिफेंस सिस्टम के साथ कितनी बारीकी और कुशलता के साथ इंटीग्रेट यानी एकीकृत किया गया है। भारत की वायुसेना इस मामले में बेहद मजबूत स्थिति में है और अपनी रक्षा प्रणाली को लगातार अपडेट कर रही है।
स्वदेशी AMCA कार्यक्रम में रफ्तार लाना आवश्यक
भविष्य के हवाई संतुलन और आसमान में भारत की सामरिक बढ़त को हर हाल में सुरक्षित रखने के लिए एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने भारत के अपने स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट यानी AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) पर बड़ा अपडेट दिया। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत को अपने स्वदेशी कार्यक्रम की रफ्तार को काफी तेज करना होगा। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए AMCA प्रोजेक्ट का समय पर पूरा होना भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
वैकल्पिक रास्ते और विदेशी विमानों की खरीद का विकल्प
वायुसेना प्रमुख ने सुरक्षा से समझौता न करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए साफ शब्दों में कहा कि यदि हमारे स्वदेशी प्रोजेक्ट के निर्माण में किसी भी तरह का विलंब या देरी होती है, तो वायुसेना को कड़ा रुख अपनाना होगा। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि ऐसी स्थिति में भारत को अपनी तात्कालिक ऑपरेशनल जरूरतों को पूरा करने के लिए तुरंत वैकल्पिक रास्तों पर विचार करना होगा। आसमान में सामरिक बढ़त हमेशा भारत के पक्ष में बनी रहे, इसके लिए जरूरत पड़ने पर विदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को खरीदने का फैसला भी जल्द से जल्द लिया जा सकता है।
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