उज्जैन में गरबा आयोजनों को लेकर गर्माया माहौल
मध्य प्रदेश का उज्जैन शहर इन दिनों नवरात्रि से जुड़े आयोजनों को लेकर चर्चाओं में है। शहर में गरबा और डांडिया के कार्यक्रमों का आयोजन भव्य स्तर पर किए जाने की योजना है, लेकिन इस बार इन आयोजनों के स्वरूप को लेकर विवाद की स्थिति पैदा हो गई है। खास तौर पर उन कार्यक्रमों का विरोध किया जा रहा है जिनमें टिकट या शुल्क लेकर प्रवेश दिया जा रहा है। हिंदू जागरण मंच ने इन व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए अपनी मुहिम शुरू कर दी है। बुधवार की रात को संगठन के कार्यकर्ताओं ने एक स्पॉन्सर प्रतिष्ठान पर पहुंचकर जमकर हंगामा किया और पेड गरबा न कराने की सीधी चेतावनी दी।
शुभ बेकरी में हुई नोकझोंक और तोड़फोड़
विरोध का मुख्य केंद्र शहर की तीन बत्ती स्थित शुभ बेकरी बनी। संगठन का दावा है कि यह प्रतिष्ठान 13 से 15 अक्टूबर के बीच आयोजित होने वाले डांडिया बीट्स नामक कार्यक्रम को प्रायोजित कर रहा है। यह कार्यक्रम राजराम रिसोर्ट में प्रस्तावित है। हिंदू जागरण मंच की महिला विंग और कार्यकर्ताओं का आरोप है कि बेकरी द्वारा अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से कार्यक्रम के पास बेचने का प्रचार किया जा रहा था और दुकान पर पोस्टर भी लगाए गए थे। जब कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे, तो उन्होंने संचालक को चेतावनी दी कि उज्जैन की संस्कृति में ऐसे व्यावसायिक आयोजन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच करीब 15 मिनट तक तीखी बहस हुई और अंत में कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जाहिर करते हुए वहां लगे पोस्टर और बैनर फाड़ दिए।
धार्मिक भावनाओं का दिया हवाला
हिंदूवादी नेता अर्जुन सिंह भदौरिया ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नवरात्रि का पर्व पूर्णतः धार्मिक और सात्विक वातावरण में मनाया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि गरबा के नाम पर होने वाले ऐसे आयोजन, जिनमें प्रवेश शुल्क लिया जाता है, वहां अक्सर अश्लीलता फैलने का खतरा रहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए उज्जैन में किसी भी प्रकार के पेड इवेंट को अनुमति नहीं दी जाएगी।
क्या है गरबा की पूरी पृष्ठभूमि
उज्जैन में इस साल नवरात्रि का महापर्व 11 से 20 अक्टूबर के बीच मनाया जाएगा। इस दौरान शहर के अलग-अलग इलाकों में गरबा और डांडिया के कई आयोजन करने की तैयारियां लंबे समय से चल रही हैं। आयोजक बड़ी संख्या में युवा पीढ़ी और परिवारों को जोड़ने के लिए व्यापक स्तर पर प्रचार कर रहे हैं। हालांकि, शुल्क देकर प्रवेश देने वाली व्यवस्था को लेकर हिंदू संगठनों की नाराजगी ने आयोजन समिति और प्रायोजकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इस पूरी घटना के बाद से स्थानीय स्तर पर गरबा कार्यक्रमों को लेकर तनाव बढ़ गया है और प्रशासन भी स्थिति पर अपनी नजर बनाए हुए है। फिलहाल, नवरात्रि शुरू होने से पहले इस तरह के विरोध प्रदर्शनों ने शहर के उत्सव के माहौल में एक अलग बहस को जन्म दे दिया है।
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