इतिहास और कला का संगम है यह संग्रहालय
राजस्थान का पाली जिला अपनी ऐतिहासिक विरासत के लिए जाना जाता है, और इसका प्रमुख केंद्र है बांगड़ राजकीय संग्रहालय। हाल ही में किए गए जीर्णोद्धार और आधुनिक कायाकल्प के बाद, यह संग्रहालय मारवाड़ के समृद्ध इतिहास, कला और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। इस संग्रहालय को कुल सात अलग-अलग दीर्घाओं में विभाजित किया गया है, जहाँ से पर्यटक मानव सभ्यता के विकास और मारवाड़ की रियासतकालीन गौरव गाथा को करीब से समझ सकते हैं।
ताम्रपत्र और प्राचीन पुरातन संस्कृति
संग्रहालय की ताम्रपत्र एवं पुरातन संस्कृति दीर्घा में पाली के सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक इतिहास का एक बड़ा हिस्सा संजोया गया है। यहाँ के सबसे प्रमुख आकर्षणों में विक्रम संवत 1238 का नाडोल ताम्रपत्र और विक्रम संवत 1220 का बामेरा ताम्रपत्र शामिल हैं। इतिहास के जानकारों के लिए यहाँ 2000 ईसा पूर्व की तांबे की चूड़ियाँ रखी गई हैं, जो भाटूंद गांव से प्राप्त हुई थीं। इतना ही नहीं, 8वीं-9वीं शताब्दी की जैन तीर्थंकरों की अद्भुत जैन मूर्तियां और कांस्य प्रतिमाएं भी पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।
जैन मूर्तिकला और शिल्पकारी
संग्रहालय के मध्य हॉल में स्थापित जैन मूर्तिकला दीर्घा पाली और जालोर के क्षेत्रों से प्राप्त प्राचीन मूर्तियों का एक नायाब संग्रह है। यहाँ 11वीं-12वीं शताब्दी की जैन यक्ष प्रतिमा, जो जूना खेड़ा (नाडोल) से मिली थी, बेहद खास मानी जाती है। इसके अलावा 13वीं शताब्दी के भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा और सायला से प्राप्त चंवरधारिणी की मूर्तियां पर्यटकों को उस दौर की बारीक नक्काशी और बेहतरीन कलात्मकता का दर्शन कराती हैं।
लोक जीवन और प्राकृतिक खजाना
संग्रहालय में लोक जीवन एवं सांस्कृतिक झांकी दीर्घा के माध्यम से मारवाड़ की पारंपरिक जीवनशैली को जीवंत किया गया है। यहाँ मॉडल्स के जरिए पाली की कामड़ जाति का मशहूर तेरहताली लोकनृत्य और गरासिया जनजाति के रसोई व घरों के दृश्यों को दिखाया गया है। गरासिया महिलाओं के आभूषणों के साथ-साथ इस दीर्घा में मारवाड़ क्षेत्र के प्रमुख खनिजों का प्रदर्शन भी है, जिनमें जिप्सम, एस्बेस्टस, टंगस्टन, मार्बल और क्वार्टज शामिल हैं।
सुगाली माता की ऐतिहासिक प्रतिमा
मुद्रा और टकसाल दीर्घा में मारवाड़ की पुरानी पाली टकसाल के दुर्लभ सिक्कों का एक बड़ा संग्रह मौजूद है। यहाँ दिल्ली सल्तनत के सुल्तानों के शासनकाल के सिक्के भी प्रदर्शित हैं। इस दीर्घा का सबसे मुख्य आकर्षण आऊवा के ठाकुर कुशाल सिंह की कुलदेवी, मां सुगाली माता की काले पत्थर की प्रतिमा है। 10 सिर और 54 हाथों वाली यह प्रतिमा बेहद प्रभावशाली है, जिसके हर हाथ में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र देखे जा सकते हैं। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी यह प्रतिमा पहले अजमेर संग्रहालय में थी, जिसे अब पाली में पुन: स्थापित किया गया है।
चित्रकला, वीर योद्धा और अस्त्र-शस्त्र
चित्रकला दीर्घा में जोधपुर शैली के माध्यम से मारवाड़ के इतिहास को उकेरा गया है। यहाँ राव सींहा, राव जोधा, राव मालदेव, महाराजा जसवंत सिंह प्रथम, महाराजा मानसिंह और वीर दुर्गादास राठौड़ जैसे शासकों व योद्धाओं के चित्र लगे हैं। लोक देवता पाबूजी की जीवन यात्रा को बयां करती उनकी फड़ भी यहाँ मौजूद है। अस्त्र-शस्त्र दीर्घा में पुरानी बंदूकें, तमंचे, तलवारें, ढाल और तबर रखे गए हैं। साथ ही, उत्खनन दीर्घा में लूनी नदी व इसकी सहायक नदियों के किनारों से मिले पाषाण कालीन औजार जैसे हैंडएक्स, ब्लेड और स्क्रेपर भी प्रदर्शित किए गए हैं, जो हजारों साल पुराने मानव जीवन की कहानी बताते हैं।
https://hindi.news18.com/news/rajasthan/pali-know-about-bangar-government-museum-in-pali-local18-10872713.html