उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों राज्यसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां सातवें आसमान पर हैं। राज्य की 10 राज्यसभा सीटों पर होने वाले इस चुनाव से पहले राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर जारी है। इसी बीच, कैसरगंज से पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के एक ताजा बयान ने उत्तर प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है। मीडिया से बातचीत के दौरान उनके इस बयान के बाद यह अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या समाजवादी पार्टी उन्हें अपने तीसरे उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा भेज सकती है।
बृजभूषण शरण सिंह का बयान और अखिलेश की तारीफ
दरअसल, जब मीडियाकर्मियों ने कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह से सवाल किया कि कांग्रेस पार्टी आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी से 150 से अधिक सीटों की मांग कर रही है, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया। बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव के बिना सब सूना है। उनके इस एक वाक्य ने यूपी की राजनीति में बड़ी हलचल पैदा कर दी है। राजनीतिक विश्लेषक इस बयान के गहरे मायने निकाल रहे हैं और इसे समाजवादी पार्टी तथा बृजभूषण के बीच बढ़ती नजदीकियों से जोड़कर देख रहे हैं।
तीसरे उम्मीदवार पर सस्पेंस और क्रॉस वोटिंग की आशंका
उत्तर प्रदेश विधानसभा में विधायकों की संख्या के हिसाब से समाजवादी पार्टी ने अब तक अपने दो उम्मीदवारों, रामगोपाल यादव और धनराज नथवानी का नामांकन कराया है। दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी अपने 8 उम्मीदवारों की सूची जारी करने की तैयारी में है। लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि समाजवादी पार्टी एक तीसरा उम्मीदवार भी मैदान में उतार सकती है।
जैसे ही सपा द्वारा तीसरे उम्मीदवार को उतारने की सुगबुगाहट तेज हुई, बीजेपी की ओर से भी जवाबी रणनीति तैयार कर ली गई। बीजेपी ने साफ कर दिया है कि अगर सपा ने अपना तीसरा प्रत्याशी उतारा, तो वे भी अपना 9वां उम्मीदवार मैदान में उतारेंगे। ऐसी स्थिति में दोनों ही दलों के बीच क्रॉस वोटिंग की संभावनाएं काफी बढ़ जाएंगी, जो इस चुनावी मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना देगी।
25 नवंबर को खाली हो रही हैं सीटें
उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के 9 सदस्यों का कार्यकाल आगामी 25 नवंबर को समाप्त होने जा रहा है, जिसके कारण ये चुनाव कराए जा रहे हैं। जिन सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उनमें निम्नलिखित प्रमुख नाम शामिल हैं:
- केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी
- केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा
- भाजपा नेता अरुण सिंह
- भाजपा नेता गीता शाक्य
- भाजपा नेता नीरज शेखर
- भाजपा नेता बृजलाल
- भाजपा नेता सीमा द्विवेदी
- सपा नेता रामगोपाल यादव
- बसपा नेता रामजी गौतम
इनमें से केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा को मोदी सरकार में मंत्री पद पर बने रहने के लिए संसद के इस उच्च सदन में दोबारा निर्वाचित होना बेहद जरूरी है।
10वीं सीट का समीकरण और दलीय स्थिति
इस चुनाव में 10वीं सीट पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा के इस्तीफे के कारण खाली हुई है। दिनेश शर्मा को अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया था, जिसके बाद उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।
वर्तमान में उत्तर प्रदेश विधानसभा के संख्या-बल और गणित पर नजर डालें तो:
- बीजेपी के नेतृत्व वाला सत्तारूढ़ गठबंधन आसानी से 8 राज्यसभा सीटें जीतने की मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहा है।
- दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी कांग्रेस के समर्थन से अपनी 2 सीटें सुरक्षित रूप से जीत सकती है।
लेकिन अगर समाजवादी पार्टी अपने तीसरे उम्मीदवार के रूप में बृजभूषण शरण सिंह या किसी अन्य चेहरे को उतारती है, तो चुनाव का पूरा गणित बदल जाएगा और उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया समीकरण देखने को मिलेगा।
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