डिमेंशिया के जोखिम को कम करने में पैदल चलने की भूमिका
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, याददाश्त का कम होना और बातों को भूल जाना एक आम समस्या के रूप में सामने आता है। ऐसे में डिमेंशिया का डर लोगों को अक्सर परेशान करता है। यथार्थ हॉस्पिटल में न्यूरोलॉजी विभाग के चेयरमैन और ग्रुप डायरेक्टर, डॉक्टर कुणाल बहलानी का मानना है कि डिमेंशिया जैसी जटिल समस्या से बचाव के लिए आपको किसी कठिन व्यायाम की जरूरत नहीं है, बस पैदल चलना ही काफी है। उनके अनुसार, आपको केवल आरामदायक जूते पहनकर घर से बाहर कदम निकालने और नियमित रूप से टहलने की आदत डालने की जरूरत है। आइए जानते हैं कि एक सक्रिय जीवनशैली हमारे मस्तिष्क की रक्षा कैसे करती है।
टहलने से मस्तिष्क पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव
पैदल चलना भले ही एक सामान्य शारीरिक गतिविधि लगे, लेकिन हमारा दिमाग इसे एक महत्वपूर्ण कार्य की तरह देखता है। जब हम टहलना शुरू करते हैं, तो हमारे दिल की धड़कन बढ़ जाती है, जिससे मस्तिष्क तक ऑक्सीजन युक्त रक्त का प्रवाह तेजी से होता है। यह रक्त संचार केवल पोषण ही नहीं पहुंचाता, बल्कि एक ट्रिगर की तरह कार्य करता है। यह मस्तिष्क को 'ब्रेन-डिराइव्ड न्यूरोट्रोफिक फैक्टर' नामक एक महत्वपूर्ण प्रोटीन के उत्पादन का निर्देश देता है। यह प्रोटीन मस्तिष्क की पुरानी कोशिकाओं को सुरक्षित रखने, मामूली क्षति की मरम्मत करने और बढ़ती उम्र के बावजूद दिमाग को नई चीजें सीखने के लिए लचीला बनाए रखने में मदद करता है।
याददाश्त के केंद्र हिप्पोकैम्पस की रक्षा
अल्जाइमर जैसी स्मृति संबंधी बीमारियों का सबसे अधिक असर मस्तिष्क के एक छोटे लेकिन महत्वपूर्ण हिस्से पर पड़ता है, जिसे हिप्पोकैम्पस कहा जाता है। यह हिस्सा हमारी यादों को संजोने और नई चीजें सीखने में प्रमुख भूमिका निभाता है। यदि आप अपनी दिनचर्या में ज्यादा समय बैठकर बिताते हैं, तो यह हिस्सा वक्त के साथ सिकुड़ने लगता है, जो निष्क्रिय जीवनशैली का एक बुरा परिणाम है। हालांकि, नियमित रूप से सक्रिय रहने और चलने-फिरने से इस प्रक्रिया को बदला जा सकता है। विभिन्न एमआरआई स्कैन से यह स्पष्ट हुआ है कि जो लोग नियमित रूप से टहलते हैं, वे मस्तिष्क की इस स्वाभाविक सिकुड़न की गति को काफी धीमा कर सकते हैं या इसे पूरी तरह रोक भी सकते हैं। इससे याददाश्त का केंद्र मजबूत बना रहता है। साथ ही, शरीर को गति में रखने से रक्त वाहिकाएं लचीली होती हैं और शरीर की सूजन में कमी आती है, जो मानसिक गिरावट के बड़े कारक माने जाते हैं।
दैनिक दिनचर्या में वॉक को कैसे शामिल करें
डॉक्टर कुणाल बहलानी के अनुसार, टहलने के लिए समय का बंधन जरूरी नहीं है। आप अपनी सुविधा के अनुसार दिन का कोई भी हिस्सा चुन सकते हैं, चाहे वह नाश्ते के बाद की 20 मिनट की सैर हो या काम के बाद शांति पाने के लिए की गई वॉक। चलने की गति ऐसी होनी चाहिए जिसमें आपकी सांस थोड़ी तेज हो, लेकिन आप बातचीत करने में सक्षम रहें। यदि संभव हो, तो हरियाली या पार्क वाले रास्तों को चुनें। प्राकृतिक रोशनी और पेड़-पौधे तनाव पैदा करने वाले हार्मोन को नियंत्रित करते हैं, जिससे तंत्रिका तंत्र पर पड़ने वाला दबाव कम हो जाता है। इसके अलावा, नियमित फिजियोथेरेपी भी हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसे खतरों को कम करने में सहायक हो सकती है और बिना दवा के दर्द का प्रभावी उपचार प्रदान कर सकती है।
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