लैंड फॉर जॉब घोटाला: अमित कात्याल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फिर होगी बहस, 14 अक्टूबर को राऊज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई

नौकरी के बदले जमीन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुनवाई अब नए सिरे से होगी। विशेष न्यायाधीश के तबादले के चलते अमित कात्याल और लालू परिवार से जुड़े इस मामले में आरोप तय करने पर फिर से बहस की जाएगी।

न्यायिक प्रक्रिया में बदलाव और नई तारीख

रेलवे में नौकरी के बदले जमीन लेने से संबंधित कथित भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के चर्चित मामले में कानूनी प्रक्रिया एक बार फिर नए चरण में पहुंच गई है। दिल्ली की राऊज एवेन्यू अदालत में चल रहे इस मुकदमे में अब आरोप तय करने के बिंदु पर नए सिरे से सुनवाई की जाएगी। पहले इस मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने कर रहे थे, लेकिन उनका स्थानांतरण दिल्ली उच्च न्यायालय में रजिस्ट्रार विजिलेंस के पद पर हो जाने के कारण अब इस केस की जिम्मेदारी विशेष न्यायाधीश प्रशांत कुमार को सौंपी गई है।

न्यायाधीश बदलने के कारण इस मामले में पहले जो भी बहस हुई थी, वह अब दोबारा होगी। इस बीच, प्रवर्तन निदेशालय (ED) के वकील ने अदालत से मामले की तैयारियों के लिए अतिरिक्त समय का आग्रह किया है, जिसके बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 14 अक्टूबर की तारीख मुकर्रर की है।

मामले की पृष्ठभूमि और ईडी की जांच

यह पूरा कानूनी विवाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज की गई एफआईआर से उपजा है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान (वर्ष 2004 से 2009 के बीच) रेलवे में ग्रुप डी के पदों पर नियुक्तियां देने के बदले में उम्मीदवारों या उनके परिजनों से कीमती जमीनें ली गई थीं। इन जमीनों के लेनदेन और उससे जुड़ी कंपनियों के माध्यम से आर्थिक लाभ पहुंचाने के आरोपों की गहन पड़ताल जांच एजेंसियों द्वारा की जा रही है।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली उच्च न्यायालय के 17 सितंबर 2024 के आदेश के आधार पर अपनी कार्रवाई को आगे बढ़ाया है। ईडी का आरोप है कि अमित कात्याल अपराध से प्राप्त संपत्ति को छिपाने और उसका लाभ उठाने की प्रक्रिया में सीधे तौर पर शामिल थे। इस मामले में जांच एजेंसी ने लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के कई सदस्यों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल की है। कानून के जानकारों के अनुसार, अभी अदालत में केवल आरोप तय करने की प्रक्रिया चल रही है। आरोप तय होने का अर्थ यह कतई नहीं है कि आरोपी दोषी साबित हो चुके हैं, बल्कि यह केवल मुकदमे को आगे बढ़ाने की एक अनिवार्य न्यायिक कड़ी है।

अमित कात्याल की भूमिका और आरोपों का विवरण

अमित कात्याल को लालू प्रसाद यादव का करीबी सहयोगी माना जाता है। इस मामले में ईडी ने उन्हें 11 नवंबर 2023 को गिरफ्तार किया था। ईडी की जांच के अनुसार, कात्याल एके इन्फोसिस्टम (AK Infosystems) प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक थे। इस कंपनी का पंजीकृत पता डी-1088, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, नई दिल्ली है, जिसे लालू परिवार का निजी आवास बताया जाता है।

जांच एजेंसी का दावा है कि नौकरी के बदले में ली गई जमीनें पहले कात्याल की कंपनी के नाम पर ली गईं और बाद में वर्ष 2014 में इन कंपनियों के शेयर लालू यादव के परिवार के सदस्यों को ट्रांसफर कर दिए गए। इसके अलावा, गुरुग्राम स्थित ब्रह्मा सिटी और कृष वर्ल्ड प्रोजेक्ट में भी करीब 503 करोड़ रुपये से अधिक की हेराफेरी किए जाने का गंभीर आरोप है।

लालू परिवार और जांच की समय-सीमा

इस पूरे घोटाले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत परिवार के कई अन्य सदस्य भी जांच के दायरे में हैं। सीबीआई ने इस मामले में पहली बार 18 मई 2022 को प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी। इसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग के कोण की जांच करते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने अगस्त 2022 में प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) दर्ज की थी। अब सभी की निगाहें 14 अक्टूबर की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, क्योंकि उसी दिन यह स्पष्ट हो सकेगा कि अमित कात्याल और अन्य आरोपियों पर किन विशिष्ट धाराओं के तहत आरोप तय किए जाएंगे और अदालत की आगे की क्या दिशा होगी।

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