OECD रिपोर्ट: चीनी कंपनियों के मुकाबले भारतीय कंपनियों को मिली कहीं कम सरकारी मदद, सामने आए कई अहम तथ्य

आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार 2005 से 2024 के बीच भारतीय कंपनियों को चीनी कंपनियों की तुलना में बेहद कम सरकारी सहायता मिली। रिपोर्ट में औद्योगिक सब्सिडी, कर रियायतों और सस्ते कर्ज के आधार पर दुनिया की बड़ी विनिर्माण कंपनियों का आकलन किया गया है।

भारतीय कंपनियों को वर्ष 2005 से 2024 के बीच चीन की कंपनियों के मुकाबले कहीं कम सरकारी सहायता मिली है। यह तथ्य आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) की एक रिपोर्ट में उजागर हुआ है। 'ओईसीडी मैजिक डेटाबेस ऑफ इंडस्ट्रियल सब्सिडीज' इस बात का आकलन करता है कि कंपनियों के हाथ वास्तव में कितनी मदद पहुँचती है। इसमें 2005-24 की अवधि में 15 प्रमुख क्षेत्रों की दुनिया की 525 सबसे बड़ी विनिर्माण कंपनियों को परखा गया है। यह आकलन सब्सिडी, आयकर रियायतों तथा बाजार दर से कम ब्याज पर मिलने वाले ऋण — इन तीन माध्यमों के जरिए किया गया।

चीनी कंपनियों को औसतन 3 से 8 गुना अधिक मदद

रिपोर्ट के मुताबिक 2005 और 2024 के बीच चीनी कंपनियों को ओईसीडी देशों में मौजूद कंपनियों की तुलना में औसतन 3 से 8 गुना अधिक सरकारी सहायता प्राप्त हुई, और इसे एक न्यूनतम अनुमान बताया गया है। यह मदद ब्राजील, भारत और इंडोनेशिया जैसी नॉन-ओईसीडी अर्थव्यवस्थाओं की कंपनियों को मिली सहायता से भी काफी ज्यादा रही। उल्लेखनीय है कि ओईसीडी एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसमें मुख्य रूप से 38 विकसित अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। यह संगठन अपने सदस्य देशों के बीच आर्थिक वृद्धि, व्यापार, निवेश और नीतिगत समन्वय को आगे बढ़ाने का काम करता है। इसके सदस्यों में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी, फ्रांस, इटली, जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश शामिल हैं।

बाजार हिस्सेदारी में 60 प्रतिशत बढ़ोतरी का नाता सरकारी मदद से

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 2005 से 2023 के बीच आगे बढ़ने वाली कंपनियों की वैश्विक बाजार हिस्सेदारी में हुई वृद्धि का लगभग 22 प्रतिशत हिस्सा उन्हें मिली सब्सिडी की देन है। चीनी कंपनियों के संदर्भ में देखें तो उनकी वैश्विक बाजार हिस्सेदारी में हुई करीब 60 प्रतिशत बढ़ोतरी को उन्हें प्राप्त सरकारी सहायता से जोड़कर देखा जा सकता है।

वैश्विक बाजारों में घटा भरोसा

रिपोर्ट के अनुसार सब्सिडी की जानकारी साझा न करने वाले विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सदस्य देशों की संख्या 1995 में 26 थी, जो 2025 में बढ़कर 117 तक पहुँच गई है। प्रतिशत के लिहाज से यह आंकड़ा 23 प्रतिशत से बढ़कर 70 प्रतिशत हो गया है, जिसके चलते वैश्विक बाजारों में पारदर्शिता को लेकर भरोसा कमजोर हुआ है। गौरतलब है कि भारत स्टील, सीमेंट, फर्टिलाइजर, भारी मशीनरी और ग्लास/सिरेमिक जैसे अनेक क्षेत्रों में एक अहम भागीदार भी है।

https://www.indiatv.in/paisa/business/indian-companies-received-significantly-less-government-support-compared-to-chinese-companies-oecd-report-reveals-several-key-findings-2026-06-07-1223551