व्यापारिक कूटनीति का नया अध्याय
भारत और अमेरिका के बीच एक बड़े व्यापारिक समझौते को लेकर जारी कवायद के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल इस समय व्यापारिक मुद्दों पर चर्चा के लिए अमेरिका की यात्रा पर हैं। इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच टेलीफोन पर विस्तृत बातचीत हुई है। यह संवाद इसलिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसके तुरंत बाद पीयूष गोयल अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के साथ बैठक करने वाले हैं। इस मुलाकात को ट्रेड डील को लेकर अंतिम निर्णय लेने की दिशा में निर्णायक माना जा रहा है।
पीएम मोदी और ट्रंप की सार्थक चर्चा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस बातचीत के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उनकी बातचीत काफी फलदायी रही है। दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा क्षेत्र, ऊर्जा सुरक्षा, अहम टेक्नोलॉजी और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की। प्रधानमंत्री ने साझा किया कि वे दोनों देश अपनी व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाने के लिए लगातार संपर्क में रहने पर सहमत हुए हैं। इसके अलावा, वैश्विक शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी प्रयासों सहित अन्य मुद्दों पर भी विचार साझा किए गए हैं।
पीयूष गोयल का अमेरिकी मिशन और व्यापारिक प्राथमिकताएं
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल 29 सितंबर से 5 अक्टूबर तक अमेरिका की यात्रा पर हैं। उनके इस दौरे का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच एक संतुलित और परस्पर लाभकारी व्यापारिक समझौते का मार्ग प्रशस्त करना है। अपने दौरे के आरंभ में पीयूष गोयल मिलवाउकी पहुंचे, जहाँ उन्होंने 'नेशनल एसोसिएशन ऑफ मैन्युफैक्चरर्स' द्वारा आयोजित एक गोलमेज बैठक में भाग लिया। इस सत्र में अमेरिका की दिग्गज मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और शीर्ष प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। गोयल ने वहां मौजूद अमेरिकी निवेशकों को भारत के तेजी से विकसित होते बाजार और वहां निवेश के अपार अवसरों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
ट्रेड डील की असली चाबी और जेमिसन ग्रीर की भूमिका
पीयूष गोयल विस्कॉन्सिन में आयोजित G20 ट्रेड मिनिस्टर्स की बैठक में भी शिरकत कर रहे हैं, जिसके लिए उन्हें विशेष रूप से अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने आमंत्रित किया था। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जेमिसन ग्रीर ही वह प्रमुख अधिकारी हैं जिनके पास भारत-अमेरिका ट्रेड डील के निर्णयों की मुख्य कमान है। गोयल और ग्रीर के बीच होने वाली उच्च स्तरीय बैठक में भारत मुख्य रूप से एक अंतरिम व्यापार समझौते पर जोर दे रहा है। भारत का प्रयास है कि एक व्यापक और स्थायी समझौते के पहले कुछ संवेदनशील व्यापारिक मसलों पर अंतरिम सहमति बन जाए, जिससे भारतीय निर्यातकों को तुरंत राहत प्राप्त हो सके।
रूस का तेल और टैरिफ से जुड़ा पेच
पिछले कई महीनों से भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर वार्ता जारी है, लेकिन अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है। इसका मुख्य कारण भारत की यह कोशिश है कि वह अपने आर्थिक हितों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए बेहतर शर्तें प्राप्त करे। हाल ही में दोनों देशों के बीच तब कुछ तनाव देखा गया था जब अमेरिका ने रूस से भारत द्वारा कच्चा तेल खरीदे जाने पर कड़ा ऐतराज जताया था। अमेरिका की ओर से चेतावनी दी गई थी कि यदि भारत रूस से तेल खरीद जारी रखता है, तो उस पर अतिरिक्त टैरिफ या आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। हालांकि, भारत ने इस मामले में बहुत स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया। भारत ने वाशिंगटन को यह स्पष्ट संदेश दिया था कि रूस से तेल की खरीद भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा एक अनिवार्य विषय है और यदि रूस के साथ व्यापार के कारण भारत पर कोई नया टैरिफ लगाया जाता है, तो यह दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
क्या टैरिफ से राहत मिलने की उम्मीद है?
अब जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सीधे संवाद किया है और पीयूष गोयल वाशिंगटन में अमेरिकी अधिकारियों के साथ वार्ता की मेज पर बैठे हैं, तो कूटनीतिक गलियारों में एक नई उम्मीद जगी है। जानकारों का मानना है कि दोनों देश जल्द ही किसी मध्य मार्ग पर सहमति बना सकते हैं। जहां अमेरिका के लिए भारत एक रणनीतिक साझेदार है, वहीं अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बना हुआ है। इन परिस्थितियों को देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि रूस के तेल और टैरिफ जैसे विवादित विषयों के बावजूद दोनों पक्ष जल्द ही एक अंतरिम व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो भारतीय कारोबारियों को टैक्स के मोर्चे पर बड़ी राहत मिल सकती है, जिससे द्विपक्षीय व्यापार का ग्राफ और ऊपर जा सकता है।
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