कैप्टन स्मित मच्छार की रिकवरी पर सबकी नजर
174 निर्दोष जिंदगियों को मौत के मुंह से खींचकर वापस लाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी के चर्चे इस वक्त पूरी दुनिया में हैं। यदि कैप्टन स्मित ने उस नाजुक घड़ी में साहस नहीं दिखाया होता, तो शायद इतिहास में एक और 9/11 जैसा दर्दनाक मंजर दर्ज हो जाता। आज दुनिया भर से लोग उनके जज्बे को सलाम कर रहे हैं। इस बीच, संयुक्त अरब अमीरात में तैनात भारत के राजदूत दीपक मित्तल ने उस अस्पताल का दौरा किया, जहां कैप्टन मच्छार इलाज करा रहे हैं। राजदूत ने वहां न केवल कैप्टन स्मित का कुशलक्षेम जाना, बल्कि उनके परिवार से भी मुलाकात की।
भारतीय राजदूत और दूतावास की पहल
यूएई में भारतीय दूतावास ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से इस मुलाकात की पुष्टि की। दूतावास के अनुसार, राजदूत दीपक मित्तल ने अस्पताल में कैप्टन स्मित मच्छार और उनके परिवार से विस्तार से बात की। जानकारी दी गई है कि कैप्टन की सेहत अब स्थिर है और वे तेजी से रिकवरी की ओर बढ़ रहे हैं। भारतीय दूतावास लगातार स्थानीय प्रशासनिक और चिकित्सा अधिकारियों के संपर्क में है ताकि कैप्टन मच्छार को हर संभव बेहतरीन उपचार मिल सके। उल्लेखनीय है कि कैप्टन स्मित मच्छार की इस वीरतापूर्ण कार्य के बाद गुजरात सरकार ने भी उन्हें सम्मानित करने का ऐलान किया है, जिससे पूरे देश में गर्व की लहर है।
घटना की टाइमलाइन: कैसे टला बड़ा हादसा
फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ-1073 के साथ घटी इस भयावह घटना को समझने के लिए इसकी टाइमलाइन पर गौर करना आवश्यक है। भारतीय समयानुसार सुबह 8 बजकर 35 मिनट पर इस विमान ने 174 यात्रियों के साथ दुबई से उड़ान भरी थी। इस फ्लाइट में सवार अधिकांश यात्री इजरायल के नागरिक थे। करीब सवा दो घंटे की सामान्य उड़ान के बाद, जब विमान सऊदी अरब और जॉर्डन की सीमा के ऊपर 34 हजार फीट की ऊंचाई पर 730 मील प्रति घंटे की गति से उड़ रहा था, तब खौफनाक वारदात शुरू हुई। सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर को-पायलट ने कॉकपिट में मौजूद क्रैश एक्स (आपातकालीन स्थिति में खिड़की तोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाली छोटी कुल्हाड़ी) से कैप्टन स्मित पर हमला कर दिया।
मौत के साये में जांबाजी
हमले में कैप्टन स्मित के सीने, सिर और पीठ पर गंभीर चोटें आईं। खून से लथपथ होने के बावजूद कैप्टन ने हिम्मत नहीं हारी। सुबह 10 बजकर 52 मिनट पर, जैसे ही हमलावर को-पायलट ने विमान के सिस्टम को नष्ट करने की कोशिश की, कैप्टन स्मित ने अपनी अंतिम ऊर्जा जुटाकर ATC को इमरजेंसी कोड भेजा। संघर्ष जारी रखते हुए उन्होंने 11 बजकर 8 मिनट पर हाइजैकिंग का अलर्ट भी प्रसारित कर दिया।
30 सेकंड का वो खौफनाक मंजर
को-पायलट ने विमान का नोज नीचे कर दिया था, जिसके कारण मात्र 30 सेकंड में विमान 14 हजार फीट नीचे गिर गया। विमान के भीतर चीख-पुकार मच गई। उसी समय कैप्टन स्मित ने अपनी सीट के पास स्थित बटन दबाकर कॉकपिट का दरवाजा खोला। अंदर का खौफनाक दृश्य देखकर यात्रियों की रूह कांप गई। कैप्टन का अत्यधिक रक्त बह चुका था, लेकिन उन्होंने यात्रियों की सुरक्षा को अपनी जान से ऊपर रखा।
यात्री की सूझबूझ और चमत्कारिक बचाव
इस बीच, विमान में सवार यानिव नाम के एक इजरायली यात्री ने असाधारण साहस दिखाया। पेशे से प्लंबर यानिव ने देखा कि विमान कुछ ही सेकंड में जमीन से टकराने वाला है। वह कॉकपिट की ओर दौड़ा, हमलावर को-पायलट को धक्का देकर अलग किया और कंट्रोलर को अपनी ओर खींचा। विमान दुर्घटनाओं पर आधारित एक सीरीज देखने के अपने अनुभव को काम में लाते हुए उसने विमान की दिशा को ऊपर की ओर मोड़ने में सफलता हासिल की। यानिव की इस सूझबूझ से विमान स्टेबल हो गया और मौत का खतरा टल गया। विमान में मौजूद एक डॉक्टर ने तत्काल कैप्टन स्मित को प्राथमिक उपचार दिया और ऑक्सीजन मास्क लगाया, जबकि अन्य यात्रियों ने मिलकर हमलावर को-पायलट को काबू कर लिया। आज कैप्टन स्मित मच्छार की रिकवरी के लिए दुनिया भर से दुआएं भेजी जा रही हैं।
https://www.indiatv.in/world/asia/captain-smit-machhar-health-update-indian-ambassador-deepak-mittal-visits-uae-hospital-2026-10-01-1246480